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हजारों कोरोना सैंपल जूतों से कुचलने की आज शासन को भेजेंगे जांच रिपोर्ट
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300 बेड हॉस्पिटल।
स्वास्थ्य विभाग में सन्नाटा... दो दिन में तय होगा कौन बचेगा और कौन नपेगा
जांच रिपोर्ट में कार्रवाई की संस्तुति भी करेगा जिला प्रशासन, तमाम सवालों में घिरे नीचे से ऊपर तक के विभागीय अफसर
दस हजार से ज्यादा सैंपल बर्बाद करने पर भी एडीएम ने सीएमओ से ली रिपोर्ट
बरेली। तीन सौ बेड कोविड अस्पताल में कोरोना के दस हजार से ज्यादा सैंपल को डंप कर बगैर जांच कराए बर्बाद कर देने और फिर जूतों से कुचलकर फेंक देने के मामले में शासन के आदेश पर शुरू हुई जांच में बृहस्पतिवार को अफसरों और कर्मचारियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी हो गई। सूत्रों के मुताबिक जांच की तलवार कई उच्चाधिकारियों पर लटक है। जिला प्रशासन शुक्रवार को इस मामले में दोषी अफसरों पर कार्रवाई की संस्तुति के साथ अपनी रिपोर्ट शासन को भेज देगा।
बताया जा रहा है कि शासन को जांच रिपोर्ट भेजे जाने के बाद अगले दो दिन में तय हो जाएगा कि कोरोना सैंपल बर्बाद करने और जूतों से कुचलकर फेंक देने के आरोपों में घिरे अफसरों में से कौन बचेगा और किस पर कार्रवाई होगी। यह भी दावा किया जा रहा है कि इस मामले में शासन कड़ी कार्रवाई करने के मूड में है क्योंकि इस प्रकरण से कोरोना के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इस वजह से भी इस प्रकरण को गंभीर माना जा रहा है कि कई दिन सुर्खियों में रहने के बावजूद विभागीय उच्चाधिकारियों ने इस प्रकरण में गंभीरता से कार्रवाई नहीं की बल्कि प्रभार इधर-उधर कर मामला रफा-दफा कर दिया।
शासन के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने जांच शुरू कराई है। एडीएम सिटी ने बुुधवार को जांच की शुरुआत के बाद बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग के लगभग सभी अधिकारियों के साथ उन चिकित्सकों और कर्मचारियों के भी बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जिनकी भूमिका इस मामले में संदिग्ध मानी जा रही है। इसके साथ 17 और 26 नवंबर को बड़ी तादाद में थर्माकोल कन्टेनरों में रखे मिले सैंपलों के बारे में छानबीन की।
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एडीएम ने इस पूरे प्रकरण की रिपोर्ट सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह से भी मांगी थी जो उन्होंने बृहस्पतिवार को उन्हें सौंप दी। बताया जा रहा है कि इस रिपोर्ट में कोविड अस्पताल में किस तारीख के कितने सैंपल बरबाद हुए, सैंपल कहां से किस टीम ने लिए थे जैसे सवालों का ब्योरा है। रिपोर्ट के साथ पूरे घटनाक्रम की वीडियो और फोटो भी एडीएम को दिए गए हैं। एडीएम सिटी आरडी पांडेय ने बताया कि शासन ने जांच पूरी करने के लिए 48 घंटे का समय दिया था। शुक्रवार को रिपोर्ट उच्चाधिकारी के जरिए शासन को भेज दी जाएगी।
फंसाने वाला सवाल... दस हजार सैंपल बर्बाद होने के बाद क्या कार्रवाई की
बताया जा रहा है कि जांच प्रक्रिया में अफसरों को फंसाने वाला सबसे गंभीर सवाल यह है कि 17 और 26 नवंबर को दस हजार से ज्यादा कोरोना के सैंपल बगैर जांच कराए बर्बाद कर दिए जाने का मामला जानकारी में आने के बाद अफसरों ने क्या कार्रवाई की। स्वास्थ्य विभाग के ज्यादातर उच्चाधिकारियों को यह सवाल फंसा रहा है। दरअसल यह प्रकरण सामने आने के बाद अफसरों ने कार्रवाई के लिए कोई प्रक्रिया ही नहीं अपनाई। मामले को बेहद हल्के ढंग से सिर्फ कोविड अस्पताल के स्टाफ को इधर-उधर कर निपटा दिया। पूर्व सीएमएस को हटाकर जिन्हें नया सीएमएस बनाया गया, उन्होंने कोरोना सैंपलों को जूतों से कुचलकर और भी बड़ा विवाद खड़ा कर दिया।
एडी हेल्थ के नोटिस का 20 दिन बाद भी जवाब नहीं दिया सीएमओ ने
