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विवि के वित्त अधिकारी को किससे है खतरा!
बरेली
Updated Wed, 24 Dec 2014 11:06 PM IST
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दो महीने पहले सिक्योरिटी का कार्यकाल खत्म हो जाने पर रुहेलखंड विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। इस पर एडीएम सिटी ने रजिस्ट्रार से विश्वविद्यालय के माहौल पर जानकारी मांगी है।
लखनऊ में ...को हुई वित्त समिति की बैठक के बाद से वित्त अधिकारी भानु प्रकाश का विश्वविद्यालय में आना-जाना तो रहा है, लेकिन ऑफि में बैठकर काम नहीं कर रहे हैं। कई दिनों से वह ट्रेजरी में ही बैठ रहे हैं और सर्किट हाउस में रह रहे हैं। विश्वविद्यालय के आवास में भी नहीं आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने कई बार असुरक्षा को लेकर शिकायत की थी। सुनवाई न होने पर वह बुधवार को डीएम से मिलने पहुंच गए। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपनी समस्याएं बताते हुए सुरक्षा की मांग की। वित्त अधिकारी का कहना है कि सिक्योरिटी का कार्यकाल अक्तूबर में खत्म हो चुका है। जब तक सिक्योरिटी के लिए दोबारा से ठेका नहीं दिया जाएगा, तब तक उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता है। इसके बाद एडीएम सिटी ने रजिस्ट्रार से विश्वविद्यालय के माहौल के बारे में जाना।
उधर, विश्वविद्यालय के कर्मचारियों का कहना है कि वह कर्मचारी यूनियन से डर गए हैं। जबकि, कर्मचारी यूनियन के नेता सिर्फ अपने अधिकार मांग रहे हैं। सूत्रों की मानें तो विश्वविद्यालय में वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई है।
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लखनऊ में ...को हुई वित्त समिति की बैठक के बाद से वित्त अधिकारी भानु प्रकाश का विश्वविद्यालय में आना-जाना तो रहा है, लेकिन ऑफि में बैठकर काम नहीं कर रहे हैं। कई दिनों से वह ट्रेजरी में ही बैठ रहे हैं और सर्किट हाउस में रह रहे हैं। विश्वविद्यालय के आवास में भी नहीं आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने कई बार असुरक्षा को लेकर शिकायत की थी। सुनवाई न होने पर वह बुधवार को डीएम से मिलने पहुंच गए। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपनी समस्याएं बताते हुए सुरक्षा की मांग की। वित्त अधिकारी का कहना है कि सिक्योरिटी का कार्यकाल अक्तूबर में खत्म हो चुका है। जब तक सिक्योरिटी के लिए दोबारा से ठेका नहीं दिया जाएगा, तब तक उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता है। इसके बाद एडीएम सिटी ने रजिस्ट्रार से विश्वविद्यालय के माहौल के बारे में जाना।
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उधर, विश्वविद्यालय के कर्मचारियों का कहना है कि वह कर्मचारी यूनियन से डर गए हैं। जबकि, कर्मचारी यूनियन के नेता सिर्फ अपने अधिकार मांग रहे हैं। सूत्रों की मानें तो विश्वविद्यालय में वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई है।
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