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नगर पंचायत रुधौली: विवादों के बीच गुजरा वर्ष
Updated Tue, 11 Dec 2018 11:40 PM IST
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नगर पंचायत रुधौली : विवादों के बीच गुजरा वर्ष
12 दिसंबर 2017 को अध्यक्ष और सदस्यों ने ली थी शपथ
अमर उजाला ब्यूरो
रुधौली। वर्ष 2017 में हुए निकाय चुनाव के क्रम में पहली बार नगर पंचायत का चुनाव हुआ। यहां लोगों को विकास का एक नये सवेरे की उम्मीद जगी। चुनाव आयोग के निर्धारित तिथियों पर चुनाव प्रक्रिया तो संपन्न हुई लेकिन उसके बाद जो भी विवाद प्रत्याशियों के बीच पैदा हुए उनका खामियाजा आज भी नगर पंचायत भुगत रहा है। नवसृजित नगर पंचायत गठन के एक साल समाप्त हो जाने के बाद भी विकास को पंख नहीं लग सके हैं। पहली दिसंबर 2017 को नगर पंचायत अध्यक्ष की गद्दी संभालते ही धीरसेन निषाद का विवादों से नाता शुरू हो गया। शुरुआत चार दिसंबर को हुई जब क्षेत्रीय विधायक संजय जायसवाल के प्रतिनिधि महेंद्र सिंह ने चेयरमैन की निर्धारित आयु सीमा से कम होने का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से लेकर चुनाव आयोग तक शिकायत की। अभी यह प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है।
गद्दी संभालने के बाद चेयरमैन धीरसेन निषाद ने सभी वार्डों में चौपाल लगाकर विकास के नाम पर सार्वजनिक विवाह घर, सार्वजनिक शौचालय, वार्डों में स्थित तालाबों के सुन्दरीकरण, दुरुस्त सड़कें व जल निकासी की उचित व्यवस्था समेत कई वादे किए, लेकिन यह स्थिति आज भी साकार नहीं हो पाई है। कुछ वार्डों में सार्वजनिक शौचालय तो बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन आमजन के प्रयोग के लिए अभी एक भी शौचालय चालू नहीं किया गया है। आंकड़ों के अनुसार बीते 12 दिसंबर 2017 को शपथ ग्रहण के बाद एक साल में राज्य वित्त आयोग से लगभग तीन करोड़ की धनराशि मिली है, जिसमें से नगर पंचायत कार्यालय में तैनात कर्मचारियों, सफाई कर्मियों के वेतन एवं कार्यालय खर्च मिलाकर लगभग 90 लाख, पुराने कार्यों के भुगतान में लगभग 85 लाख एवं कार्यालय के नये भवन निर्माण में लगभग 30 लाख रुपये खर्च किए गए, लगभग 90 लाख राज्य वित्त निधि में अवशेष हैं। इसके अलावा 14वें वित्त से 1.53 करोड़ पहली बार तथा 47 लाख की धनराशि दूसरी बार प्राप्त हुई। इस बजट से कार्य कराने के लिए माह अप्रैल व सितंबर में दो बार टेंडर कराया गया लेकिन दोनों ही बार आपत्तियों के चलते टेंडर निरस्त कर दिए गए।
इनकी सुनें
शांति नगर वार्ड के वरिष्ठ नागरिक हरिराम सिंह का कहना है कि वर्तमान अध्यक्ष का सत्तारूढ़ दल से न होना इस नगर के विकास की सबसे बड़ी बाधा है। वर्तमान चेयरमैन में राजनीतिक संबंधों को निभाने एवं नगर पंचायत को उचित ढंग चलाने के लिए अनुभव की कमी है।
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डॉ. इफ्तेखार अहमद ने कहा कि चेयरमैन के आने से सड़क, बिजली, पानी समेत अन्य समस्याओं के लिए उम्मीद जगी थी, लेकिन अभी तक के कार्यकाल में यह स्पष्ट कर दिया कि आगे के चार साल संभवत: ऐसे ही गुजारने होंगे। रुधौली का विकास शून्य पर खड़ा दिखाई दे रहा है।
