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आवास के नाम सुविधा शुल्क मांगने की हुई पुष्टि
Updated Mon, 24 Jul 2017 05:26 PM IST
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बस्ती। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में प्रधान और सेक्रेटरी द्वारा मांगे जा रहे सुविधा शुल्क के आरोपों की पुष्टि आईएएस अधिकारी एवं बीडीओ सदर चंद्रमोहन गर्ग की जांच में हुआ। जांच में अनेक अपात्रों को दस से तीस हजार रुपये लेकर देने की पुष्टि हुई है। इसके लिए ग्राम पंचायत गनेशपुर के प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। हालांकि इस मामले में सेक्रेटरी को छोड़ देना चर्चा का विषय बना हुआ है।
अपात्रों से धन लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का लाभ देने की पुष्टि पहल बार आईएएस अधिकारी की जांच में हुई है। हालांकि आरोप तो कई ब्लॉकों के प्रधान और सेक्रेटरी पर लग रहे हैं। शिकायतकर्ता शपथ-पत्र देकर कह रहा है कि उससे बीस हजार रुपये ऊपर वालों के देने के नाम पर लिया गया। नाम न छापने पर एक प्रधान ने बताया कि कार्रवाई प्रधान और सेक्रेटरी के विरुद्ध ही होती है, जबकि इसमें ब्लॉक से लेकर विकास भवन तक के लोग शामिल रहते हैं। बताया कि ब्लॉक के बाबू अपात्र को लाभ देने के लिए लाभार्थियों के क्रमवार सूची में परिवर्तन करने के लिए नाम के साथ उर्फ लगा देते हैं। बताया कि जिस ग्राम पंचायतों में अधिक वसूली होती है, उस ग्राम पंचायतों को अधिक आवास दिया जाता है, और जहां पर कम होती वहां पर कम दिया जाता है। गलत नाम को सही कराने के लिए बाबू भी लोगों से धन उगाही करते हैं। ताकि लाभार्थी के खाते में धन भेजा जाता है, सुविधा शुल्क न देने वाले लाभार्थी पासबुक लेकर बैंक और ब्लॉक का चक्कर लगाते रहते हैं।
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अपात्रों से धन लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का लाभ देने की पुष्टि पहल बार आईएएस अधिकारी की जांच में हुई है। हालांकि आरोप तो कई ब्लॉकों के प्रधान और सेक्रेटरी पर लग रहे हैं। शिकायतकर्ता शपथ-पत्र देकर कह रहा है कि उससे बीस हजार रुपये ऊपर वालों के देने के नाम पर लिया गया। नाम न छापने पर एक प्रधान ने बताया कि कार्रवाई प्रधान और सेक्रेटरी के विरुद्ध ही होती है, जबकि इसमें ब्लॉक से लेकर विकास भवन तक के लोग शामिल रहते हैं। बताया कि ब्लॉक के बाबू अपात्र को लाभ देने के लिए लाभार्थियों के क्रमवार सूची में परिवर्तन करने के लिए नाम के साथ उर्फ लगा देते हैं। बताया कि जिस ग्राम पंचायतों में अधिक वसूली होती है, उस ग्राम पंचायतों को अधिक आवास दिया जाता है, और जहां पर कम होती वहां पर कम दिया जाता है। गलत नाम को सही कराने के लिए बाबू भी लोगों से धन उगाही करते हैं। ताकि लाभार्थी के खाते में धन भेजा जाता है, सुविधा शुल्क न देने वाले लाभार्थी पासबुक लेकर बैंक और ब्लॉक का चक्कर लगाते रहते हैं।
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