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बरेली जंक्शन से बाहर निकलते ही गायब हो गई गुजरात से लौटे मजदूरों की खुशी
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गुजरात से बरेली जंक्शन पर नंगे पांव लौटे लोग।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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यूपी भर के 1096 मजदूर ट्रेन से उतरे फिर घंटों बसों की तलाश में भटके
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थक-हारकर भीड़ की शक्ल में हुए इकट्ठे, सामाजिक दूरी की व्यवस्था तार-तार
बरेली। लॉकडाउन लागू होने के बाद गुजरात में फंसे 1096 मजदूर स्पेशल ट्रेन में लंबा सफर तय कर बुधवार शाम यहां जंक्शन पर उतरे तो उनके चेहरों पर थकान के बजाय सुकून और खुशी दिखाई दी। हालांकि यह सुकून कुछ ही देर कायम रह पाया। जंक्शन के बाहर निकलकर उन्हें अपने घर लौटने के लिए बसों की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ा तो सारी खुशी काफूर हो गई। प्रशासनिक बदइंतजामी इस कदर हावी दिखाई दी कि सामाजिक दूरी की व्यवस्था भी तार-तार हो गई।
साबरमती स्टेशन से चली स्पेशल ट्रेन में इलाहाबाद और देवरिया जैसे कई दूरस्थ जिलों के भी मजदूर थे जिन्हें यहां से रोडवेज बसों में बैठाकर घरों को रवाना किया जाना था। इसके लिए पुलिस के साथ प्रशासन और रोडवेज अफसरों का पूरा अमला यहां लगा हुआ था लेकिन फिर भी बदइंतजामी शुरू हुई तो संभाले नहीं संभली। रेलवे के साथ पुलिस-प्रशासन के सहयोग से ट्रेन से उतरते ही सभी मजदूर परिवारों की स्वास्थ्य विभाग की टीम को थर्मल स्क्रीनिंग करनी थी और इसके बाद बाहर रोडवेज बसों में क्रमानुसार बैठाना था। मजदूर अपने परिवारों के साथ जैसे ही स्टेशन से निकले, अपने जिले की तरफ जाने वाली बसों की तलाश जुट गए। उन्हें सहजता से बस तक पहुंचाने का इंतजाम नहीं था लिहाजा काफी देर तक वे छोटे-छोटे बच्चों और महिलाओं के साथ इधर-उधर भटकते रहे।
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अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच भी तालमेल टूटा नजर आया। नतीजा यह हुआ कि मजदूरों के परिवार भीड़ की शक्ल में इकट्ठे हो गए और सामाजिक दूरी व्यवस्था बुरी तरह लड़खड़ा गई। ज्यादातर मजदूर बसें नहीं मिलीं तो परिवारों के साथ एक जगह बैठ गए। बाद में सरकारी कर्मचारियों ने आगे आकर उन्हें बसों में बैठाना शुरू किया। कुछ बसों को रवाना होने में काफी देर लग गई। अधिकारियों ने बताया कि शाम साढ़े छह बजे तक सभी बसों को यहां से रवाना कर दिया गया।
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थक-हारकर भीड़ की शक्ल में हुए इकट्ठे, सामाजिक दूरी की व्यवस्था तार-तार बरेली। लॉकडाउन लागू होने के बाद गुजरात में फंसे 1096 मजदूर स्पेशल ट्रेन में लंबा सफर तय कर बुधवार शाम यहां जंक्शन पर उतरे तो उनके चेहरों पर थकान के बजाय सुकून और खुशी दिखाई दी। हालांकि यह सुकून कुछ ही देर कायम रह पाया। जंक्शन के बाहर निकलकर उन्हें अपने घर लौटने के लिए बसों की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ा तो सारी खुशी काफूर हो गई। प्रशासनिक बदइंतजामी इस कदर हावी दिखाई दी कि सामाजिक दूरी की व्यवस्था भी तार-तार हो गई।
साबरमती स्टेशन से चली स्पेशल ट्रेन में इलाहाबाद और देवरिया जैसे कई दूरस्थ जिलों के भी मजदूर थे जिन्हें यहां से रोडवेज बसों में बैठाकर घरों को रवाना किया जाना था। इसके लिए पुलिस के साथ प्रशासन और रोडवेज अफसरों का पूरा अमला यहां लगा हुआ था लेकिन फिर भी बदइंतजामी शुरू हुई तो संभाले नहीं संभली। रेलवे के साथ पुलिस-प्रशासन के सहयोग से ट्रेन से उतरते ही सभी मजदूर परिवारों की स्वास्थ्य विभाग की टीम को थर्मल स्क्रीनिंग करनी थी और इसके बाद बाहर रोडवेज बसों में क्रमानुसार बैठाना था। मजदूर अपने परिवारों के साथ जैसे ही स्टेशन से निकले, अपने जिले की तरफ जाने वाली बसों की तलाश जुट गए। उन्हें सहजता से बस तक पहुंचाने का इंतजाम नहीं था लिहाजा काफी देर तक वे छोटे-छोटे बच्चों और महिलाओं के साथ इधर-उधर भटकते रहे।
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अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच भी तालमेल टूटा नजर आया। नतीजा यह हुआ कि मजदूरों के परिवार भीड़ की शक्ल में इकट्ठे हो गए और सामाजिक दूरी व्यवस्था बुरी तरह लड़खड़ा गई। ज्यादातर मजदूर बसें नहीं मिलीं तो परिवारों के साथ एक जगह बैठ गए। बाद में सरकारी कर्मचारियों ने आगे आकर उन्हें बसों में बैठाना शुरू किया। कुछ बसों को रवाना होने में काफी देर लग गई। अधिकारियों ने बताया कि शाम साढ़े छह बजे तक सभी बसों को यहां से रवाना कर दिया गया।