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खतरे में दो प्राथमिक विद्यालयों का वजूद
Updated Fri, 04 Aug 2017 11:52 PM IST
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विक्रमजोत (बस्ती)। दो दिन से घाघरा का जल स्थिर रहने के बावजूद कल्याणपुर व भरथापुर के पश्चिमी छोर पर जबरदस्त कटान हो रही है। वहां के दो सौ मीटर क्षेत्र में नदी का पानी वापस लौटकर भीषण कटान कर रहा है। जिससे प्राथमिक स्कूल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
मुख्य धारा के विद्यालय करीब हो जाने से खतरा ज्यादा बढ़ गया है। हालांकि दोनों तरफ ईंट भरे बोरे से पाटकर कटर बनाए गये थे लेकिन जलस्तर बढ़ते ही उनमें से ज्यादातर डूब गए। जिसमें भारतीय सेना की 12 हेक्टेयर भूमि भी डूब गई है। जिसमें किसान वार्षिक पट्टे पर खेती करते हैं।
लोगों का कहना है कि पानी घटने से कटान तेज होने की संभावना है।
गौरिया नयन स्थित बाढ़ चौकी पर तैनात बाढ़ प्रखंड अधिकारी कैम्प करने के बजाय हाजिरी लगाने तक सीमित हैं। बांध के 11 स्पर में सात पहले से खस्ताहाल हैं। इस वर्ष बने भदोई स्पर की नोज भी एक सप्ताह पहले धंस चुकी है। मजदूर और बोल्डर के अभाव में नोज मरम्मत कार्य भी हफ्ते भर से बंद है।
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फसलें डूबीं, किसान परेशान
रौद्र रूप ले रही घाघरा का जलस्तर स्थिर होने से भले ही अफसरों ने राहत की सांस ली हो,किसानों के सिर से संकट के बादल अभी नहीं छंटे हैं। ज्यादातर फसलें चौपट होने की कगार पर हैं। बिना बांध वाले स्थानों व दूसरे तटबंधो को पार करके तेजी से पानी खेतों में पहुंच रहा है। जिससे केशवपुर, भदोई, लालपुर गांव की फसलें डूबने लगी हैं। धान व गन्ने के अलावा पशुओं के चारे के लिए बोई चरी व बरसीम भी चौपट हो रही है।
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मुख्य धारा के विद्यालय करीब हो जाने से खतरा ज्यादा बढ़ गया है। हालांकि दोनों तरफ ईंट भरे बोरे से पाटकर कटर बनाए गये थे लेकिन जलस्तर बढ़ते ही उनमें से ज्यादातर डूब गए। जिसमें भारतीय सेना की 12 हेक्टेयर भूमि भी डूब गई है। जिसमें किसान वार्षिक पट्टे पर खेती करते हैं।
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लोगों का कहना है कि पानी घटने से कटान तेज होने की संभावना है।
गौरिया नयन स्थित बाढ़ चौकी पर तैनात बाढ़ प्रखंड अधिकारी कैम्प करने के बजाय हाजिरी लगाने तक सीमित हैं। बांध के 11 स्पर में सात पहले से खस्ताहाल हैं। इस वर्ष बने भदोई स्पर की नोज भी एक सप्ताह पहले धंस चुकी है। मजदूर और बोल्डर के अभाव में नोज मरम्मत कार्य भी हफ्ते भर से बंद है।
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फसलें डूबीं, किसान परेशान
रौद्र रूप ले रही घाघरा का जलस्तर स्थिर होने से भले ही अफसरों ने राहत की सांस ली हो,किसानों के सिर से संकट के बादल अभी नहीं छंटे हैं। ज्यादातर फसलें चौपट होने की कगार पर हैं। बिना बांध वाले स्थानों व दूसरे तटबंधो को पार करके तेजी से पानी खेतों में पहुंच रहा है। जिससे केशवपुर, भदोई, लालपुर गांव की फसलें डूबने लगी हैं। धान व गन्ने के अलावा पशुओं के चारे के लिए बोई चरी व बरसीम भी चौपट हो रही है।