फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   जिले में दम तोड़ रही भारत की पुरातन आयुर्वेदिक पद्धति

जिले में दम तोड़ रही भारत की पुरातन आयुर्वेदिक पद्धति

Wed, 17 Oct 2018 11:56 PM IST
Updated Wed, 17 Oct 2018 11:56 PM IST
विज्ञापन
जिले में दम तोड़ रही भारत की पुरातन आयुर्वेदिक पद्धति
27 वर्ष से किराए के भवन में है अस्पताल
विज्ञापन

कोर्ट एरिया में बने राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल बदहाल
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। विश्व में पहचान बना चुकी भारतीय आयुर्वेद पद्धति जिले में दम तोड़ रही है। बजट के अभाव में कोर्ट एरिया में बने आयुर्वेदिक अस्पताल की रंगाई-पुताई तक नहीं हो पा रही है। मरीजों को भर्ती करने के लिए अस्पताल में रखे बेड तक टूट गए हैं। ऐसे में जैसे-तैसे किसी तरह लोगों का इलाज चल रहा है, पर जिम्मेदारों की नजर इस पर नहीं पड़ रही है।
आयुर्वेद पद्धति से लोगों का उपचार हो इसके लिए शासन ने वर्ष 1991 में जिले के कोर्ट एरिया में 15 शैय्यायुक्त राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल की सौगात दी । शुरुआती दिनों में तो इस अस्पताल की स्थिति ठीक थी, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में धीरे-धीरे यहां मरीज आने कम होने लगे। पहले जहां प्रतिदिन दो सौ की ओपीडी होती थी, वही यह आंकड़ा सिमटकर पचास पर आ गया है। जानकार हैरानी होगी कि 27 वर्षों से यह अस्पताल किराए के भवन में चल रहा है, इसकी इमारत तक जर्जर हो गई है। परिसर में शुद्ध पेय जल की व्यवस्था न होने से मजबूरन लोग हैंडपंप का दूषित जल पी रहे हैं। यहां 15 शैय्या में सिर्फ सात ही बेड ही बचे हैं, बाकी कंडम हो चुके हैं। यही नहीं पर्याप्त जगह न होने से महत्वपूर्ण सामान भी बेतरतीब ढंग से रखे हुए हैं। दवाओं की बात की जाए तो आयुष मंत्रालय बनने के बाद इसकी स्थिति में काफी सुधार हुआ है। लगभग सभी प्रकार की दवाएं यहां उपलब्ध है लेकिन कम मरीज आने की वजह से ज्यादातर दवाएं एक्सपायर हो जाती हैं।
विज्ञापन


अस्पताल के कर्मियों पर एक नजर
प्रभारी चिकित्साधिकारी, दो फार्मासिस्ट, दो स्टाफ नर्स, दो वार्ड ब्वॉय, दो स्वच्छिका।

कोट
शुरू से ही इस पद्धति के विकास पर ध्यान नहीं दिया गया, अब पद्धति फिर से लोकप्रिय हो रही है। अब तो सरकार भी इस पर ध्यान देने लगी है। कहा कि इस पद्घति को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से जोड़ दिया जाए तो आम आदमी को और भी लाभ होगा। जर्जर भवन को लेकर जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि शहर में अस्पताल के लिए पर्याप्त भूमि है। 80 लाख का एस्टीमेट भेजा गया है, जिसमें भवन निर्माण व महत्वपूर्ण उपकरण शामिल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

- प्रभारी चिकित्साधिकारी, डॉ वीके श्रीवास्तव।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed