{"_id":"5a39789d4f1c1bd1408bde92","slug":"yogi-ji-do-not-surround-the-landmafia-save-the-system","type":"story","status":"publish","title_hn":"योगी जी! भूमाफिया को घेर नहीं, बचा रहा है सिस्टम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
योगी जी! भूमाफिया को घेर नहीं, बचा रहा है सिस्टम
बरेली।
Updated Wed, 20 Dec 2017 02:07 AM IST
विज्ञापन
नहर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
प्रदेश में योगी आदित्य नाथ की सरकार बने साल भर होने को है। पहले ही दिन से सीएम भूमाफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का दावा कर रहे हैं। पुलिस-प्रशासन भी तभी से एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स बनाकर कागजों पर घौड़े दौड़ा रहा है, लेकिन धरातल पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हो पाया है। शहर में दो नदियों के किनारे और तीन नहरों को अफसरों से साठगांठ करके कब्जा बड़े कॉलोनाइजरों ने अरबों रुपये में बेच दिया। अधिकारी भूमाफिया को तलाशने की बात कर रहे हैं, जबकि शहर का बच्चा-बच्चा जानता है कि किसने नदियों और नहरोें पर कब्जा करके कॉलोनियां बनाई हैं। यह कॉलोनियां किस कॉलोनाइजर की हैं, यह भी सबको मालूम है। इसके बाद भी प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए सर्वे की औपचारिकता निभा रहा है।
मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद आठ दिसंबर को मुख्य सचिव राजीव कुमार ने जिले से टॉप-10 भूमाफिया की सूची मांगी। तब भूमाफिया को लेकर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी हरकत में आए, लेकिन तहसीलों से आई भूमाफिया की सूची में फिर खेल हो गया। आंवला से तीन सगे भाइयों को भूमाफिया की सूची में डाल दिया गया। हैरानी इस बात की है कि शासन को भेजी गई सूची में शहर के किसी भूमाफिया का नाम ही शामिल नहीं है। सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाला हर व्यक्ति भूमाफिया बनाया जा सकता है, लेकिन जब टॉप-10 की बात हो रही थी तो गांव-देहात में सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के नाम भेजने की क्या तुक है। सिंचाई विभाग ने ही नदी और नहरों पर कब्जा करने वाले 25 लोगों को चिह्नित कर रखा है। इनमें नहरों पर कब्जा कर शहर में कई बड़ी कॉलोनियां बनाने वाले कॉलोनाइजरों के नाम शामिल हैं। कुछ कॉलोनियां ऐसी हैं जिनमें नहर या नदी के कुछ हिस्से पर कब्जा किया गया है। हालांकि इन कॉलोनियों में भी नदी और नहरों की जमीन पर बने मकानों की संख्या सैकड़ों में है। इनमें से कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमे भी चल रहे हैं। कई बारात घरों का भी नहरों की जमीन पर कब्जा चिन्हित किया जा चुका है। मगर हैरत की बात यह है कि इसके बाद भी पुलिस और प्रशासन को भूमाफिया की तलाश है।
नहर-एक
100 फुटा से बैरियर टू तक सैकड़ोें मकान बना लिए
सौ फुटा रोड से बैरियर टू पुलिस चौकी की तरफ जाने वाली नहर को नगर निगम ने ही नाला बना दिया। अब सौ फुटा से वीरसावरकर नगर की तरफ जाने वाली सड़क पर नहर के किनारे मकान बन गए हैं। रिठौरा से चुनाव लड़ने के लिए सपा का टिकट मांगने वाले एक नेता जी के मकान के आगे बनी सड़क भी नहर की जमीन पर बनी है। यहां से यह नहर कुसुमनगर होकर मुंशीनगर की तरफ जाती है। मुंशीनगर में नहर पर कब्जा होने के बाद नगर निगम ने इसे नाली बनाकर साइड से रोड बना दिया है। यहां इस नहर से डेलापीर से एयरपोर्ट की तरफ जाने वाली सड़क से जैसे ही आप आकांक्षा एन्कलेव की तरफ जाएंगे तो नहर नाले के रूप में ही मिलेगी। इस नहर का काफी हिस्सा कॉलोनाइजरों ने पाटकर बेच दिया है। आगे चौराहे पर आते ही सामने नहर को स्लेब बनाकर पाट लिया गया है। इसके आगे बैरियर टू की तरफ जाने पर नहर पर किनारे कई मकान बने हैं। गुरुकुल कोचिंग के आगे नहर को पाटकर प्लाट बना लिया गया है। इसके आगे नहर को दबाकर मकान बना लिए गए हैं।