एडी हेल्थ डॉ. सुधीर गर्ग ने 26 नवंबर को कोविड अस्पताल का निरीक्षण किया था, इसी दौरान उन्हें एक स्टोर रूम में बड़े पैमाने पर कोरोना के सैंपल डंप मिले थे। इसके बाद उन्होंने सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह से इस पर स्पष्टीकरण मांगा था लेकिन सीएमओ ने उन्हें अब तक कोई जवाब नहीं किया। एडी हेल्थ ने भी उन्हें इसके बाद कोई रिमाइंडर जारी नहीं किया। मामला शासन तक पहुंचने के बाद अब उनकी ओर से जरूर विभागीय स्तर पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने का दावा किया जा रहा है। इस कमेटी में पीलीभीत और बदायूं के सीएमएस के साथ जेडी हेल्थ को भी नामित किया गया है। हालांकि अब सवाल उठ रहा है कि कनिष्ठ स्तर के अधिकारी कैसे वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच कर रिपोर्ट देंगे। एडी हेल्थ ने कोविड अस्पताल के सीएमएस रहे डॉ. चंद्रा के इस आरोप को भी गलत बताया है जिसमें सैंपल जूतों से कुचलने के दौरान उनके मौजूद होने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि जांच में सारा सच सामने आ जाएगा।
फर्जी टीकाकरण सर्टिफिकेट मामले में भी अफसरों की बेपरवाही नहीं टूटी
फरीदपुर में कोरोना के टीकाकरण के बगैर ही तीन-तीन सौ रुपये में फर्जी सर्टिफिकेट जारी करने के मामले को भी स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों ने रफादफा कर दिया। यह तक पता लगाने की कोशिश नहीं की गई कि वायरल ऑडियो में तीन सौ रुपये में टीकाकरण का सर्टिफिकेट बनाने की बात कर रहा विभागीय कर्मचारी कौन था। गंभीर बात यह है कि संदिग्ध कर्मचारी अब भी टीकाकरण टीम का हिस्सा है लिहाजा आशंका जताई जा रही है कि अब कोविड टीकाकरण के फर्जी सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे है। यह सवाल भी उठ रहा है कि बिना टीका लगाए सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं तो उन वैक्सीन का क्या किया गया जिनकी इसमें खपत दिखाई गई है। गंभीर सवाल यह भी है कि फर्जी सर्टिफिकेट लेने वाला शख्स यदि कोरोना की चपेट में आया तो इससे वैक्सीन की गुणवत्ता भी संदिग्ध मानी जाएगी और समाज में गलत संदेश जाएगा।
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जांच रिपोर्ट में कार्रवाई की संस्तुति भी करेगा जिला प्रशासन, तमाम सवालों में घिरे नीचे से ऊपर तक के विभागीय अफसर
दस हजार से ज्यादा सैंपल बर्बाद करने पर भी एडीएम ने सीएमओ से ली रिपोर्ट
बरेली। तीन सौ बेड कोविड अस्पताल में कोरोना के दस हजार से ज्यादा सैंपल को डंप कर बगैर जांच कराए बर्बाद कर देने और फिर जूतों से कुचलकर फेंक देने के मामले में शासन के आदेश पर शुरू हुई जांच में बृहस्पतिवार को अफसरों और कर्मचारियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी हो गई। सूत्रों के मुताबिक जांच की तलवार कई उच्चाधिकारियों पर लटक है। जिला प्रशासन शुक्रवार को इस मामले में दोषी अफसरों पर कार्रवाई की संस्तुति के साथ अपनी रिपोर्ट शासन को भेज देगा।
बताया जा रहा है कि शासन को जांच रिपोर्ट भेजे जाने के बाद अगले दो दिन में तय हो जाएगा कि कोरोना सैंपल बर्बाद करने और जूतों से कुचलकर फेंक देने के आरोपों में घिरे अफसरों में से कौन बचेगा और किस पर कार्रवाई होगी। यह भी दावा किया जा रहा है कि इस मामले में शासन कड़ी कार्रवाई करने के मूड में है क्योंकि इस प्रकरण से कोरोना के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इस वजह से भी इस प्रकरण को गंभीर माना जा रहा है कि कई दिन सुर्खियों में रहने के बावजूद विभागीय उच्चाधिकारियों ने इस प्रकरण में गंभीरता से कार्रवाई नहीं की बल्कि प्रभार इधर-उधर कर मामला रफा-दफा कर दिया।
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शासन के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने जांच शुरू कराई है। एडीएम सिटी ने बुुधवार को जांच की शुरुआत के बाद बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग के लगभग सभी अधिकारियों के साथ उन चिकित्सकों और कर्मचारियों के भी बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जिनकी भूमिका इस मामले में संदिग्ध मानी जा रही है। इसके साथ 17 और 26 नवंबर को बड़ी तादाद में थर्माकोल कन्टेनरों में रखे मिले सैंपलों के बारे में छानबीन की।
