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‘मांस, मदिरा सेवन से पूजा कबूल नहीं’
Updated Mon, 31 Jul 2017 11:42 PM IST
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बस्ती। मनुष्य शरीर भगवान का बनाया हुआ जो मंदिर, मस्जिद की तरह है। मांस, मदिरा के सेवन से पूजा, इबादत कबूल नहीं होती है। यह अवगुण अपराध और भ्रष्टाचार को जन्म देते हैं। गर्भ से बाहर आने पर मानव मन में माया का पर्दा पड़ जात है जिससे वह सब कुछ भूल पाप करने लगता है।
यह विचार संत्संग में बाबा जयगुरुदेव के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी बाबा उमाकांत ने व्यक्त किए। कहा कि मां के गर्भ में जीव उल्टा लटका रहता है। तमाम तकलीफों को सहता है। ईश्वर से प्रार्थना करता है कि इस गर्भरूपी नरक से बाहर कीजिए। जहां सदगुरु खोजकर आत्मकल्याण के रास्ते के नामदान के लिए 24 घंटे भजन करूंगा। जब बाहर आता है तो सब भूल जाता है।
मांस, मदिरा सेवन करने वालों पर बाबा ने प्रहार किया। कहा कि मनुष्य का शरीर भगवान का बनाया हुआ है। जो मंदिर है, मस्जिद है। जब मांस, मछली, अंडा, शराब डालते हैं तो मानव मंदिर श्मशानघाट बनकर अशुद्ध हो जाता है। ऐसे मन से इबादत या पूजा कबूल नहीं होगी। लोगों को मन के मंदिर को साफ रखने के लिए शाकाहारी, सदाचारी, नशामुक्त रहना चाहिए जिससेे घर, परिवार, देश, समाज एवं खुद की आत्मा का भला कर पाएंगे। बाबा ने सतसंग के दौरान सफेद एवं कालेकोट वालों से भक्तों को सावधान किया। कहा कि कम खाओ, गम खाओ तो सफेद कोट वाले डॉक्टर साहब के पास नहीं जाना पड़ेगा। भूख से एक रोट कम खाने पर कोई बीमारी नहीं होगी। इसी तरह गम खाने पर कोर्ट कचहरी का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। प्रवचन के अंत में बाबा उमाकांत महराज ने समझाया कि संत हो या महात्मा या सदगुरु सब को मालिक जीते जी इसी मनुष्य शरीर में ही मिला है। मरने के बाद किसी को मालिक नहीं मिलता है। बिना सदगुरु मालिका को पाने का भेद नहीं मिलता है। सदगुरु मालिक के ही तदरूप होते हैं।
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बाबा उमाकांत महराज के उपदेश
पेट में जीव को सब ज्ञान होता है। बाहर आने पर जीव भोग में फंस जाता है।
मांस, शराब आदि के सेवन से ही दुनिया में भ्रष्टाचार का बोलबाला है।
सफेद एवं काले कोट वालों से सदैव बचना चाहिए।
संतो का सिर्फ एक निशाना होता है जीवात्माओं को उनके सच्चे घर पहुंचाना।
तीसरा नेत्र खुलने पर ही भगवान का दर्शन होता है।
11 लंगर में हजारों ने चखे प्रसाद
राजकीय इंटर कॉलेज में शाम पांच बजे से आयोजित सत्संग कार्यक्रम में सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, फैजाबाद व अन्य जिलों के अलावा नेपाल से भी करीब एक हजार भक्त पहुंचे थे। भक्तों के प्रसाद के लिए परिसर में 11 स्टॉल लगाए गए थे। भारी भीड़ अनुशासन के साथ प्रसाद ग्रहण की। बाबा जयगुरुं देव समिति के मंडल अध्यक्ष मधुसूदन प्रसाद मिश्रा, सत्यदेव पाठक, चंदन शुक्ला, सुरेश त्रिपाठी, कैलाशचंद, श्यामलाल रघुवंशी, रोहित यादव, बीएन पांडेय, सरदार मनप्रीत सिंह, सरदार सुखदेव सिंह, राजराम, पप्पू शर्मा, जटाशंकर, दीनानाथ, शिवकुमार आदि लोगों ने सहयोग किया।