विज्ञापन
नहर-दो
मकान बनाकर बंद कर दी नहर
एक नहर बड़ी विहार होकर फीनिक्स मॉल की तरफ नहर निकलती थी, लेकिन अब इस नहर पर लगभग कब्जा हो चुका है। यहां के रहने वाले शिवलाल के मकान के पास एक कॉलोनाइजर ने दीवार बनाकर नहर को बंद कर दिया है। शिवलाल के बराबर से ही एक चकरोड निकलता था, उसे भी कॉलोनाइजर ने मकान बनाकर बंद कर दिया है। शिवलाल के अलावा केसरी, जानकी प्रसाद, नत्थू लाल, खेमकरन के मकान भी नहर के किनारे बने हैं। ग्राम समाज की कुछ जमीन भी कॉलोनी के अंदर बताई जा रही है। इसी इलाके में रहने वाली एक महिला अधिवक्ता ने बताया कि हमने रास्ता बंद करने का विरोध किया तो कॉलोनाइजर ने गुंडे भेजकर धमकी दिला दी। बड़ी विहार से निकलने के बाद नहर की जमीन में ही बिजली अफसरों ने ट्रांसफार्मर लगा दिया है। इसके आगे नहर का कुछ हिस्सा अभी भी दिखाई दे रहा है।
नहर-तीन
बीसलपुर रोड के पास से होकर गुजरने वाली नहर की भी चौड़ाई 18 मीटर थी। कुछ बारातघरों के अलावा एक ढाबा, अस्पताल और कुछ और निर्माणों को इस नहर पर अवैध कब्जे के रूप में चिन्हित किया जा चुका है। एक होटल के मालिक ने भी नहर पर अपना किचन बना लिया है। इस नहर के कुछ हिस्से को रुहेलखंड विश्वविद्यालय में भी दबा हुआ है। नहर का ज्यादातर हिस्सा तो एक कॉलोनी में दब गया है। बाकी लॉन, होटल और अस्पताल के अवैध कब्जे है।
नदियों से भी कब्जे नहीं हटे
नकटिया नदी
शहर के पूरब में नकटिया नदी पर कब्जे ही कब्जे हैं। रिठौरा से ही इस नदी पर कब्जे शुरू हो जाते हैं। डोहरा रोड, एक कॉलोनी के पीछे, हरूनगला-बीसलपुर रोड से लेकर कैंट और ठिरिया निजावत खां तक अनगिनत कब्जे हैं, लेकिन प्रशासन ने उन्हें हटाने या रोकने को कभी ठोस कदम नहीं उठाए।
किला नदी
किला नदी पर सैदपुर हॉकिंस, नर्सरी रोड, क र्मचारी नगर, मिनी बाईपास बाकरगंज, स्वालेनगर समेत तमाम स्थानों पर कब्जे हैं। कॉलोनाइजर ने बेखौफ होकर इस नदी पर अपना पुल बना दिया, लेकिन प्रशासन ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। कॉलोनाइजर नदी पार सरकारी जमीन पर कब्जा करके प्लाटिंग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद आठ दिसंबर को मुख्य सचिव राजीव कुमार ने जिले से टॉप-10 भूमाफिया की सूची मांगी। तब भूमाफिया को लेकर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी हरकत में आए, लेकिन तहसीलों से आई भूमाफिया की सूची में फिर खेल हो गया। आंवला से तीन सगे भाइयों को भूमाफिया की सूची में डाल दिया गया। हैरानी इस बात की है कि शासन को भेजी गई सूची में शहर के किसी भूमाफिया का नाम ही शामिल नहीं है। सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाला हर व्यक्ति भूमाफिया बनाया जा सकता है, लेकिन जब टॉप-10 की बात हो रही थी तो गांव-देहात में सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के नाम भेजने की क्या तुक है। सिंचाई विभाग ने ही नदी और नहरों पर कब्जा करने वाले 25 लोगों को चिह्नित कर रखा है। इनमें नहरों पर कब्जा कर शहर में कई बड़ी कॉलोनियां बनाने वाले कॉलोनाइजरों के नाम शामिल हैं। कुछ कॉलोनियां ऐसी हैं जिनमें नहर या नदी के कुछ हिस्से पर कब्जा किया गया है। हालांकि इन कॉलोनियों में भी नदी और नहरों की जमीन पर बने मकानों की संख्या सैकड़ों में है। इनमें से कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमे भी चल रहे हैं। कई बारात घरों का भी नहरों की जमीन पर कब्जा चिन्हित किया जा चुका है। मगर हैरत की बात यह है कि इसके बाद भी पुलिस और प्रशासन को भूमाफिया की तलाश है।