हियुवा के जिला संगठन मंत्री रवि मोदनवाल का कहना है कि जिस उम्मीद के साथ रुधौली की जनता ने धीरसेन निषाद को कुर्सी पर बैठाया था, वह उम्मीदों पर अब तक खरा नहीं उतर पाए हैं। अब तक सिर्फ विवादों से उनका नाता रहा विकास से यह नगर पंचायत आज भी कोसों दूर है।
निजी विद्यालय संचालक सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि नगर पंचायत चुनाव होने के बाद विकास कार्य में तेजी की उम्मीद थी, लेकिन वार्ड में एक स्ट्रीट लाइट तक नहीं लगी है। विकास और अन्य मुद्दों पर जब चेयरमैन से बात की जाती है तो बजट ना होने का रोना रोते हैं।
कोट
जब मैंने नगर पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी संभाली थी तो यह नगर पंचायत लगभग सवा दो करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले दबा था, नगर पंचायत के खाते में धन ही नहीं था। दूसरी ओर ठेकेदार भुगतान के लिए लगातार डीएम से शिकायत कर दबाव बना रहे थे। बीते एक साल में राज्य वित्त से मिले धन से लगभग 80 प्रतिशत से पुराने भुगतान निपटाए गए हैं। 14वें वित्त से मिले धन से कार्य कराने को दो बार टेंडर कराया गया, लेकिन दोनों ही बार राजनीतिक विरोधों के कारण टेंडर निरस्त करा दिया गया। शुरुआत के चार महीने इस नगर पंचायत की व्यवस्थाओं को समझने व सुधारने में और शेष समय पुराने भुगतानों को निपटाने में निकल गया। अब नगर पंचायत कर्ज से लगभग मुक्त हो चुका है। अब विकास को नये आयाम मिलेंगे। -धीरसेन निषाद, चेयरमैन।
नगर पंचायत पर नजर
स्थापना--जनवरी 2011
वार्ड 15 में आबादी 25 हजार
संपर्क मार्ग- 05, पार्क दो
हैंडपंप 188, खराब 36
पथ प्रकाश बिंदु-400, खराब 62
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12 दिसंबर 2017 को अध्यक्ष और सदस्यों ने ली थी शपथ
अमर उजाला ब्यूरो
रुधौली। वर्ष 2017 में हुए निकाय चुनाव के क्रम में पहली बार नगर पंचायत का चुनाव हुआ। यहां लोगों को विकास का एक नये सवेरे की उम्मीद जगी। चुनाव आयोग के निर्धारित तिथियों पर चुनाव प्रक्रिया तो संपन्न हुई लेकिन उसके बाद जो भी विवाद प्रत्याशियों के बीच पैदा हुए उनका खामियाजा आज भी नगर पंचायत भुगत रहा है। नवसृजित नगर पंचायत गठन के एक साल समाप्त हो जाने के बाद भी विकास को पंख नहीं लग सके हैं। पहली दिसंबर 2017 को नगर पंचायत अध्यक्ष की गद्दी संभालते ही धीरसेन निषाद का विवादों से नाता शुरू हो गया। शुरुआत चार दिसंबर को हुई जब क्षेत्रीय विधायक संजय जायसवाल के प्रतिनिधि महेंद्र सिंह ने चेयरमैन की निर्धारित आयु सीमा से कम होने का आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन से लेकर चुनाव आयोग तक शिकायत की। अभी यह प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है।