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एडीएम ने इस पूरे प्रकरण की रिपोर्ट सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह से भी मांगी थी जो उन्होंने बृहस्पतिवार को उन्हें सौंप दी। बताया जा रहा है कि इस रिपोर्ट में कोविड अस्पताल में किस तारीख के कितने सैंपल बरबाद हुए, सैंपल कहां से किस टीम ने लिए थे जैसे सवालों का ब्योरा है। रिपोर्ट के साथ पूरे घटनाक्रम की वीडियो और फोटो भी एडीएम को दिए गए हैं। एडीएम सिटी आरडी पांडेय ने बताया कि शासन ने जांच पूरी करने के लिए 48 घंटे का समय दिया था। शुक्रवार को रिपोर्ट उच्चाधिकारी के जरिए शासन को भेज दी जाएगी।
फंसाने वाला सवाल... दस हजार सैंपल बर्बाद होने के बाद क्या कार्रवाई की
बताया जा रहा है कि जांच प्रक्रिया में अफसरों को फंसाने वाला सबसे गंभीर सवाल यह है कि 17 और 26 नवंबर को दस हजार से ज्यादा कोरोना के सैंपल बगैर जांच कराए बर्बाद कर दिए जाने का मामला जानकारी में आने के बाद अफसरों ने क्या कार्रवाई की। स्वास्थ्य विभाग के ज्यादातर उच्चाधिकारियों को यह सवाल फंसा रहा है। दरअसल यह प्रकरण सामने आने के बाद अफसरों ने कार्रवाई के लिए कोई प्रक्रिया ही नहीं अपनाई। मामले को बेहद हल्के ढंग से सिर्फ कोविड अस्पताल के स्टाफ को इधर-उधर कर निपटा दिया। पूर्व सीएमएस को हटाकर जिन्हें नया सीएमएस बनाया गया, उन्होंने कोरोना सैंपलों को जूतों से कुचलकर और भी बड़ा विवाद खड़ा कर दिया।
एडी हेल्थ के नोटिस का 20 दिन बाद भी जवाब नहीं दिया सीएमओ ने
एडी हेल्थ डॉ. सुधीर गर्ग ने 26 नवंबर को कोविड अस्पताल का निरीक्षण किया था, इसी दौरान उन्हें एक स्टोर रूम में बड़े पैमाने पर कोरोना के सैंपल डंप मिले थे। इसके बाद उन्होंने सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह से इस पर स्पष्टीकरण मांगा था लेकिन सीएमओ ने उन्हें अब तक कोई जवाब नहीं किया। एडी हेल्थ ने भी उन्हें इसके बाद कोई रिमाइंडर जारी नहीं किया। मामला शासन तक पहुंचने के बाद अब उनकी ओर से जरूर विभागीय स्तर पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने का दावा किया जा रहा है। इस कमेटी में पीलीभीत और बदायूं के सीएमएस के साथ जेडी हेल्थ को भी नामित किया गया है। हालांकि अब सवाल उठ रहा है कि कनिष्ठ स्तर के अधिकारी कैसे वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच कर रिपोर्ट देंगे। एडी हेल्थ ने कोविड अस्पताल के सीएमएस रहे डॉ. चंद्रा के इस आरोप को भी गलत बताया है जिसमें सैंपल जूतों से कुचलने के दौरान उनके मौजूद होने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि जांच में सारा सच सामने आ जाएगा।
फर्जी टीकाकरण सर्टिफिकेट मामले में भी अफसरों की बेपरवाही नहीं टूटी
फरीदपुर में कोरोना के टीकाकरण के बगैर ही तीन-तीन सौ रुपये में फर्जी सर्टिफिकेट जारी करने के मामले को भी स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों ने रफादफा कर दिया। यह तक पता लगाने की कोशिश नहीं की गई कि वायरल ऑडियो में तीन सौ रुपये में टीकाकरण का सर्टिफिकेट बनाने की बात कर रहा विभागीय कर्मचारी कौन था। गंभीर बात यह है कि संदिग्ध कर्मचारी अब भी टीकाकरण टीम का हिस्सा है लिहाजा आशंका जताई जा रही है कि अब कोविड टीकाकरण के फर्जी सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे है। यह सवाल भी उठ रहा है कि बिना टीका लगाए सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं तो उन वैक्सीन का क्या किया गया जिनकी इसमें खपत दिखाई गई है। गंभीर सवाल यह भी है कि फर्जी सर्टिफिकेट लेने वाला शख्स यदि कोरोना की चपेट में आया तो इससे वैक्सीन की गुणवत्ता भी संदिग्ध मानी जाएगी और समाज में गलत संदेश जाएगा।