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वाएं 150 किस्मों की, मरीज छिटपुट

Wed, 29 Aug 2018 12:00 AM IST
Updated Wed, 29 Aug 2018 12:00 AM IST
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वाएं 150 किस्मों की, मरीज छिटपुट
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दवाएं 150 किस्मों की, मरीज छिटपुट
डॉक्टरों की शिथिलता से जन औषधि केंद्र बेमतलब
जनऔषधि केंद्र के कर्मियों ने लगाया कमीशन मांगने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। यह है जिला महिला अस्पताल का जन औषधि केंद्र। यहां दवाएं सस्ती हैं, मगर मरीज न के बराबर ही आते हैं। इस केंद्र पर छिटपुट को छोड़ अस्पताल का कोई मरीज नहीं आता। इसका कारण चाहे जो भी हो, मगर जन औषधि केंद्र के कर्मी आरोप लगाते हैं कि कुछ दलाल दवाओं को लिखवाने के बदले कमीशन मांगते हैं।
जी हां, केंद्र सरकार ने गरीबों को बेहतर इलाज को सस्ती दवाएं उपलब्ध हों इसके लिए अपने जिले में तीन जन औषधि केंद्र खोल रखें हैं। इनमें डेढ़ सौ किस्म की दवाएं हैं। इनमें खांसी, सर्दी जुकाम, दस प्रकार की एंटीबॉयोटिक, दर्द, आयरन, कैल्शियम, कीड़ी की दवा के अलावा सभी जीवन रक्षक दवाओं की भरमार है, मगर इस केंद्र पर न तो अस्पताल से किसी डॉक्टर की कोई पर्ची आती है और न ही निजी डॉक्टर सस्ती दवाएं लिखते हैं। इसका कारण सभी जानते हैं कि एलोपैथ की दवाओं में मोटी कमाई होती है।
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मंगलवार को अमर उजाला टीम ने जब महिला अस्पताल स्थित जन औषधि केंद्र का हाल जाना तो पता चला कि माह भर में मात्र दस मरीज यहां तक आए हैं वह भी बाहर की दवा का पर्चा लेकर। इन सभी को दवाएं दी गई हैं। केंद्र पर तैनात कर्मी ने बताया कि जन औषधि केंद्र की दवाएं डॉक्टर क्यों नहीं लिखते हैं, यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है। यहां दवाएं सस्ती हैं, इसका कारण किसी को कोई कमीशन नहीं दिया जाता है। सरकार ने जन औषधि केंद्रों को आपूर्ति होने वाली दवा कंपनियों को भी आर्थिक सहयोग करती है। इन दवाओं पर कोई टैक्स नहीं है। ऐसे में दवाएं तो कारगर हैं, मगर एलोपैथ की दवाओं से सस्ती हैं। कर्मी ने बताया कि सुबह से दोपहर हो गई है। अब तक एक भी पर्चा यहां नहीं आया। जबकि बाहर एलोपैथ की दवा दुकानों पर मरीजों की लाइन लगी है। आरोप लगाया कि कुछ दिन पहले एक महिला आई थी और कमीशन देने की बात कही, मना करने पर उसने कहा कि डॉक्टर इस केंद्र पर मरीजों को दवा लेने के लिए कोई पर्चा नहीं देंगे। सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा ने कहा कि जन औषधि केंद्र पर मौजूद दवाओं को लिखने के निर्देश दिए गए हैं। वैसे तो चिकित्सालय में बैठकर डॉक्टर बाहर की दवा नहीं लिख सकते हैं, मगर जन औषधि केंद्र पर उपलब्ध दवाएं लिख सकते हैं।
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कुपोषण की रिपोर्ट में लापरवाही, सीडीपीओ से खफा
जिला स्तरीय पोषण समिति की बैठक, सीडीपीओ को बुधवार तक रिपोर्ट के निर्देश
समय से रिपोर्ट न देने वालों के वेतन कटौती की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। जनपद के 128 गांवों को जनपदस्तरीय अधिकारियों ने कुपोषण से मुक्त कराने को गोद लिया है। इनमें कुछ अधिकारियों ने समय से सत्यापन नहीं किया है। इसी प्रकार सीडीपीओ बच्चों की संख्या, उनकी सामान्य स्थिति, कुपोषण आदि की भी रिपोर्ट समय से नहीं दे रहे हैं। यह बात आयुक्त की समीक्षा में स्पष्ट हुई है। प्रत्येक दशा में मंगलवार तक संबंधित अधिकारी अपनी रिपोर्ट जिला कार्यक्रम अधिकारी में दें। इसमें लापरवाही करने वालों का वेतन काटा जाएगा। ये निर्देश सीडीओ अरविंद कुमार पांडेय ने दिए हैं। वह मंगलवार को विकास भवन सभागार में डीएम डॉ. राजशेखर के निर्देशन में आयोजित जिला स्तरीय पोषण समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

बैठक में गौर ब्लॉक की परियोजना अधिकारी की अनुपस्थिति पर स्पष्टीकरण के लिए कहा गया। कहा कि कुपोषण से मुक्त करने के लिए विशेष रूप से बाल विकास, चिकित्सा, ग्राम्य विकास, पंचायत विभाग, स्वास्थ्य विभाग, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग एवं खाद्य रसद विभाग ग्रामीण स्तर पर कार्यक्रम संचालित करते हैं। इसमें शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को कुपोषण मुक्त करना, गर्भवती महिलाओं की रक्त जांच, एनीमिया में सुधार करना, ग्रामों में शौचालय बनाना, समय से पुष्टाहार देना आदि महत्वपूर्ण कार्य है, जिसमें युद्ध स्तर पर कार्य किया जाना है। यह काम और समयबद्ध ढंग से किया जाना है। शासन स्तर पर भी इसकी समीक्षा होगी। गर्भवती महिलाओं को समय से आवश्यक उपचार करने, आयरन की गोली देने तथा प्रत्येक माह को पांच, 15 एवं 25 तारीख को पोषण दिवस मनाने, पुष्टाहार वितरण करने के निर्देश दिए गए। सीडीओ ने कहा कि ग्राम पोषण एवं स्वच्छता समिति में 1.14 करोड़ की अवशेष धनराशि है। इससे वजन मशीन, सफाई के साधन, फॉगिंग आदि के सामान खरीदे जाने हैं। इसमें स्वास्थ्य विभाग व बाल विकास विभाग समन्वय से कार्य करें। कहा कि ग्राम विकास, बेसिक शिक्षा, परिवार कल्याण, पंचायत, बाल विकास एंव खाद्य रसद विभाग के प्रमुख सचिव ने दिशा-निर्देश जारी किया है कि प्रत्येक दशा में कुपोषण की समस्या को समाप्त करना है। प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से कुपोषण के हानिकारक प्रभाव डालने वाले कारकों के प्रति जागरूक करने के लिए सुपोषण स्वास्थ्य मेला प्रत्येक माह आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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