गद्दी संभालने के बाद चेयरमैन धीरसेन निषाद ने सभी वार्डों में चौपाल लगाकर विकास के नाम पर सार्वजनिक विवाह घर, सार्वजनिक शौचालय, वार्डों में स्थित तालाबों के सुन्दरीकरण, दुरुस्त सड़कें व जल निकासी की उचित व्यवस्था समेत कई वादे किए, लेकिन यह स्थिति आज भी साकार नहीं हो पाई है। कुछ वार्डों में सार्वजनिक शौचालय तो बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन आमजन के प्रयोग के लिए अभी एक भी शौचालय चालू नहीं किया गया है। आंकड़ों के अनुसार बीते 12 दिसंबर 2017 को शपथ ग्रहण के बाद एक साल में राज्य वित्त आयोग से लगभग तीन करोड़ की धनराशि मिली है, जिसमें से नगर पंचायत कार्यालय में तैनात कर्मचारियों, सफाई कर्मियों के वेतन एवं कार्यालय खर्च मिलाकर लगभग 90 लाख, पुराने कार्यों के भुगतान में लगभग 85 लाख एवं कार्यालय के नये भवन निर्माण में लगभग 30 लाख रुपये खर्च किए गए, लगभग 90 लाख राज्य वित्त निधि में अवशेष हैं। इसके अलावा 14वें वित्त से 1.53 करोड़ पहली बार तथा 47 लाख की धनराशि दूसरी बार प्राप्त हुई। इस बजट से कार्य कराने के लिए माह अप्रैल व सितंबर में दो बार टेंडर कराया गया लेकिन दोनों ही बार आपत्तियों के चलते टेंडर निरस्त कर दिए गए।
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शांति नगर वार्ड के वरिष्ठ नागरिक हरिराम सिंह का कहना है कि वर्तमान अध्यक्ष का सत्तारूढ़ दल से न होना इस नगर के विकास की सबसे बड़ी बाधा है। वर्तमान चेयरमैन में राजनीतिक संबंधों को निभाने एवं नगर पंचायत को उचित ढंग चलाने के लिए अनुभव की कमी है।
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डॉ. इफ्तेखार अहमद ने कहा कि चेयरमैन के आने से सड़क, बिजली, पानी समेत अन्य समस्याओं के लिए उम्मीद जगी थी, लेकिन अभी तक के कार्यकाल में यह स्पष्ट कर दिया कि आगे के चार साल संभवत: ऐसे ही गुजारने होंगे। रुधौली का विकास शून्य पर खड़ा दिखाई दे रहा है।
हियुवा के जिला संगठन मंत्री रवि मोदनवाल का कहना है कि जिस उम्मीद के साथ रुधौली की जनता ने धीरसेन निषाद को कुर्सी पर बैठाया था, वह उम्मीदों पर अब तक खरा नहीं उतर पाए हैं। अब तक सिर्फ विवादों से उनका नाता रहा विकास से यह नगर पंचायत आज भी कोसों दूर है।
निजी विद्यालय संचालक सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि नगर पंचायत चुनाव होने के बाद विकास कार्य में तेजी की उम्मीद थी, लेकिन वार्ड में एक स्ट्रीट लाइट तक नहीं लगी है। विकास और अन्य मुद्दों पर जब चेयरमैन से बात की जाती है तो बजट ना होने का रोना रोते हैं।
कोट
जब मैंने नगर पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी संभाली थी तो यह नगर पंचायत लगभग सवा दो करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले दबा था, नगर पंचायत के खाते में धन ही नहीं था। दूसरी ओर ठेकेदार भुगतान के लिए लगातार डीएम से शिकायत कर दबाव बना रहे थे। बीते एक साल में राज्य वित्त से मिले धन से लगभग 80 प्रतिशत से पुराने भुगतान निपटाए गए हैं। 14वें वित्त से मिले धन से कार्य कराने को दो बार टेंडर कराया गया, लेकिन दोनों ही बार राजनीतिक विरोधों के कारण टेंडर निरस्त करा दिया गया। शुरुआत के चार महीने इस नगर पंचायत की व्यवस्थाओं को समझने व सुधारने में और शेष समय पुराने भुगतानों को निपटाने में निकल गया। अब नगर पंचायत कर्ज से लगभग मुक्त हो चुका है। अब विकास को नये आयाम मिलेंगे। -धीरसेन निषाद, चेयरमैन।
नगर पंचायत पर नजर
स्थापना--जनवरी 2011
वार्ड 15 में आबादी 25 हजार
संपर्क मार्ग- 05, पार्क दो
हैंडपंप 188, खराब 36
पथ प्रकाश बिंदु-400, खराब 62