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Basti News: निष्प्रयोज्य होने के कगार पर गरीबों के 360 आशियाने... नहीं हो सके आवंटित

Thu, 13 Jul 2023 01:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Thu, 13 Jul 2023 01:21 AM IST
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360 houses of the poor on the verge of being unusable...could not be allotted
निष्प्रयोज्य होने के कगार पर गरीबों के 360 आशियाने... नहीं हो सके आवंटित
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बस्ती। गरीबों को मुफ्त में छत देने के लिए 12 वर्ष पहले बने 360 कांशीराम आवास अब तक किसी को आवंटित नहीं हो सके हैं। इसके चलते यह भवन जर्जर होने लगे हैं। यह अलग बात है कि तमाम लोग छत के लिए लाइन में हैं, मगर अधिकारियों ने कांशीराम आवास की ओर नजर तक नहीं घुमाई।
बसपा सरकार में मान्यवर कांशीराम आवास योजना के तहत गरीबों को मुफ्त आवास मुहैया कराने की प्रदेश भर में मुहिम छिड़ी थी। इसके लिए मुख्यालय से सटे एक किलोमीटर के दायरे में तीन स्थल चयनित हुआ था। प्रथम चरण में चननी और द्वितीय चरण में डारीडीहा में गरीबों की कालोनी विकसित की गई। यहां कुछ हद तक पात्रों का चयन कर आवास भी आवंटित हुए। तीसरे चरण में छविलहा खोर गांव के बाहर तीन मंजिला 15 इमारतों में 360 आशियाने तैयार किए गए थे। इसके आवंटन की बारी थी लेकिन तब तक निजाम बदल गया। इसके बाद से जिम्मेदार इसकी सुधि लेना ही भूल गए। अब यह आवास जर्जर हो रहे हैं।
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गायब हो गए दरवाजे और खिड़कियां
एक-एक कर सभी इमारतों की खिड़कियां और दरवाजे गायब हो चुके हैं। आवासीय कालोनी में चौतरफा झाड़-झंंखाड़ उग आए हैं। घनी झाड़ियों के चलते इन भवनों में प्रवेश करने में डर लगता है। सूनेपन में धूप, बरसात की मार झेलते-झेलते ये सभी इमारतें बदरंग हो गई है। दीवारों के प्लास्ट भी कहीं-कहीं उखड़ गए हैं। वायरिंग के तार कहीं गायब है तो कहीं लटके पड़े हैं। इस कालोनी की सड़क भी क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
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बिजली और पानी की व्यवस्था नहीं
शुरुआत में बिजली सप्लाई के लिए इमारतों के सामने खंभे और केबिल दौड़ाए गए थे, लेकिन इसके बाद आगे का कार्य नहीं पूरा किया गया। आवास आवंटन न होने से कालोनियों में कनेक्शन नहीं हो पाया। जिससे लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए खंभे और केबल भी बेमतलब साबित हुए।
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करोड़ों खर्च से तैयार इमारतें 2015 में हुई थी हस्तांतरित
करोड़ों रूपये खर्च से तैयार 360 गरीबों के आवास वाली इमारतें वर्ष 2015 में ही नगर पालिका को हैंड ओवर हो गई थी। लेकिन इसे मानव संपदा से गुलजार नहीं किया जा सका। जबकि शहरी क्षेत्र में निवास करने वाले बेघर लोगों को चिह्नित कर उनमें इन आवासों का आवंटन होना था। ताकि उन्हें खानाबदोश की जिंदगी से मुक्ति मिल सके।
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पानी की व्यवस्था नहीं
इस कालोनी में आवासों का आवंटन न होने से पानी की भी व्यवस्था नहीं बन पाई है। बिल्डिंग निर्माण के बाद पाइपलाइन का कार्य हुआ था। मगर सूनेपन में उसकी भी देखरेख नहीं हो पाई। जगह-जगह पाइप टूट गई है। पानी के सप्लाई की व्यवस्था ही नहीं बन पाई है।
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रहने योग्य बनाने में फिर खर्च करना होगा धन
छविलहा खोर में बनाए गए आवासीय कालोनी को रहने योग्य बनाने में अब फिर से धन खर्च करना होगा। कालोनी परिसर की सफाई के अलावा बिजली, पानी, फर्नीचर, सड़क, फर्श, प्लास्टर, रंगाई-पुताई आदि कार्य फिर से कराने होंगे। इसके लिए नगर पालिका के पास धन नहीं है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को भी इसकी कोई फिक्र नहीं है। इसलिए आवास आवंटन की उम्मीद अभी भी न के बराबर है।

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छविलहा खोर में बनाए गए आवासीय कालोनी में अभी बुनियादी सुविधाएं नहीं है। कार्यदायी एजेंसी ने इसके लिए शासन से धन का डिमांड भी की है। प्रकरण डीएम के संज्ञान में है। जब तक कालोनी में सभी सुविधाएं मुहैया नहीं होंगी आवास आवंटन नहीं हो सकता है। -दुर्गेश्वर त्रिपाठी, ईओ, नगर पालिका परिषद।
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