{"_id":"59063cc94f1c1bcb3a441b36","slug":"up-irrigation-department-did-not-give-nanak-bagul-dhaura-dam-and-banbasa-kothi","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपी सिंचाई विभाग ने नहीं दिया नानक, बैगुल, धौरा डैम और बनबसा कोठी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी सिंचाई विभाग ने नहीं दिया नानक, बैगुल, धौरा डैम और बनबसा कोठी
बरेली।
Updated Mon, 01 May 2017 01:07 AM IST
विज्ञापन
यूपी सिंचाई विभाग ने नहीं दिया नानक, बैगुल, धौरा डैम और बनबसा कोठी
- फोटो : यूपी सिंचाई विभाग ने नहीं दिया नानक, बैगुल, धौरा डैम और बनबसा कोठी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सिंचाई विभाग ने नहर, जलाशय, भवन, भूमि आदि संपत्ति बंटवारे पर संयुक्त मैराथन बैठक कर कई मामलों पर सहमति बना ली। यूपी ने नानक, धौरा, बैगुल और बनबसा स्थित कालोनी, कोठी, बैराज आदि देने से इंकार कर दिया। सितारगंज और किच्छा कालोनी उत्तराखंड राज्य को सौंप दी गयी।
विभागीय प्रमुख सचिव और संबंधित इंजीनियरों ने रुद्रपुर में संपत्ति हस्तांतरण संबंधी कई बिंदुओं पर बैठक कर सहमति बना ली है। लंबित कुछ मामलों पर अगले माह फिर बैठक होगी। नेपाल दरबार से मिली 235.355 हेक्टर भूमि पर उत्तराखंड राज्य और सिंचाई अफसरों ने दावा किया था। बनबसा स्थित यह भूमि अंतरराष्ट्रीय समझौते मिली थी, भारत ने इसके बदले में जिला बहराइच स्थित 11 गांव नेपाल को दिए थे। इसलिए बनबसा स्थित बैराज, राम बाग, आम बाग और डैम कोठी आदि यूपी सिंचाई विभाग ने सौंपने से इंकार कर दिया है। इसके साथ ही सतुईया निरीक्षण भवन, धौरा कालोनी, नानक सागर कालोनी, खटीमा कालोनी आदि पर भी यूपी काबिज रहेगा। साथ ही नानक सागर कालोनी में बने 109 भवनों में भी हिस्सा नहीं दिया है।
यूपी ने किच्छा कार्यालय, कालोनी, सितारगंज कालोनी, प्राग फार्म आदि उत्तराखंड को दिया है। समझौता में लोहिया हेड कालोनी और भूमि, लाल कोठी खटीमा, नानक सागर स्थित 20.89 में से 5.22 हेक्टर और बैगुल बांध कालोनी स्थित 12.125 में से 3.03 हेक्टर भूमि और उस पर बने आवास उत्तराखंड को सौंपे हैं। समझौते में तय हुआ कि यूपी सिंचाई विभाग नियंत्रित नहरों के उद्गम बिंदु से सौ मीटर बाद हिस्से पर उत्तराखंड का नियंत्रण होगा। उधमसिंह नगर स्थित 22 नहरों में से अफजल गढ़ खंड की छह नहराें पर पूर्वी गंगा, मुख्य अभियंता, मुरादाबाद काबिज रहेंगे। उत्तराखंड नियंत्रण वाली 11 नहरों के मामले तय होना बाकी है। बता दें, 17 वर्षों से उत्तराखंड यूपी की संपत्तियों पर दावा ठोंकता आ रहा है।
विज्ञापन
दोनों राज्यों के बीच हुई वार्ता में ज्यादातर मामले निस्तारित हो गए हैं। कुछ बिंदुओं पर सहमति नहीं बन पाई है, अगले माह फिर बैठक होगी। यूपी ने जिन संपत्तियों पर दावा किया है, उनमें ज्यादातर सहमति बन चुकी है।
- उमेश कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
विज्ञापन
विभागीय प्रमुख सचिव और संबंधित इंजीनियरों ने रुद्रपुर में संपत्ति हस्तांतरण संबंधी कई बिंदुओं पर बैठक कर सहमति बना ली है। लंबित कुछ मामलों पर अगले माह फिर बैठक होगी। नेपाल दरबार से मिली 235.355 हेक्टर भूमि पर उत्तराखंड राज्य और सिंचाई अफसरों ने दावा किया था। बनबसा स्थित यह भूमि अंतरराष्ट्रीय समझौते मिली थी, भारत ने इसके बदले में जिला बहराइच स्थित 11 गांव नेपाल को दिए थे। इसलिए बनबसा स्थित बैराज, राम बाग, आम बाग और डैम कोठी आदि यूपी सिंचाई विभाग ने सौंपने से इंकार कर दिया है। इसके साथ ही सतुईया निरीक्षण भवन, धौरा कालोनी, नानक सागर कालोनी, खटीमा कालोनी आदि पर भी यूपी काबिज रहेगा। साथ ही नानक सागर कालोनी में बने 109 भवनों में भी हिस्सा नहीं दिया है।
विज्ञापन
यूपी ने किच्छा कार्यालय, कालोनी, सितारगंज कालोनी, प्राग फार्म आदि उत्तराखंड को दिया है। समझौता में लोहिया हेड कालोनी और भूमि, लाल कोठी खटीमा, नानक सागर स्थित 20.89 में से 5.22 हेक्टर और बैगुल बांध कालोनी स्थित 12.125 में से 3.03 हेक्टर भूमि और उस पर बने आवास उत्तराखंड को सौंपे हैं। समझौते में तय हुआ कि यूपी सिंचाई विभाग नियंत्रित नहरों के उद्गम बिंदु से सौ मीटर बाद हिस्से पर उत्तराखंड का नियंत्रण होगा। उधमसिंह नगर स्थित 22 नहरों में से अफजल गढ़ खंड की छह नहराें पर पूर्वी गंगा, मुख्य अभियंता, मुरादाबाद काबिज रहेंगे। उत्तराखंड नियंत्रण वाली 11 नहरों के मामले तय होना बाकी है। बता दें, 17 वर्षों से उत्तराखंड यूपी की संपत्तियों पर दावा ठोंकता आ रहा है।
विज्ञापन
दोनों राज्यों के बीच हुई वार्ता में ज्यादातर मामले निस्तारित हो गए हैं। कुछ बिंदुओं पर सहमति नहीं बन पाई है, अगले माह फिर बैठक होगी। यूपी ने जिन संपत्तियों पर दावा किया है, उनमें ज्यादातर सहमति बन चुकी है।
- उमेश कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग