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प्री मेच्योर प्रसव से बच्चे की मौत
Updated Fri, 20 Jul 2018 11:12 PM IST
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प्री मेच्योर प्रसव से बच्चे की मौत
मौत के लिए निजी अस्पताल प्रबंधन पर आरोप
प्रबंधन ने समय से पूर्व प्रसव के आरोप से पल्ला झाड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
रुधौली। नगर पंचायत के एक निजी अस्पताल में समय से पूर्व प्रसव कराने पर बच्चे की मौत का मामला प्रकाश में आया है। मृत नवजात के पिता ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है।
जनपद सिद्धार्थनगर के साड़ी गांव निवासी शिव प्रसाद चौबे ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को दिए गए शिकायती पत्र में भानपुर रोड पर संचालित निजी अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाया है। कहा है कि छह जुलाई को वह आठ माह की गर्भवती पत्नी आशा को लेकर नियमित परीक्षण के लिए हॉस्पिटल गए थे। वहां मौजूद डॉक्टर ने गर्भवती की अल्ट्रासाउंड जांच के बाद बताया कि समय पूरा हो चुका है और बच्चा मां के गर्भ में तिरछा है, जिसे तुरंत ऑपरेशन कर निकालना होगा। जिस पर शिव प्रसाद ने तुरंत 25 हजार रुपये ऑपरेशन खर्च के लिए जमा करवा दिया। ऑपरेशन के बाद बच्चा हुआ और उसकी तबीयत बिगड़ने लगी तो निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें ढाई घंटे के इंतजार के बाद जिला मुख्यालय के गायत्री मंदिर के पास स्थित एक निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। वहां भी डॉक्टर ने बच्चे की हालत को गंभीर बताकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में डॉक्टर ने समय से पहले ऑपरेशन होने के कारण बच्चे की हालत को नाजुक बताते हुए मेडिकल कॉलेज गोरखपुर को रेफर कर दिया। परिवार के लोग उसे लेकर गोरखपुर भागे, मगर वहां पहुंचने के कुछ ही देर बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि निजी अस्पताल में कोई भी महिला सर्जन नहीं है और पुरुष सर्जन ने पत्नी का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के लिए जमा किए गए पैसों की कोई रसीद भी नहीं दी गई और न ही कोई डिस्चार्ज स्लिप बनाई गई। जब अस्पताल प्रबंधन से सारे अभिलेख मांगे गए तो वहां प्रबंधन ने धक्का देकर भगा दिया। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अमनदीप डुली का कहना है कि शिकायती पत्र मिला है। मामले की जांच की जा रही है। यदि अस्पताल प्रबंधन दोषी पाया जाता है तो शीघ्र कड़ी कार्रवाई होगी। वहीं, अस्पताल के अध्यक्ष हाजी अब्दुल वहाब ने कहा कि समय पूरा होने पर ही ऑपरेशन करवाया गया था, जिसके लिए परिजनों ने ऑपरेशन के अनुबंध पर हस्ताक्षर भी किए हैं। प्रसव के बाद तबीयत बिगड़ने के करण बच्चों की मौत हो गई, जिसके लिए परिजन अस्पताल को दोषी बता रहे हैं।
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मौत के लिए निजी अस्पताल प्रबंधन पर आरोप
प्रबंधन ने समय से पूर्व प्रसव के आरोप से पल्ला झाड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
रुधौली। नगर पंचायत के एक निजी अस्पताल में समय से पूर्व प्रसव कराने पर बच्चे की मौत का मामला प्रकाश में आया है। मृत नवजात के पिता ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है।
जनपद सिद्धार्थनगर के साड़ी गांव निवासी शिव प्रसाद चौबे ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को दिए गए शिकायती पत्र में भानपुर रोड पर संचालित निजी अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाया है। कहा है कि छह जुलाई को वह आठ माह की गर्भवती पत्नी आशा को लेकर नियमित परीक्षण के लिए हॉस्पिटल गए थे। वहां मौजूद डॉक्टर ने गर्भवती की अल्ट्रासाउंड जांच के बाद बताया कि समय पूरा हो चुका है और बच्चा मां के गर्भ में तिरछा है, जिसे तुरंत ऑपरेशन कर निकालना होगा। जिस पर शिव प्रसाद ने तुरंत 25 हजार रुपये ऑपरेशन खर्च के लिए जमा करवा दिया। ऑपरेशन के बाद बच्चा हुआ और उसकी तबीयत बिगड़ने लगी तो निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें ढाई घंटे के इंतजार के बाद जिला मुख्यालय के गायत्री मंदिर के पास स्थित एक निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। वहां भी डॉक्टर ने बच्चे की हालत को गंभीर बताकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में डॉक्टर ने समय से पहले ऑपरेशन होने के कारण बच्चे की हालत को नाजुक बताते हुए मेडिकल कॉलेज गोरखपुर को रेफर कर दिया। परिवार के लोग उसे लेकर गोरखपुर भागे, मगर वहां पहुंचने के कुछ ही देर बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि निजी अस्पताल में कोई भी महिला सर्जन नहीं है और पुरुष सर्जन ने पत्नी का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के लिए जमा किए गए पैसों की कोई रसीद भी नहीं दी गई और न ही कोई डिस्चार्ज स्लिप बनाई गई। जब अस्पताल प्रबंधन से सारे अभिलेख मांगे गए तो वहां प्रबंधन ने धक्का देकर भगा दिया। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अमनदीप डुली का कहना है कि शिकायती पत्र मिला है। मामले की जांच की जा रही है। यदि अस्पताल प्रबंधन दोषी पाया जाता है तो शीघ्र कड़ी कार्रवाई होगी। वहीं, अस्पताल के अध्यक्ष हाजी अब्दुल वहाब ने कहा कि समय पूरा होने पर ही ऑपरेशन करवाया गया था, जिसके लिए परिजनों ने ऑपरेशन के अनुबंध पर हस्ताक्षर भी किए हैं। प्रसव के बाद तबीयत बिगड़ने के करण बच्चों की मौत हो गई, जिसके लिए परिजन अस्पताल को दोषी बता रहे हैं।
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