World Bicycle Day 2023: दिलोदिमाग बनेगा मजबूत, सेहत रहेगी दुरुस्त; रोज साइकिल चलाने के हैं जबरदस्त फायदे
कोरोना काल के बाद साइकिल खरीदने वालों की संख्या बढ़ी है। इसके अलावा साइकिल पर्यावरण संरक्षण में भी काफी मददगार साबित हो रही है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बरेली के बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए साइकिल सेहत की सवारी बन गई है। कोरोना काल के बाद साइकिल खरीदने वालों की संख्या बढ़ी है। इसके अलावा साइकिल पर्यावरण संरक्षण में भी काफी मददगार साबित हो रही है। इस कारण साइकिल बाजार में रौनक लौट रही है। बीते दो साल में करीब 30 फीसदी तक बाजार बढ़ने का अनुमान है।
कारोबारियों के मुताबिक साल 2018 से 2020 तक कुतुबखाना, घंटाघर रोड, इस्लामिया मार्केट, चौकी चौराहा, सिविल लाइंस, नकटिया, राजेंद्रनगर, इज्जतनगर आदि इलाकों में करीब 12 से ज्यादा साइकिल की दुकानों पर ताला लगा था। साल 2020 में कोरोना महामारी हावी होने के बाद लोगों में सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ी।
साइकिल चलाते खिलाड़ी
इम्युनिटी बढ़ाने और खुद को फिट रखने के लिए साइकिल चलाने की चाहत कारोबार में उछाल की वजह बना। लिहाजा, जितनी दुकानें बंद हुई उसी अनुपात में दुकानें खुलीं। पॉश इलाकों के आसपास भी बिक्री बढ़ी। इसमें स्टेडियम रोड, डेलापीर, पीलीभीत बाईपास, मिनी बाईपास, बदायूं रोड का इलाका शामिल है।
हर आयुवर्ग के लोगों को लुभा रही साइकिल
स्टेडियम रोड के साइकिल कारोबारी रविंदर सिंह के मुताबिक 2020 से पहले साइकिल की मांग में दर्ज हो रही गिरावट के सुधरने के आसार बेहद कम लग रहे थे। कोरोना महामारी के बाद बड़ा बदलाव आया है। बच्चे, युवा, उम्रदराज और बुजुर्गों का रुझान साइकिल के प्रति बढ़ा। साल 2021 में साइकिल बाजार पर कई सालों से मंडरा रही मंदी टूटी। गिरावट पर अंकुश लगने के साथ ही नुकसान की भरपाई होने लगी।सालाना 60 करोड़ का कारोबार हो रहा
साइकिल इंडस्ट्री चार श्रेणी स्टैंडर्ड, प्रीमियम, किड्स और एक्सपोर्ट बाइक्स में है। इसमें एमटीवी यानी प्रीमियम की रेंज लोगों को लुभा रही है। इनकी कीमत 15 हजार से शुरू है। रेस बाइक्स की कीमत 50 हजार से शुरू होकर लाखों में है। जिन्हें डिमांड के आधार पर ही मंगाया जाता है। औसतन छह हजार रुपये प्रति साइकिल की दर से प्रतिमाह पांच करोड़ और सालाना 60 करोड़ का कारोबार हो रहा है।
साइकिल स्टोरी पर साइकिल देखते ग्राहक
एसेंबल और हेवी वेट साइकिल की मांग घटी
कारोबारी अर्चित सेठी के मुताबिक गियर वाली साइकिल की मांग बरकरार है। हालांकि, एसेंबल और हेवी वेट की जिनकी मांग खूब थी वह तेजी से कम हुई है, क्योंकि इसमें संतुलन के अभाव की शिकायत रहती है। डॉक्टर, सरकारी नौकरी करने वाले, उद्यमी, व्यापारी जो नियमित जिम जाने से बच रहे थे, वे साइकिल चलाते हैं।साइकिल चलाने के फायदे
- 30 मिनट की साइकिलिंग से बर्न होती है 300 कैलोरी।
- अंगों की सक्रियता, शारीरिक गतिविधि में सुधार।
- पर्यावरण संरक्षण समेत ईंधन के बजट की बचत।
- साइकिलिंग से बढ़ती है दर्द सहने करने की क्षमता।
- शारीरिक संतुलन और दिमाग होता है मजबूत।
- घटती है शुगर, बीपी, हृदय रोग की आशंका।
- साइकिलिंग की मुद्रा, चक्रीय गति से पीठ दर्द से निजात।
- रक्तप्रवाह बढ़ता है, ऑक्सीजन सैचुरेशन सुधरता है।
एसएसपी रोज दस किमी चलाते हैं साइकिल
एसएसपी प्रभाकर चौधरी रोज करीब दस किमी दौड़ लगाने के साथ ही साइकिल की सवारी भी करते हैं। उनके पास पांच साइकिल हैं, जिनमें से कोई गियर वाली नहीं है। वह साइकिल चलाने को घुटनों के लिए बेहद कारगर बताते हैं। कहते हैं कि दौड़ लगाने वालों को घुटने सलामत रखने के लिए साइकिल जरूर चलानी चाहिए।आंबेडकर नगर के किसान परिवार के बेटे प्रभाकर चौधरी बताते हैं कि गांव में भी साइकिल के अलावा कोई दोपहिया वाहन नहीं है। बारहवीं कक्षा तक वह तीस किमी साइकिल चलाकर विद्यालय आते-जाते थे, इसलिए आज भी साइकिल से प्रेम बरकरार है। इसे चलाने से शुगर जैसी समस्या नहीं होती, बल्कि हृदय संबंधी रोगों से बचाव रहता है। एसएसपी युवाओं को साइकिल चलाने का संदेश देते हैं।