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Bareilly News: गन्ना विकास समिति के बोर्ड बैठक में हंगामा
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बहेड़ी। सहकारी गन्ना विकास समिति के बोर्ड की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। गन्ना समिति के उपाध्यक्ष व निदेशकों ने गन्ना लेकर बाहर जाने वाले किसानों को रोकने का विरोध किया। वहीं, एक निदेशक ने गन्ना विकास समिति व गन्ना विकास विभाग के बैंक खातों में किसानों द्वारा काटे गए कमीशन का पैसा गन्ना मूल्य भुगतान में दिए जाने का मुद्दा उठाया। उनके इस प्रस्ताव पर सभी ने मोहर लगा दी।
गन्ना समिति परिसर में आयोजित बोर्ड की बैठक अध्यक्ष राजेंद्र कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई। उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने किसानों की गन्ने की ट्रालियां गन्ना विभाग व चीनी मिल द्वारा रोके जाने का विरोध किया। इसको लेकर जमकर हंगामा हुआ। बीते दिनों मंडनपुर के किसान अंकुर चौधरी के खिलाफ दर्ज हुए मुकदमे को लेकर नाराजगी जाहिर की गई। मुकदमा वापस लिए जाने की मांग की गई। उन्होंने कहा कि केसर चीनी मिल के सीएमडी, सीईओ व कॉर्मशियल मैनेजर के खिलाफ भुगतान को लेकर रिपोर्ट दर्ज कराई जाए।
निदेशक ओमवीर सिंह ने कहा कि गन्ना विकास समिति व गन्ना विकास विभाग के पास लगभग 45 करोड़ रुपये किसानों के द्वारा दिए गए कमीशन का बैंक में जमा है। किसान की परेशानी को देखते हुए सत्र में की गई गन्ना सप्लाई का 25 प्रतिशत ऋण के रूप में रकम किसान को दी जाए। किसान की गन्ने के भुगतान से उस रकम को काट लिया जाएगा और उसका ब्याज चीनी मिल से लिया जाए। उनके इस प्रस्ताव पर सभी ने मोहर लगा दी। इस मौके पर निदेशक डालचंद, सीताराम, मेजरसिंह, घनश्याम उपाध्याय, उमाशंकर, खूबचंद मौजूद रहे। संवाद
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गन्ना समिति परिसर में आयोजित बोर्ड की बैठक अध्यक्ष राजेंद्र कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई। उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने किसानों की गन्ने की ट्रालियां गन्ना विभाग व चीनी मिल द्वारा रोके जाने का विरोध किया। इसको लेकर जमकर हंगामा हुआ। बीते दिनों मंडनपुर के किसान अंकुर चौधरी के खिलाफ दर्ज हुए मुकदमे को लेकर नाराजगी जाहिर की गई। मुकदमा वापस लिए जाने की मांग की गई। उन्होंने कहा कि केसर चीनी मिल के सीएमडी, सीईओ व कॉर्मशियल मैनेजर के खिलाफ भुगतान को लेकर रिपोर्ट दर्ज कराई जाए।
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निदेशक ओमवीर सिंह ने कहा कि गन्ना विकास समिति व गन्ना विकास विभाग के पास लगभग 45 करोड़ रुपये किसानों के द्वारा दिए गए कमीशन का बैंक में जमा है। किसान की परेशानी को देखते हुए सत्र में की गई गन्ना सप्लाई का 25 प्रतिशत ऋण के रूप में रकम किसान को दी जाए। किसान की गन्ने के भुगतान से उस रकम को काट लिया जाएगा और उसका ब्याज चीनी मिल से लिया जाए। उनके इस प्रस्ताव पर सभी ने मोहर लगा दी। इस मौके पर निदेशक डालचंद, सीताराम, मेजरसिंह, घनश्याम उपाध्याय, उमाशंकर, खूबचंद मौजूद रहे। संवाद
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