Weather News: बरेली में बारिश ने उतार दी मई की गर्मी, नौतपा भी बेअसर; जानें तीन दिन कैसा रहेगा मौसम
UP Weather News: मई में बादल और बारिश की वजह से मौसम का मिजाज बदला रहा। इससे मई का औसत तापमान सामान्य से कम रहा। इस बार नौतपा के दिन भी कम तपे हैं।
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बरेली में बीते सप्ताह बादल और बारिश का दौर जारी रहा। इससे जहां मई का औसत तापमान सामान्य से कम रहा, वहीं नौतपा भी बेअसर साबित हो रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, करीब चार साल बाद मई में गर्मी से राहत मिली है। मई के शेष तीन दिनों में भी बारिश की संभावना जताई गई है।
वर्ष 2024 में मई की शुरुआत सामान्य से दो डिग्री अधिक 38.8 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ हुई थी। इस वर्ष एक मई को पारा सामान्य से सात डिग्री कम 32.4 डिग्री रहा। 27 मई को पिछले वर्ष अधिकतम तापमान 43 डिग्री के पार चला गया था। इस वर्ष 27 मई को पारा सामान्य से पांच डिग्री कम 35.2 डिग्री रहा। शुरुआती सप्ताह में पारा महज एक दिन 40 डिग्री पहुंचा था। वर्ष 2022, 2023, 2024 के सापेक्ष इस वर्ष मई में अब तक औसत अधिकतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री कम रहा।
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मौसम विभाग के अनुसार, वर्ष 2021 में 112 मिमी बारिश हुई थी। उससे पहले वर्ष 2016 में भी मई में अच्छी बारिश से गर्मी से निजात मिली थी। इस वर्ष भी मई में पांच दिन में 90 मिमी बारिश हो चुकी है। मौसम विभाग ने मई के शेष तीन दिनों में भी बारिश होने का अनुमान जताया है।
मौसम विशेषज्ञ अतुल कुमार के मुताबिक, उच्च वायुदाब का क्षेत्र बनने से मंगलवार को बारिश के लिए अनुकूल माहौल नहीं बन सका। तेज धूप निकलने से अधिकतम पारा दो डिग्री बढ़त के साथ 35.4 डिग्री, न्यूनतम चार डिग्री बढ़त के बाद 26.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। तीन दिन बादल मंडराएंगे। तेज हवा संग बारिश का अनुमान है।
बढ़ेगा बैक्टीरिया, मच्छरों का प्रकोप
बांस मंडी स्थित राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के अधीक्षक प्रो. डीके मौर्य के मुताबिक, नौतपा में तपिश से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। कई रोणाणु, जीवाणु, बैक्टीरिया, पैरासाइट्स स्वत: नष्ट हो जाते हैं। नौतपा बेअसर रहा तो अप्रत्यक्ष रूप से मानव स्वास्थ्य प्रभावित होगा। लार्वा नष्ट न होने से संचारी रोग और बैक्टीरियल इंफेक्शन बढ़ने की आशंका रहेगी।
ऋतु चक्र प्रभावित होने से सेहत के प्रति सचेत रहना होगा। प्रगतिशील किसान अनिल साहनी के मुताबिक, नौतपा की गर्मी से फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट व अन्य हानिकारक जीव नष्ट हो जाते हैं। इससे आगे अच्छी बारिश की संभावना रहती है। नौतपा के नहीं तपने से फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।