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मरीजों की भीड़ से ओपीडी व्यवस्था चरमराई

Mon, 27 Aug 2018 11:54 PM IST
Updated Mon, 27 Aug 2018 11:54 PM IST
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मरीजों की भीड़ से ओपीडी व्यवस्था चरमराई
मरीजों की भीड़ से ओपीडी व्यवस्था चरमराई
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सोमवार को 1500 मरीजों ने कटाई थी पर्ची
दोपहर तक एक हजार मरीज करते रहे इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। मौसम के उतार-चढ़ाव से बीमारियों की बाढ़ आ गई। साथ ही रक्षाबंधन की छुट्टी के चलते सोमवार को जिला अस्पताल पहुंची भीड़ से ओपीडी की व्यवस्था चरमरा गई। दोपहर 12 बजे तक 1503 मरीजों का पर्चा काउंटर से काटा जा चुका था।
सोमवार को डेढ़ हजार लोग विभिन्न बीमारियों के कारण जिला अस्पताल पहुंचे थे। कई डॉक्टर जहां समय से चेंबर में मरीजों को देख रहे थे। वहीं, कई की कुर्सी खाली थी। इससे मरीज फर्श पर इधर-उधर बैठकर डॉक्टर की राह देख रहे थे।
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बरसात के मौसम में अनेक बीमारियां लोगों को अपनी चपेट में ले लेती हैं। कमोवेश हर घरों में सर्दी जुकाम वायरल फीवर और पेट के रोग से लोग ग्रसित है। शनिवार और रविवार की छुट्टी के चलते जिला अस्पताल की ओपीडी ठीक से नहीं चल पाई। सोमवार को जैसे ही अस्पताल खुला चारों तरफ मरीजों का हुजूम उमड़ पड़ा। डॉक्टर भी रक्षाबंधन के कारण अस्पताल अपेक्षाकृत विलम्ब से पहुंचे। इससे बारह बजे तक अस्पताल मरीजों से खचाखच भरा रहा। डॉक्टर रामजी सोनी 12 बजे तक करीब 156 मरीजों देख चुके थे। फिर भी उनके कक्ष के सामने सैकड़ों लोग दिखाने के लिए खड़े थे। उधर, नाक-कान गला विशेषज्ञ डॉ. एसएल कन्नौजिया 12 बजे तक अपनी कुर्सी तक पहुंचे ही नहीं थे। जबकि सैकड़ों की संख्या में मरीज उनके चेंबर से लेकर बरामदे तक जमे हुए थे। बच्चों के डॉक्टर डॉ. सरफराज खान बच्चों का इलाज कर रहे थे। फिर भी उनके कक्ष में बच्चों से अधिक बड़े मरीज की भीड़ खड़ी थी। दवा को लेकर मरीजों में असंतोष दिखा। हर्रैया के गंगा प्रसाद ने बताया कि सरकारी अस्पताल में इलाज कराना प्राइवेट अस्पताल से भी महंगा है। वहां फीस देनी होती है जबकि डॉक्टर महंगी दवाएं लिख देते हैं। जिन्हें बाहर से खरीदने में थैली खाली हो जाती है। रुधौली से आए संजय शुक्ला का भी दर्द कुछ इसी तरह का है। उनका कहना है डॉक्टर विलंब से ओपीडी में आते हैं। इससे मरीजों की भीड़ लग जाती है और दिखाने में पूरा दिन बरबाद हो जाता है। ऐसे में जब बाहर की दुकानों से दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं।
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