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उर्स-ए-रजवी कादरी का मुशायरे से आगाज
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Fri, 25 Nov 2016 01:13 AM IST
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Urs-e-Rjvi Qadri opened from Mushaira
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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उर्स-ए-रजवी कादर रजवी का तरही नातिया मुशायरे से शानदार आगाज हो गया है। मथुरापुर स्थित इस्लामिक स्टडीज जामियतुर्रजा में मुशायरा ताजुश्शरिया मुफ्ती अख्तर रजा खां (अजहरी मियां) की सरपरस्ती में शुरू हुआ। सदारत शहर काजी मौलाना असजद रजा खां कादरी ने किया।
मुशायरे की शुरुआत कारी वसीम ने तिलावते कुरान से किया। इसमें खास तौर से मौलाना गुलजार अहमद का यह कलाम खूब पसंद किया गया कि- खिलाफे मसलके अहमद रजा जो ज्यादा पैमां में हैं, उन्हें मकसद में अपने कामयाबी मिल नहीं सकती। अरे नादान क्यों मक्का से वापस लौट आया तू, मदीना छोड़ कर जन्नत की खुशबू मिल नहीं सकती।
इसी कड़ी में मुफ्ती जफरुल कादरी ने पढ़ा- कली जिस दिल में इश्के मुस्तफा की खिल नहीं सकती, उसे फिरदौस के फूलों की खुशबू मिल नहीं सकती। राशिद रजा ने पढ़ा- सभी अहले सुन्नत के नाखुदा ताजुश्शरिया हैं, हमारी कश्ती-ए-इमां हरगिज हिल नहीं सकती। इसके अलावा मौलाना फैसल रजा, मौलाना कौसर सुल्तानपुरी, फारूख मदनापुरी आदि ने कलाम पेश किया।
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यह मुशायरा उर्स प्रभारी सलमान मियां, मुफ्ती आशिक हुसैन की निगरानी संपन्न हुआ। इसमें शहजाद आलम, मौलाना शकील बरेलवी व मौलाना गुलजार का सहयोग रहा। निजामत मौलाना फुरकान नसीम आशी ने किया। पूर्व में कुरान ख्वानी उर्स की शुरुआत हुई। दिन में नात व मनकबत का दौर चला और शाम महफिले मीलाद का आयोजन किया गया।
आज के कार्यक्रम
बरेली। उर्स-ए-रजवी कादरी के दूसरे रोज शुक्रवार को कार्यक्रम की शुरुआत सुबह कुरान ख्वानी व नातो मनकबत से होगा। मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि रात में 8 बजे से अंतरराष्ट्रीय इमाम अहमद रजा कांफ्रेंस होगी। इस बीच जश्ने दस्तारबंदी का कार्यक्रम होगा। देर रात 1.38 बजे मुफ्ती आजम हिंद का कुल शरीफ होगा।
उर्स की संभाली व्यवस्था
उर्स-ए-रजवी कादरी की व्यवस्था जमात रजा मुस्तफा के खलील कादरी, हाजी अजहर बेग, नासिर कुरैशी, दानिश रजा, अतीक अहमद, काजी गुलाम मुजतबा, नदीन रजा मरकजी, आमिल हुसैन, इकरार रजा, हाजी अमरीक खान, तस्लीम रजा ने संभाली।
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मुशायरे की शुरुआत कारी वसीम ने तिलावते कुरान से किया। इसमें खास तौर से मौलाना गुलजार अहमद का यह कलाम खूब पसंद किया गया कि- खिलाफे मसलके अहमद रजा जो ज्यादा पैमां में हैं, उन्हें मकसद में अपने कामयाबी मिल नहीं सकती। अरे नादान क्यों मक्का से वापस लौट आया तू, मदीना छोड़ कर जन्नत की खुशबू मिल नहीं सकती।
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इसी कड़ी में मुफ्ती जफरुल कादरी ने पढ़ा- कली जिस दिल में इश्के मुस्तफा की खिल नहीं सकती, उसे फिरदौस के फूलों की खुशबू मिल नहीं सकती। राशिद रजा ने पढ़ा- सभी अहले सुन्नत के नाखुदा ताजुश्शरिया हैं, हमारी कश्ती-ए-इमां हरगिज हिल नहीं सकती। इसके अलावा मौलाना फैसल रजा, मौलाना कौसर सुल्तानपुरी, फारूख मदनापुरी आदि ने कलाम पेश किया।
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यह मुशायरा उर्स प्रभारी सलमान मियां, मुफ्ती आशिक हुसैन की निगरानी संपन्न हुआ। इसमें शहजाद आलम, मौलाना शकील बरेलवी व मौलाना गुलजार का सहयोग रहा। निजामत मौलाना फुरकान नसीम आशी ने किया। पूर्व में कुरान ख्वानी उर्स की शुरुआत हुई। दिन में नात व मनकबत का दौर चला और शाम महफिले मीलाद का आयोजन किया गया।
आज के कार्यक्रम
बरेली। उर्स-ए-रजवी कादरी के दूसरे रोज शुक्रवार को कार्यक्रम की शुरुआत सुबह कुरान ख्वानी व नातो मनकबत से होगा। मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि रात में 8 बजे से अंतरराष्ट्रीय इमाम अहमद रजा कांफ्रेंस होगी। इस बीच जश्ने दस्तारबंदी का कार्यक्रम होगा। देर रात 1.38 बजे मुफ्ती आजम हिंद का कुल शरीफ होगा।
उर्स की संभाली व्यवस्था
उर्स-ए-रजवी कादरी की व्यवस्था जमात रजा मुस्तफा के खलील कादरी, हाजी अजहर बेग, नासिर कुरैशी, दानिश रजा, अतीक अहमद, काजी गुलाम मुजतबा, नदीन रजा मरकजी, आमिल हुसैन, इकरार रजा, हाजी अमरीक खान, तस्लीम रजा ने संभाली।