विज्ञापन
नहर-एक
100 फुटा से बैरियर टू तक सैकड़ोें मकान बना लिए
सौ फुटा रोड से बैरियर टू पुलिस चौकी की तरफ जाने वाली नहर को नगर निगम ने ही नाला बना दिया। अब सौ फुटा से वीरसावरकर नगर की तरफ जाने वाली सड़क पर नहर के किनारे मकान बन गए हैं। रिठौरा से चुनाव लड़ने के लिए सपा का टिकट मांगने वाले एक नेता जी के मकान के आगे बनी सड़क भी नहर की जमीन पर बनी है। यहां से यह नहर कुसुमनगर होकर मुंशीनगर की तरफ जाती है। मुंशीनगर में नहर पर कब्जा होने के बाद नगर निगम ने इसे नाली बनाकर साइड से रोड बना दिया है। यहां इस नहर से डेलापीर से एयरपोर्ट की तरफ जाने वाली सड़क से जैसे ही आप आकांक्षा एन्कलेव की तरफ जाएंगे तो नहर नाले के रूप में ही मिलेगी। इस नहर का काफी हिस्सा कॉलोनाइजरों ने पाटकर बेच दिया है। आगे चौराहे पर आते ही सामने नहर को स्लेब बनाकर पाट लिया गया है। इसके आगे बैरियर टू की तरफ जाने पर नहर पर किनारे कई मकान बने हैं। गुरुकुल कोचिंग के आगे नहर को पाटकर प्लाट बना लिया गया है। इसके आगे नहर को दबाकर मकान बना लिए गए हैं।
विज्ञापन
नहर-दो
मकान बनाकर बंद कर दी नहर
एक नहर बड़ी विहार होकर फीनिक्स मॉल की तरफ नहर निकलती थी, लेकिन अब इस नहर पर लगभग कब्जा हो चुका है। यहां के रहने वाले शिवलाल के मकान के पास एक कॉलोनाइजर ने दीवार बनाकर नहर को बंद कर दिया है। शिवलाल के बराबर से ही एक चकरोड निकलता था, उसे भी कॉलोनाइजर ने मकान बनाकर बंद कर दिया है। शिवलाल के अलावा केसरी, जानकी प्रसाद, नत्थू लाल, खेमकरन के मकान भी नहर के किनारे बने हैं। ग्राम समाज की कुछ जमीन भी कॉलोनी के अंदर बताई जा रही है। इसी इलाके में रहने वाली एक महिला अधिवक्ता ने बताया कि हमने रास्ता बंद करने का विरोध किया तो कॉलोनाइजर ने गुंडे भेजकर धमकी दिला दी। बड़ी विहार से निकलने के बाद नहर की जमीन में ही बिजली अफसरों ने ट्रांसफार्मर लगा दिया है। इसके आगे नहर का कुछ हिस्सा अभी भी दिखाई दे रहा है।
नहर-तीन
बीसलपुर रोड के पास से होकर गुजरने वाली नहर की भी चौड़ाई 18 मीटर थी। कुछ बारातघरों के अलावा एक ढाबा, अस्पताल और कुछ और निर्माणों को इस नहर पर अवैध कब्जे के रूप में चिन्हित किया जा चुका है। एक होटल के मालिक ने भी नहर पर अपना किचन बना लिया है। इस नहर के कुछ हिस्से को रुहेलखंड विश्वविद्यालय में भी दबा हुआ है। नहर का ज्यादातर हिस्सा तो एक कॉलोनी में दब गया है। बाकी लॉन, होटल और अस्पताल के अवैध कब्जे है।
नदियों से भी कब्जे नहीं हटे
नकटिया नदी
शहर के पूरब में नकटिया नदी पर कब्जे ही कब्जे हैं। रिठौरा से ही इस नदी पर कब्जे शुरू हो जाते हैं। डोहरा रोड, एक कॉलोनी के पीछे, हरूनगला-बीसलपुर रोड से लेकर कैंट और ठिरिया निजावत खां तक अनगिनत कब्जे हैं, लेकिन प्रशासन ने उन्हें हटाने या रोकने को कभी ठोस कदम नहीं उठाए।
किला नदी
किला नदी पर सैदपुर हॉकिंस, नर्सरी रोड, क र्मचारी नगर, मिनी बाईपास बाकरगंज, स्वालेनगर समेत तमाम स्थानों पर कब्जे हैं। कॉलोनाइजर ने बेखौफ होकर इस नदी पर अपना पुल बना दिया, लेकिन प्रशासन ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। कॉलोनाइजर नदी पार सरकारी जमीन पर कब्जा करके प्लाटिंग कर रहे हैं।