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राजस्व निरीक्षक और लेखपालों को मुस्तैद किया

Fri, 01 Sep 2017 11:48 PM IST
Updated Fri, 01 Sep 2017 11:48 PM IST
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राजस्व निरीक्षक और लेखपालों को मुस्तैद किया
लेखपाल के जमीन आवंटन के खेल में तहसील प्रशासन
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बस्ती।
लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष राम सुमेर के पिता के नाम अनियमित रूप से की गई जमीन आवंटन के मामले में पूरा सदर तहसील प्रशासन संदेह के घेरे में आ गया है। इस खेल में तत्कालीन लेखपाल, नायक तहसीलदार, तहसीलदार और एसडीएम की भूमिका सामने आ रही है। यही कारण है कि प्रशासन दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने से पीछे हट रहा है। हालांकि, एसडीएम कीर्तिप्रकाश भारती और तहसीलदार अनिल कुमार रस्तोगी ने कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया है।

जमीन आवंटन की पत्रावली ने तहसील प्रशासन के अनियमित कार्यों की पोल खोल कर रख दी है। किस तरह लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष के दबाव में आकर उनके पिता के नाम आवास के लिए एक बिस्वा के स्थान पर पांच बिस्वा जमीन सारे नियम कानून को ताक पर रखकर आवंटित किया गया। उससे तहसील प्रशासन की कार्यशैली का पता चलता है। नियमानुसार पहले तो किसी भी सरकारी कर्मी के परिवार के किसी भी सदस्य के नाम न तो आवासीय और न कृषि के लिए जमीन आवंटित हो सकती है। आवास के लिए एक लाभार्थी को 19 एअर से अधिक जमीन आवंटित नहीं हो सकती, मगर यहां पर तो 69 एअर आवंटित कर दिया। आवंटित पत्रावली से पता चला कि जिस जमीन को 17 जुलाई 2014 में तत्कालीन एसडीएम राम प्रसाद ने आवंटित किया, उसे छह साल पहले यानि छह जून 2008 तत्कालीन एसडीएम महेशचंद्र शर्मा अनियमित मानकर खारिज कर चुके हैं। पत्रावली पर हलका लेखपाल धीरेंद्र श्रीवास्तव ने जमीन आवंटन पर 24 जून 2007 को रिपोर्ट लगाई, तत्कालीन नायब तहसीलदार राजेश्वरी पांडेय ने 25 जून 2007 को अपनी सहमति दी, उसके बाद तत्कालीन तहसीलदार वीडी वर्मा ने उसी दिन यानि 25 जून 2007 को अपनी सहमति दी, इसी आधार पर तत्कालीन एसडीएम राम प्रसाद ने जमीन आवंटित करने वाले आदेश पर हस्ताक्षर किया। इस तरह संगठित होकर नियम विरुद्ध जमीन आवंटित कर दिया। एक तरह से इन लोगों ने सरकारी जमीन को बेचने पर मुहर लगाया। इसे लेकर सदर, भानपुर और रुधौली तहसीलों के संघ के पदाधिकारी विरोध जता चुके हैं।
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