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एक्शन में योगी सरकारः फैक्टरी की जमीन न संपत्तियों पर कब्जे लेने की तैयारी शुरू

Sun, 27 Dec 2020 12:27 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 27 Dec 2020 12:27 AM IST
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Yogi Sarkar in action: Preparations begin to take possession of assets not factory land
रबर फैक्टरी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

योगी के सामने सांसद-विधायकों का विरोध रंग लाया
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रबर फैक्टरी प्रबंधकों के खिलाफ आरसी जारी
श्रमिकों का भुगतान न किए जाने पर श्रमायुक्त का बड़ा कदम

बरेली। किसान सम्मेलन में आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने जनप्रतिनिधियों की ओर से रबर फैक्टरी का मामला उठाए जाने के बाद प्रशासन राज्य सरकार के हाथों से फिसलती उसकी जमीन और संपत्तियां बचाने की कोशिश में जुट गया है। सरकार के तेवर देखते हुए ठोस कानूनी रणनीति बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। श्रमायुक्त ने फैक्टरी प्रबंधन को आरसी जारी कर श्रमिकों का बकाया भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट में पैरवी करने के लिए भी एक वरिष्ठ अधिवक्ता को नामित कर दिया गया है।
रबर फैक्टरी प्रकरण में बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से हाल ही में उसकी जमीन और सारी संपत्तियां अलकेमिस्ट कंपनी के सुपुर्द करने का आदेश सुनाया जा चुका है। इसके बाद फैक्टरी के रिसीवर की ओर से कंपनी को गुजरात में कुछ जमीन पर कब्जा भी दिलाया जा चुका है। फतेहगंज पश्चिमी में रबर फैक्टरी की 1380 एकड़ जमीन पर सरकार की ओर से इंडस्ट्रियल हब बनाने की तैयारी की जा रही थी। इसके लिए शासन की ओर से इस जमीन को राज्य सरकार के स्वामित्व में वापस लेने के लिए जरूरी कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश भी अफसरों को जारी किए गए थे लेकिन फिर भी जरूरी पैरवी नहीं की गई। अफसरों की इस बेपरवाही से नाराज केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, विधायक बहोरन लाल मौर्य और डॉ. डीसी वर्मा ने हाल ही में किसान सम्मेलन में बरेली आए मुख्यमंत्री के सामने रबर फैक्टरी का मुद्दा उठाया था।
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मुख्यमंत्री को इन जनप्रतिनिधियों ने बताया था कि कुछ अफसरों की लापरवाही से अरबों की संपत्ति सरकार के हाथों से निकल आ रही है। केंद्रीय मंत्री ने रबर फैक्टरी प्रकरण में पैरवी के लिए शासन की ओर से नोडल अफसर बनाए गए वरिष्ठ आईएएस मुथु कुमार सामी के इस दिशा में कोई काम न करने का मामला भी उठाया। मुख्यमंत्री ने इस मामले में जल्द जरूरी कार्रवाई करने का वादा किया था। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री के शासन के कई अफसरों को कसने के बाद अफसरशाही में हलचल बढ़ गई है। सीएम कार्यालय से निर्देश जारी किए जाने के बाद श्रमायुक्त कार्यालय ने आनन-फानन में रबर फैक्टरी प्रबंधन के खिलाफ करीब 50 करोड़ की आरसी जारी कर दी है।
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बता दें कि रबर फैक्टरी के पूर्व श्रमिक अपने बकाया भुगतान के लिए कई सालों से संघर्ष कर रहे हैं। सरकारी तंत्र अब तक उनकी मांग को टालता आ रहा था जबकि फैक्टरी बंद हुए 21 साल बीच चुके हैं। हाल ही में रबर फैक्टरी की संपत्तियां अलकेमिस्ट कंपनी के सुपुर्द किए जाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद इन श्रमिकों ने फैक्टरी गेट पर कई दिन तक धरना-प्रदर्शन किया था। उनके बकाया भुगतान के लिए जरूरी रकम की वसूली प्रबंधन से ही की जानी है। माना जा रहा है कि प्रबंधन की ओर से इस रकम का भुगतान न करने पर रबर फैक्टरी की जमीन और संपत्ति कुर्क करके कब्जा लेने का विकल्प श्रम विभाग के सामने खुला रहेगा।

