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माझा की जमीन में खेती के लिए होती है वसूली
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फालोअप:
माझा की जमीन में खेती के लिए होती है वसूली
रात में फेंके गए बम, पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज, आरोपी भाग निकला
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। छावनी थाना क्षेत्र के सरयू नदी के उस पार माझा क्षेत्र माफिया का अड्डा बनता जा रहा है। नदी उसपार होने से लोग खेती-किसानी के लिए रात में भी रुकते हैं। यहां जमीन के लिए वसूली को लेकर वर्चस्व भी है। वसूली नहीं देने पर मंगलवार रात बम फेंके गए, जिससे झोपड़ी जल गई। साथ ही दो कुत्ते भी झुलस कर मर गए।
बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने थाने पहुंचे 45 वर्षीय किसान राजेंद्र यादव निवासी मड़नामाझा ने माझाकिताअवव्ल गांव निवासी अजय के खिलाफ तहरीर दी। आरोप लगाया कि अजय की अगुवाई में बदमाशों के एक गुट ने रात में खेतों की रखवाली कर रहे कई किसानों को डराया-धमकाया। साथ ही अंजाम भुगत लेने की चेतावनी दी। बाद में देसी बम फेंके, जिससे तीन झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। साथ में रखवाली में साथ रखे गए दो कुत्तों की भी जान चली गई। इस संबंध में छावनी थानाध्यक्ष यशवंत सिंह ने बताया कि शिकायत मिलते ही एक निरीक्षक को पुलिस दल के साथ सरयू नदी के पार नाव से भेजा गया था। माझाक्षेत्र में खेतों पर वर्चस्व को लेकर माह भर पहले दो पक्षों में कहासुनी हुई थी। मंगलवार की रात कुछ अराजकतत्वों ने एक झोपड़ी पर बम फेंके थे। जांच-पड़ताल के बाद माझाकिताअवव्ल निवासी अजय यादव पर मुकदमा पंजीकृत कर तलाश की जा रही है।
जिले के 56 गांव नदी उस पार
बस्ती जनपद के अकेले छावनी क्षेत्र की करीब 14 ग्राम पंचायतों के 56 गांव सरयू नदी उस पार है। जिनमें 47 गांव गैर चिरागी हैं। माझाकिताअवव्ल, मडनामाझा, कुकरहा, आराजी मंगला, गोकुला, पूरे दुखी, भुआरबैराग, माझाजरही में छिटपुट आबादी रहती है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसकी चर्चा बहुत कम होती है। सरयू नदी के पार अयोध्या और अम्बेडकर नगर जिले की सीमा से सटे छावनी थानाक्षेत्र के गांव कुकरा माझा में एक दर्जन परिवार अलग-अलग बसे हैं। आठ महीने माझा में रहकर गन्ना, मंसूर, गेहूं आदि की खेती करते हैं। पुलिस प्रशासन का आवागमन नहीं होने से माझाक्षेत्र के लोग दबंगों का शिकार बनते रहते हैं। खेती करने और बसे रहने के नामपर यहां वसूली करते हैं।
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थाने पहुंचे पीड़ितों ने यह जानकारी दी। पुलिस से शिकायत पर मारते-पीटते भी हैं।
नदी से 10 तो सड़क से 55 किमी पड़ती दूरी
माझा क्षेत्र के उस पार गांवों से छावनी थाने की सड़क से दूरी 55 किलोमीटर तो नदी होकर जाने पर 10 किलोमीटर पड़ती है। छावनी थाना क्षेत्र में आने वाले पांच गांव हैं। यहां पर घटना की सूचना पर अयोध्या और अंबेडकर नगर की डॉयल 100 पुलिस ही पहुंचती है। घटना की रपट दर्ज करने के लिए पुलिसकर्मी बस्ती के छावनी थाने पर जाने कि सलाह देते हैं। आने-जाने की परेशानी से बचने के लिए यहां के लोग छोटी-मोटी घटनाएं सहन कर लेते हैं। जान पर आफत आने पर ही छावनी थाने पहुंचते हैं।
फालोअप
यहां जांच अधूरी, कागज में सिमट गया मामला
मनरेगा का कार्य मशीन से कराने के मामले में नहीं हुई कार्रवाई