यह विचार संत्संग में बाबा जयगुरुदेव के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी बाबा उमाकांत ने व्यक्त किए। कहा कि मां के गर्भ में जीव उल्टा लटका रहता है। तमाम तकलीफों को सहता है। ईश्वर से प्रार्थना करता है कि इस गर्भरूपी नरक से बाहर कीजिए। जहां सदगुरु खोजकर आत्मकल्याण के रास्ते के नामदान के लिए 24 घंटे भजन करूंगा। जब बाहर आता है तो सब भूल जाता है।
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मांस, मदिरा सेवन करने वालों पर बाबा ने प्रहार किया। कहा कि मनुष्य का शरीर भगवान का बनाया हुआ है। जो मंदिर है, मस्जिद है। जब मांस, मछली, अंडा, शराब डालते हैं तो मानव मंदिर श्मशानघाट बनकर अशुद्ध हो जाता है। ऐसे मन से इबादत या पूजा कबूल नहीं होगी। लोगों को मन के मंदिर को साफ रखने के लिए शाकाहारी, सदाचारी, नशामुक्त रहना चाहिए जिससेे घर, परिवार, देश, समाज एवं खुद की आत्मा का भला कर पाएंगे। बाबा ने सतसंग के दौरान सफेद एवं कालेकोट वालों से भक्तों को सावधान किया। कहा कि कम खाओ, गम खाओ तो सफेद कोट वाले डॉक्टर साहब के पास नहीं जाना पड़ेगा। भूख से एक रोट कम खाने पर कोई बीमारी नहीं होगी। इसी तरह गम खाने पर कोर्ट कचहरी का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। प्रवचन के अंत में बाबा उमाकांत महराज ने समझाया कि संत हो या महात्मा या सदगुरु सब को मालिक जीते जी इसी मनुष्य शरीर में ही मिला है। मरने के बाद किसी को मालिक नहीं मिलता है। बिना सदगुरु मालिका को पाने का भेद नहीं मिलता है। सदगुरु मालिक के ही तदरूप होते हैं।
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बाबा उमाकांत महराज के उपदेश
पेट में जीव को सब ज्ञान होता है। बाहर आने पर जीव भोग में फंस जाता है।
मांस, शराब आदि के सेवन से ही दुनिया में भ्रष्टाचार का बोलबाला है।
सफेद एवं काले कोट वालों से सदैव बचना चाहिए।
संतो का सिर्फ एक निशाना होता है जीवात्माओं को उनके सच्चे घर पहुंचाना।
तीसरा नेत्र खुलने पर ही भगवान का दर्शन होता है।
11 लंगर में हजारों ने चखे प्रसाद
राजकीय इंटर कॉलेज में शाम पांच बजे से आयोजित सत्संग कार्यक्रम में सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, फैजाबाद व अन्य जिलों के अलावा नेपाल से भी करीब एक हजार भक्त पहुंचे थे। भक्तों के प्रसाद के लिए परिसर में 11 स्टॉल लगाए गए थे। भारी भीड़ अनुशासन के साथ प्रसाद ग्रहण की। बाबा जयगुरुं देव समिति के मंडल अध्यक्ष मधुसूदन प्रसाद मिश्रा, सत्यदेव पाठक, चंदन शुक्ला, सुरेश त्रिपाठी, कैलाशचंद, श्यामलाल रघुवंशी, रोहित यादव, बीएन पांडेय, सरदार मनप्रीत सिंह, सरदार सुखदेव सिंह, राजराम, पप्पू शर्मा, जटाशंकर, दीनानाथ, शिवकुमार आदि लोगों ने सहयोग किया।