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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Vigilance was extracted 21.27 million of the reduction of stamp

विजिलेंस ने निकाली थी 21.27 लाख की स्टांप की कमी

Thu, 28 Jan 2016 02:10 AM IST
बरेली
बरेली Updated Thu, 28 Jan 2016 02:10 AM IST
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बरेली। त्रिशूल एयरबेस के आसपास बने अवैध मकान और कालोनियों में से एक कालोनी ने कम स्टांप लगाकर  21.27 लाख रुपयों की राज्य सरकार को क्षति पहुंचाई है। इस रकम को वसूलने के लिए अपर निदेशक (विजिलेंस) ने रिपोर्ट में सिफारिश भी की थी लेकिन इस सिफारिश को फाइलों में दबा दिया गया। इससे जुड़ी रिपोर्ट और फाइलें न तो रजिस्ट्री आफिस में हैं और न ही कलक्ट्रेट में।
यूपी विजिलेंस के अपर निदेशक रतीराम ने 10 नवंबर 2004 को ही प्रमुख सचिव विजिलेंस आलोक सिन्हा को अपनी ओर से एक और रिपोर्ट भेजी थी। जिसमें 21,27,031 रुपये की कम स्टांप का उल्लेख करते हुए इस राशि को वसूलने की सिफारिश की थी। रिपोर्ट में यह भी तर्क दिया गया था कि सदर तहसील के पीर बहोड़ा एवं परतापुर स्थित 68,066.65 वर्ग मीटर जमीन को भगवती सहकारी समिति के सदस्यों ने 25 मार्च 1992 और 29 सितंबर 1993 को 13 बैनामों में खरीदा था। जिसकी उन दिनों बाजारू कीमत 250 रुपये वर्गमीटर की दर से 1,70,16,500 रुपये थी। जिसमें मात्र 31 रुपये की दर से स्टांप पेपर लगाए गए। जबकि 12 प्रतिशत की दर से स्टांप शुल्क के 21,27,062 रुपये जमा कराए जाने चाहिए थे।
विजलेंस रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया है कि बैनामा में स्टांप शुुल्क में छूट का उल्लेख किया गया है लेकिन उस छूट को निरस्त करते हुए  हाईकोर्ट ने फाइनल आदेश जारी किए थे। इस तर्क के आधार पर यह रकम वसूली जानी थी लेकिन विजिलेंस रिपोर्ट को दबा दिया गया। रिपोर्ट के आधार पर क्या कार्रवाई की गई, यह ब्योरा कलक्ट्रेट और तहसील में नहीं है। अब 18 फीसदी ब्याज के साथ यह रकम करीब एक करोड़ रुपये बनती है।

‘यह मामला काफी पुराना है, विजिलेंस रिपोर्ट में क्या है और उसके बाद की क्या स्थितियां रहीं। इस बारे में रिपोर्ट का पता करके ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। विजिलेंस से उस रिपोर्ट की प्रति परीक्षण के लिए मांगी जाएगी। उसी के बाद ही अग्रिम निर्णय होगा।’ मनोज कुमार, प्रभारी डीएम


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अब भारत सरकार देगी एनओसी
बरेली। त्रिशूल एयरबेस हो या फिर देश के किसी भी शहर में सैन्य ठिकानों के आसपास प्रतिबंधित क्षेत्र। ऐसे स्थानों के निकट निर्माण करने से पहले भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होगा। इसके लिए अलग से रक्षा मंत्रालय ने अलग से सैल बना दिया है। जिसके बारे में भारत सरकार का गजट तो हो गया है लेकिन दिशा निर्देश (नियमावली) अभी जारी नहीं हुई है। अगले महीने में नए निर्देश जारी होने के संकेत मिले हैं।
केंद्र सरकार के उप सचिव की ओर से जारी गजट में उल्लेख किया है कि सैन्य ठिकानों के प्रतिबंधित क्षेत्र के आसपास निर्माण के लिए प्रदेश सरकार की प्राधिकृत एजेंसी मानचित्र के साथ-साथ प्रस्ताव बनाकर भेजेगी। उस प्रस्ताव का भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय में निर्धारित प्रकोष्ठ उसका परीक्षण कराएगा। उसी के बाद एनओसी जारी की जा सकेंगी। यह व्यवस्था बरेली के त्रिशूल एयरबेस सहित देश के प्रमुख स्थानों पर हुए अवैध निर्माण के बाद की जा रही है।
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