बीडीओ ने कहा कि दो दिन में रिपोर्ट नहीं मिली तो होगी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। ब्लॉक क्षेत्र के खेमराजपुर ग्राम पंचायत के बेतावा माझा राजस्व गांव में मनरेगा का कार्य मजदूरों से न करा कर मशीनों से कराये जाने के मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसे लेकर अब ग्रामीण सवाल उठाने लगे हैं। इधर, ग्राम प्रधान व सेक्रेट्री मनरेगा के धन की बंदरबांट में लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान मशीन से कार्य करा कर मजदूरी अपने कुछ चहेते श्रमिकों के खाते में डाल कर निकाल लेते हैं।
ब्लॉक की 14 ग्राम पंचायतों के लगभग 70 गांव नदी के उस पार हैं। जहां मनरेगा का कार्य मशीनों से कराया जाता है या बिना कार्य कराये ही सरकारी रकम का बंदरबांट कर ली जाती है। क्योंकि वहां बाढ़ आने के बाद भौगोलिक परिस्थितियां बदल जाती हैं, जिसे नदी की कटान में दिखाकर इतिश्री कर ली जाती है। जांच-पड़ताल की झंझट भी यहां नहीं रहती। इस नाते अधिकारियों की यहां आवाजाही कम होती है। क्षेत्र के खेमराजपुर ग्राम पंचायत के राजस्व गांव बेतावा जो कि सरयू नदी के किनारे माझा में स्थित है, जहां दूर दराज सात-आठ परिवार ही छप्पर डालकर गुजर-बसर करते हैं। इन इलाकों में मनरेगा योजना के तहत 12 सौ मीटर मिट्टी की सड़क पटाई का कार्य मजदूरों से कराने की बजाय जेसीबी मशीन से रातोंरात करा दिया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने जब इसका विरोध किया तो प्रधान और उनके समर्थक जेसीबी मशीन लेकर भाग खड़े हुए थे। बीडीओ उमाशंकर सिंह ने बताया कि मामले की जांच ब्लॉक के जेई फारूख अहमद व ग्राम पंचायत अधिकारी शैलेंद्र मणि त्रिपाठी को दी गई है, लेकिन अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। यदि जांच रिपोर्ट दो दिनों में नहीं मिलेगी तो संबंधितों पर जांच में शिथिलता बरतने के लिए कार्रवाई होगी।
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माझा की जमीन में खेती के लिए होती है वसूली
रात में फेंके गए बम, पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज, आरोपी भाग निकला
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। छावनी थाना क्षेत्र के सरयू नदी के उस पार माझा क्षेत्र माफिया का अड्डा बनता जा रहा है। नदी उसपार होने से लोग खेती-किसानी के लिए रात में भी रुकते हैं। यहां जमीन के लिए वसूली को लेकर वर्चस्व भी है। वसूली नहीं देने पर मंगलवार रात बम फेंके गए, जिससे झोपड़ी जल गई। साथ ही दो कुत्ते भी झुलस कर मर गए।
बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने थाने पहुंचे 45 वर्षीय किसान राजेंद्र यादव निवासी मड़नामाझा ने माझाकिताअवव्ल गांव निवासी अजय के खिलाफ तहरीर दी। आरोप लगाया कि अजय की अगुवाई में बदमाशों के एक गुट ने रात में खेतों की रखवाली कर रहे कई किसानों को डराया-धमकाया। साथ ही अंजाम भुगत लेने की चेतावनी दी। बाद में देसी बम फेंके, जिससे तीन झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। साथ में रखवाली में साथ रखे गए दो कुत्तों की भी जान चली गई। इस संबंध में छावनी थानाध्यक्ष यशवंत सिंह ने बताया कि शिकायत मिलते ही एक निरीक्षक को पुलिस दल के साथ सरयू नदी के पार नाव से भेजा गया था। माझाक्षेत्र में खेतों पर वर्चस्व को लेकर माह भर पहले दो पक्षों में कहासुनी हुई थी। मंगलवार की रात कुछ अराजकतत्वों ने एक झोपड़ी पर बम फेंके थे। जांच-पड़ताल के बाद माझाकिताअवव्ल निवासी अजय यादव पर मुकदमा पंजीकृत कर तलाश की जा रही है।
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जिले के 56 गांव नदी उस पार
