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एबीआरसी की जांच करने कुदरहा पहुंचे एडी बेसिक
Updated Fri, 01 Sep 2017 11:48 PM IST
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एबीआरसी की जांच करने पहुंचे एडी बेसिक
बस्ती/कुदरहा।
कुदरहा के एबीआरसी राम उग्रह यादव की जांच करने एडी बेसिक डॉ. एसपी त्रिपाठी गोरखपुर से टीम के साथ कुदरहा बीआरसी शुक्रवार को पहुंचे। एडी बेसिक ने बताया कि यह जांच शासन के निर्देश पर हो रही है। बताया कि अब तक की जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए। जांच की कार्रवाई जारी रहेगी।
एडी बेसिक ने बताया कि जिन बिंदुओं पर जांच हो रही है, उनमें शिक्षामित्रों की ट्रेनिंग के नाम पर आए धन का सही तरीके से इस्तेमाल न करना, दो दिन के ट्रेनिंग को चार दिन दिखाना और कम शिक्षा मित्रों के स्थान पर अधिक संख्या में दिखाकर गोलमाल करना। एबीआरसी द्वारा जिन स्कूल में तैनाती है, वहां में अनियमितता करना, दूसरे स्कूल का वित्तीय अधिकार रखना और उसमें वित्तीय अनियमितता करना, जिस स्कूल में हेड मास्टर के रूप में तैनाती है, उस स्कूल में पढ़ाने न जाना, एमडीएम, ड्रेस, स्कूल की रंगाई-पोताई सहित अन्य मद के नाम पर आए धन का गलत इस्तेमाल करने सहित अन्य आरोप है।
अकेले नहीं हो सकता गोलमाल
बस्ती। बीआरसी का खाता खंड शिक्षा अधिकारी और एबीआरसी के नाम संयुक्त रूप से होता है, अगर इसमें किसी तरह की वित्तीय अनियमितता होती है, तो यह माना जाता है, कि दोनों ने मिलकर किया है। एक बीईओ का कहना है कि अकेले न तो कोई खंड शिक्षा अधिकारी और न कोई एबीआरसी सरकारी धन का दुरुपयोग कर सकता है। फर्क सिर्फ धन के बंटवारे के हिस्से का होता है। अगर एक लाख रुपये का गोलमाल होता है, तो उसमें 80 हजार बीईओ और बीस हजार एबीआरसी का हिस्सा रहता है। इसमें कुछ हिस्सा सर्व शिक्षा अभियान और बीएसए कार्यालय को चला जाता है। एडी बेसिक भी कहते हैं कि बीआरसी खाते का संचालन संयुक्त रूप से होता है।
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बस्ती/कुदरहा।
कुदरहा के एबीआरसी राम उग्रह यादव की जांच करने एडी बेसिक डॉ. एसपी त्रिपाठी गोरखपुर से टीम के साथ कुदरहा बीआरसी शुक्रवार को पहुंचे। एडी बेसिक ने बताया कि यह जांच शासन के निर्देश पर हो रही है। बताया कि अब तक की जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए। जांच की कार्रवाई जारी रहेगी।
एडी बेसिक ने बताया कि जिन बिंदुओं पर जांच हो रही है, उनमें शिक्षामित्रों की ट्रेनिंग के नाम पर आए धन का सही तरीके से इस्तेमाल न करना, दो दिन के ट्रेनिंग को चार दिन दिखाना और कम शिक्षा मित्रों के स्थान पर अधिक संख्या में दिखाकर गोलमाल करना। एबीआरसी द्वारा जिन स्कूल में तैनाती है, वहां में अनियमितता करना, दूसरे स्कूल का वित्तीय अधिकार रखना और उसमें वित्तीय अनियमितता करना, जिस स्कूल में हेड मास्टर के रूप में तैनाती है, उस स्कूल में पढ़ाने न जाना, एमडीएम, ड्रेस, स्कूल की रंगाई-पोताई सहित अन्य मद के नाम पर आए धन का गलत इस्तेमाल करने सहित अन्य आरोप है।
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अकेले नहीं हो सकता गोलमाल
बस्ती। बीआरसी का खाता खंड शिक्षा अधिकारी और एबीआरसी के नाम संयुक्त रूप से होता है, अगर इसमें किसी तरह की वित्तीय अनियमितता होती है, तो यह माना जाता है, कि दोनों ने मिलकर किया है। एक बीईओ का कहना है कि अकेले न तो कोई खंड शिक्षा अधिकारी और न कोई एबीआरसी सरकारी धन का दुरुपयोग कर सकता है। फर्क सिर्फ धन के बंटवारे के हिस्से का होता है। अगर एक लाख रुपये का गोलमाल होता है, तो उसमें 80 हजार बीईओ और बीस हजार एबीआरसी का हिस्सा रहता है। इसमें कुछ हिस्सा सर्व शिक्षा अभियान और बीएसए कार्यालय को चला जाता है। एडी बेसिक भी कहते हैं कि बीआरसी खाते का संचालन संयुक्त रूप से होता है।
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