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अंधविश्वास में विवाहिता की मौत
Updated Mon, 17 Jul 2017 11:48 PM IST
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अंधविश्वास के चलते विवाहिता की मौत
गायघाट (बस्ती)।
डिजिटल युग में पहुंच रहे देश में अंधविश्वास एवं रूढ़ियां अभी कायम हैं। खसरा को बड़ी माता मानकर पूजा-पाठ में जुटे परिवार के लोगों ने दवा बंद करा दी। 10 दिन से पीड़ित महिला की रविवार रात मौत हो गई।
कलवारी क्षेत्र के कोरमा गांव में सुनीता (25) पत्नी बलिराम को छह जुलाई को तेज बुखार शुरू हुआ। पति बलिराम के मुताबिक पाऊं कस्बे के निजी चिकित्सक से इलाज शुरू कराया गया। दो दिन बाद गले के पास गिल्टी बढ़ गई और शरीर में दर्द बढ़ने लगा। दो दिन और बीत जाने पर पूरे शरीर में बड़े-बड़े दाने दिखाई देने लगे। दवा कराने के दौरान परिवार के लोगों ने कहा कि खसरा के रूप में बड़ी माता जी का प्रकोप है। अब दवा मत कराओ। तभी से दवा बंद कर लोग अंधविश्वास के तहत कार्य करते रहे। रविवार की रात पीड़िता सुनीता ने दम तोड़ दिया। सुनीता की छह वर्षी बेटी करीना, तीन वर्षीय रीना और दो माह का बेटा राजन है। बच्चों का रो-रो कर बुरा हाल है। पूरा परिवार ही नहीं गांव भी सदमे में है। ससुर धर्मराज ने बताया कि खसरा होने के बाद परिवार ने एएनएम सहित किसी सरकारी डॉक्टर को नहीं बताया। वहीं गांववालों का कहना है कि हम सबको सुनीता की मौत के बाद पता चला कि उसे खसरा था। महिलाओं का कहना था कि आमतौर पर खसरा के गंवई इलाज के रूप में जब शरीर पर बने फोफले सूखने लगते हैं तब पीड़ित को पानी छुआया जाता है। सरसों का तेल लगाया जाता है। खसरा पीड़ित परिवार में बिना तेल-मसाले का भोजन किया जाता है। साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। लेकिन सुनीता को खसरा है। यह बात किसी को नहीं पता थी। इस बाबत प्रभारी चिकित्साधिकारी बहादुरपुर डॉ. पवन वर्मा ने बताया कि खसरा रोग है। इसका इलाज अवश्य कराएं। बरसात के बाद वायरल फीवर, टायफाइड, डेंगू, चिकन पॉक्स आदि संक्रामक बीमारियां तेजी से सक्रिय हो जाती हैं। मरीज को हल्का बुखार होने के बाद तुरंत खून की जांच कराकर सरकारी डॉक्टर से इलाज कराना चाहिए। छोटी सी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
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गायघाट (बस्ती)।
डिजिटल युग में पहुंच रहे देश में अंधविश्वास एवं रूढ़ियां अभी कायम हैं। खसरा को बड़ी माता मानकर पूजा-पाठ में जुटे परिवार के लोगों ने दवा बंद करा दी। 10 दिन से पीड़ित महिला की रविवार रात मौत हो गई।
कलवारी क्षेत्र के कोरमा गांव में सुनीता (25) पत्नी बलिराम को छह जुलाई को तेज बुखार शुरू हुआ। पति बलिराम के मुताबिक पाऊं कस्बे के निजी चिकित्सक से इलाज शुरू कराया गया। दो दिन बाद गले के पास गिल्टी बढ़ गई और शरीर में दर्द बढ़ने लगा। दो दिन और बीत जाने पर पूरे शरीर में बड़े-बड़े दाने दिखाई देने लगे। दवा कराने के दौरान परिवार के लोगों ने कहा कि खसरा के रूप में बड़ी माता जी का प्रकोप है। अब दवा मत कराओ। तभी से दवा बंद कर लोग अंधविश्वास के तहत कार्य करते रहे। रविवार की रात पीड़िता सुनीता ने दम तोड़ दिया। सुनीता की छह वर्षी बेटी करीना, तीन वर्षीय रीना और दो माह का बेटा राजन है। बच्चों का रो-रो कर बुरा हाल है। पूरा परिवार ही नहीं गांव भी सदमे में है। ससुर धर्मराज ने बताया कि खसरा होने के बाद परिवार ने एएनएम सहित किसी सरकारी डॉक्टर को नहीं बताया। वहीं गांववालों का कहना है कि हम सबको सुनीता की मौत के बाद पता चला कि उसे खसरा था। महिलाओं का कहना था कि आमतौर पर खसरा के गंवई इलाज के रूप में जब शरीर पर बने फोफले सूखने लगते हैं तब पीड़ित को पानी छुआया जाता है। सरसों का तेल लगाया जाता है। खसरा पीड़ित परिवार में बिना तेल-मसाले का भोजन किया जाता है। साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। लेकिन सुनीता को खसरा है। यह बात किसी को नहीं पता थी। इस बाबत प्रभारी चिकित्साधिकारी बहादुरपुर डॉ. पवन वर्मा ने बताया कि खसरा रोग है। इसका इलाज अवश्य कराएं। बरसात के बाद वायरल फीवर, टायफाइड, डेंगू, चिकन पॉक्स आदि संक्रामक बीमारियां तेजी से सक्रिय हो जाती हैं। मरीज को हल्का बुखार होने के बाद तुरंत खून की जांच कराकर सरकारी डॉक्टर से इलाज कराना चाहिए। छोटी सी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
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