पैरवी के लिए नामित मुंबई के अधिवक्ता को उपलब्ध कराए जरूरी दस्तावेज

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 19 अक्तूबर को इस प्रकरण की सुनवाई पूरी कर रिसीवर को आदेश दिया था कि 14 दिसंबर तक बरेली स्थित रबर फैक्टरी जमीन और उसकी संपत्तियां अलकेमिस्ट एसेट कंसट्रक्शन कंपनी को सौंप दी जाए। अफसरों ने इसके बाद भी हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ कोई पैरवी नहीं की। नोडल अफसर मुथु कुमार सामी भी चुप्पी साधकर बैठ गए। पिछले कुछ दिनों से इस मामले में हलचल शुरू हुई तो डीएम नितीश कुमार ने विधिक राय लेने के बाद शासन को पत्र लिखकर पूरी वस्तुस्थिति से अवगत कराया। अब प्रशासन की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में पक्षकार बनने के लिए एक वरिष्ठ अधिवक्ता को भी नामित कर दिया है। बताया जा रहा है कि यह अधिवक्ता मुंबई क्षेत्र से ही हैं और उन्हें नामित किए जाने से हाईकोर्ट में मजबूत पैरवी करने में बार-बार आने-जाने की भी कोई अड़चन नहीं रहेगी। अधिवक्ता को प्रशासन ने सभी संबंधित दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं। बताते हैं कि प्रशासन ने पांच जनवरी से पहले ही पक्षकार बनने के लिए प्रमाण और अभिलेख जुटाना शुरू कर दिया है ताकि हाईकोर्ट में अपना पक्ष मजबूत किया जा सके। बता दें कि मामले में अभी तक सरकार पक्षकार नहीं थी।

कानूनी पहलू: सप्ताह भर के नोटिस पर संपत्ति पर कब्जा ले सकती है सरकार

राज्य सरकार ने रबर फैक्टरी शुरू करने के लिए उसके प्रबंधन को सशर्त 1380.23 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई थी। अनुबंध में तय हुआ था कि उद्योग बंद होेने के बाद यह जमीन फिर सरकार के स्वामित्व में वापस हो जाएगी। हालांकि फैक्टरी बंद होने के 21 साल बाद भी अफसरशाही की लापरवाही की वजह से ऐसा नहीं हो सका। पिछले दिनों नापजोख में मौके पर 1232.79 एकड़ जमीन पाई गई। बताते हैं कि फैक्टरी जमीन पर तमाम कब्जे भी हैं। इसमें पुलिस महकमा भी शामिल है। श्रम विभाग की ओर से आरसी जारी होने के साथ अब फैक्टरी की जमीन और संपत्ति पर कब्जा लेने के लिए कानूनी राय भी ली जा रही है। जानकारों के मुताबिक सरकार सप्ताह भर के नोटिस पर पूरे फैक्टरी परिसर पर कब्जा ले सकती है। इस पहलू पर भी विचार किया जा रहा है। इसके साथ बॉम्बे हाईकोर्ट में पक्षकार बनकर पुराने आदेश को निरस्त कराने के लिए तमाम विधिक प्रमाण जुटाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि अगर कोई नई अड़चन सामने नहीं आई तो बहुत जल्द सरकारी तंत्र रबर फैक्टरी की संपत्ति पर विधिक तौर पर काबिज हो सकती है।

बॉम्बे हाईकोर्ट में प्रभावी पैरवी करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता को नामित किया गया है। अभिलेख भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अभी शीतकालीन अवकाश होने की वजह से हाईकोर्ट बंद है। हाईकोर्ट खुलते ही प्रशासन और शासन मजबूत पक्ष रखकर फैक्टरी की जमीन पर पुनर्वप्रवेश प्रक्रिया पूरी कर कब्जा लेगा। - नितीश कुमार, डीएम

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