बस्ती जनपद के अकेले छावनी क्षेत्र की करीब 14 ग्राम पंचायतों के 56 गांव सरयू नदी उस पार है। जिनमें 47 गांव गैर चिरागी हैं। माझाकिताअवव्ल, मडनामाझा, कुकरहा, आराजी मंगला, गोकुला, पूरे दुखी, भुआरबैराग, माझाजरही में छिटपुट आबादी रहती है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसकी चर्चा बहुत कम होती है। सरयू नदी के पार अयोध्या और अम्बेडकर नगर जिले की सीमा से सटे छावनी थानाक्षेत्र के गांव कुकरा माझा में एक दर्जन परिवार अलग-अलग बसे हैं। आठ महीने माझा में रहकर गन्ना, मंसूर, गेहूं आदि की खेती करते हैं। पुलिस प्रशासन का आवागमन नहीं होने से माझाक्षेत्र के लोग दबंगों का शिकार बनते रहते हैं। खेती करने और बसे रहने के नामपर यहां वसूली करते हैं।
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नदी से 10 तो सड़क से 55 किमी पड़ती दूरी
माझा क्षेत्र के उस पार गांवों से छावनी थाने की सड़क से दूरी 55 किलोमीटर तो नदी होकर जाने पर 10 किलोमीटर पड़ती है। छावनी थाना क्षेत्र में आने वाले पांच गांव हैं। यहां पर घटना की सूचना पर अयोध्या और अंबेडकर नगर की डॉयल 100 पुलिस ही पहुंचती है। घटना की रपट दर्ज करने के लिए पुलिसकर्मी बस्ती के छावनी थाने पर जाने कि सलाह देते हैं। आने-जाने की परेशानी से बचने के लिए यहां के लोग छोटी-मोटी घटनाएं सहन कर लेते हैं। जान पर आफत आने पर ही छावनी थाने पहुंचते हैं।
फालोअप
यहां जांच अधूरी, कागज में सिमट गया मामला
मनरेगा का कार्य मशीन से कराने के मामले में नहीं हुई कार्रवाई
बीडीओ ने कहा कि दो दिन में रिपोर्ट नहीं मिली तो होगी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। ब्लॉक क्षेत्र के खेमराजपुर ग्राम पंचायत के बेतावा माझा राजस्व गांव में मनरेगा का कार्य मजदूरों से न करा कर मशीनों से कराये जाने के मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसे लेकर अब ग्रामीण सवाल उठाने लगे हैं। इधर, ग्राम प्रधान व सेक्रेट्री मनरेगा के धन की बंदरबांट में लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान मशीन से कार्य करा कर मजदूरी अपने कुछ चहेते श्रमिकों के खाते में डाल कर निकाल लेते हैं।
ब्लॉक की 14 ग्राम पंचायतों के लगभग 70 गांव नदी के उस पार हैं। जहां मनरेगा का कार्य मशीनों से कराया जाता है या बिना कार्य कराये ही सरकारी रकम का बंदरबांट कर ली जाती है। क्योंकि वहां बाढ़ आने के बाद भौगोलिक परिस्थितियां बदल जाती हैं, जिसे नदी की कटान में दिखाकर इतिश्री कर ली जाती है। जांच-पड़ताल की झंझट भी यहां नहीं रहती। इस नाते अधिकारियों की यहां आवाजाही कम होती है। क्षेत्र के खेमराजपुर ग्राम पंचायत के राजस्व गांव बेतावा जो कि सरयू नदी के किनारे माझा में स्थित है, जहां दूर दराज सात-आठ परिवार ही छप्पर डालकर गुजर-बसर करते हैं। इन इलाकों में मनरेगा योजना के तहत 12 सौ मीटर मिट्टी की सड़क पटाई का कार्य मजदूरों से कराने की बजाय जेसीबी मशीन से रातोंरात करा दिया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने जब इसका विरोध किया तो प्रधान और उनके समर्थक जेसीबी मशीन लेकर भाग खड़े हुए थे। बीडीओ उमाशंकर सिंह ने बताया कि मामले की जांच ब्लॉक के जेई फारूख अहमद व ग्राम पंचायत अधिकारी शैलेंद्र मणि त्रिपाठी को दी गई है, लेकिन अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। यदि जांच रिपोर्ट दो दिनों में नहीं मिलेगी तो संबंधितों पर जांच में शिथिलता बरतने के लिए कार्रवाई होगी।