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कबाड़ घर को बना दिया वेटलिफ्टिंग हॉल खिलाड़ियों ने प्रैक्टिस ही छोड़ दी

Thu, 02 Nov 2017 01:42 AM IST
बरेली।
बरेली। Updated Thu, 02 Nov 2017 01:42 AM IST
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Weightlifting Hall made of junk house Players left the practice
वेट ‌िललिपऊफ्‌िटटिंग

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एशियाड और ओलंपिक में पदक जीतने का सपना संजोए वेटलिफ्टिंग के खिलाड़ी स्पोर्ट्स स्टेडियम आ तो रहे हैं लेकिन प्रैक्टिस के दौरान उनके चेहरों पर जो चमक होनी चाहिए, वह कहीं खोई हुई है। वेटलिफ्टिंग हॉल में प्रैक्टिस बंद कराकर उन्हें उस छोटे से कमरे में शिफ्ट कर दिया गया है जो कहने को तो स्टोर रूम है लेकिन स्टेडियम के कबाड़घर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। वेटलिफ्टिंग में 48 खिलाड़ी रजिस्टर्ड हैं। छोटे से कमरे में जब प्रैक्टिस करना मुमकिन नहीं रह गया तो इनमें से आधे से ज्यादा खिलाड़ियों ने स्टेडियम आना ही छोड़ दिया। 
डोरीलाल अग्रवाल स्पोर्ट्स स्टेडियम में ज्यादातर खेल दुर्दशा के शिकार हैं। रजिस्ट्रेशन के हिसाब से देखें तो यहां खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है, लेकिन संसाधन और कोच न होने की वजह से उनका जोश भी खत्म होता जा रहा है। वेटलिफ्टिंग पहले मल्टी परपज हॉल के पीछे बड़े कमरे में होती थी। यहां प्लेटफार्म बने हुए थे और रबड़ की मैट भी बिछी हुई थी। प्रैक्टिस करते समय वेटलिफ्टर वेट को उठाकर उसे ऊपर से आसानी से छोड़ लेते (सेल्फ ट्रिक) थे क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में ऐसे ही किया जाता है, लेकिन जब से वेटलिफ्टिंग के खिलाड़ियों को कबाड़घर में शिफ्ट किया गया, वहां उनके लिए इस ट्रिक का इस्तेमाल करना संभव नहीं रह गया है। खिलाड़ियों का कहना है कि कबाड़घर में बरसात के दौरान पानी टपकता है और पूरे उपकरण भीग जाते हैं। यहां न प्लेटफार्म बने हैं न रबड़ की मैट है। इसलिए खिलाड़ी सेल्फ ट्रिक नहीं सीखते क्योंकि उन्हें चोट लग सकती है। यही नहीं, यहां दो से ज्यादा खिलाड़ी एक साथ प्रैक्टिस भी नहीं कर सकते। लिहाजा अधिकतर खिलाड़ियों ने आना ही बंद कर दिया है। कुछ खिलाड़ी बाहर प्रैक्टिस करके काम चला लेते हैं।
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मैग्नेशियम कार्बोनेट पाउडर भी नहीं मिलता 
खिलाड़ियों ने बताया कि भार उठाने से पहले हाथों पर मैग्नेशियम कार्बोनेट पाउडर लगाया जाता है ताकि पसीना न आए। यह पाउडर पहले स्टेडियम में मिल जाता था लेकिन पिछले कई महीनों से इसे बंद कर दिया गया है। अब खिलाड़ी खुद अपने पैसे से पाउडर खरीद कर लाते हैं। स्टोर रूम का बल्ब खराब हो गया तो उसे भी खिलाड़ी लेकर आए। यहां फर्श भी टूटा पड़ा है। 
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प्रैक्टिस छोड़ने वाले ज्यादातर अच्छे वेटलिफ्टर 
साउथ एशियन और जूनियर कॉमनवेल्थ में भाग ले चुके खिलाड़ी नितिन सिंह रावत ने स्टोर रूम में उपकरण शिफ्ट होने के बाद स्टेडियम आना छोड़ दिया है। इसके अलावा नेशनल और स्टेट खेल चुके मुकेश, पवन, अरविंद, राम सेवक भी अब नहीं आते। रामसेवक ग्रीन पार्क में रहते हैं और काशीपुर में सीखते हैं। स्पेशल ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन करने वाले स्पेशल खिलाड़ी अर्पण शर्मा भी अब यहां नहीं आते।

उपकरण भी कर दिए नीलाम
स्पोर्ट्स स्टेडियम में वेटलिफ्टिंग के उपकरण भी नहीं हैं। इन उपकरणों की पहले से ही कमी थी। जो उपकरण थे भी, उनमें जंग लग चुकी थी। स्टेडियम के अधिकारियों ने नए उपकरण तो खरीदे नहीं, जो बचेखुचे और जंग खाए उपकरण थे, उन्हें भी कुछ महीने पहले नीलाम कर दिया। जाहिर है कि स्टेडियम में वेटलिफ्टिंग की प्रैक्टिस करना ही संभव नहीं रह गया है।



तीन महीनों से स्पोर्ट्स स्टेडियम में से प्रैक्टिस कर रहे हैं, लेकिन यहां उपकरण ही नहीं है। प्रैक्टिस बस दिल बहलाने तक रह गई है।- प्रशांत, महानगर
प्रैक्टिस के लिए प्लेटफार्म तक नहीं है। अब यहां इस छोटे कमरे में न तो कैचिंग कर सकते हैं और न ही सेल्फ ट्रिक। - नित्यांश, गणेशनगर 
डेढ़ साल पहले ही ज्वाइन किया है, यहां कम वजन की प्लेट ही नहीं है, इसलिए प्रैक्टिस भी नहीं हो पाती है।- हिमांशु, विष्णुधाम कालोनी 
अगर ज्यादा भार की मैं ही प्रैक्टिस कर लूं तो बाकी लोगाें को प्रैक्टिस के लिए वेट नहीं मिल पाता है।- दीपक भारद्वाज, प्रेमनगर 
स्टोर रूम में वेटलिफ्टिंग के उपकरण शिफ्ट कर दिए गए हैं जबकि कई उपकरण है ही नहीं। खिलाड़ियों ने आना छोड़ दिया है।- हरीशंकर, कोच 


मुझे समस्या सुनने को मिल रही है लेकिन मैं अब तक पॉवर में नहीं था। बुधवार दोपहर को ही चार्ज लिया है। एक सप्ताह का समय मुझे चाहिए सब कुछ ठीक करने में। इसके बाद आप जितने चाहे सवाल पूछें। - लक्ष्मी शंकर सिंह, प्रभारी आरएसओ 
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