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कोरोना संक्रमण का खतरा बताकर यूनिवर्सिटी ने बंद की 24 साल पुरानी सड़क
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MJP Rohilkhand university
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डोहरा गौंटिया गांव के लोगों की आपत्ति पर एसडीएम ने जारी किया नोटिस
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बरेली। रुहेलखंड यूनिवर्सिटी ने कोरोना संक्रमण की आशंका जताते हुए 24 साल पुरानी सड़क को आठ फुट गहरा गड्ढा खोदकर बंद कर दिया है। इस पर डोहरा गौंटिया के लोगों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि वे वर्षों से इस रोड से आ-जा रहे हैं। इस मामले में एसडीएम ने राजस्व टीम से सड़क के नक्शे और गाटा संख्या की जांच कराई थी। इसमें यह पुष्टि हुई कि डोहरा गौंटिया के लोग इस सड़क का वर्ष 1977 से इस्तेमाल कर रहे हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम ने विश्वविद्यालय प्रशासन को नोटिस जारी किया है।
राजस्व निरीक्षक ने जांच रिपोर्ट में यह भी बताया है कि डोहरा गौंटिया के ग्रामीणों ने यूनिवर्सिटी से हुए लिखित समझौते की प्रति दी है। इससे स्पष्ट होता है कि यह रोड ग्रामीणों के आवागमन के लिए महत्वपूर्ण है। नजरी नक्शे से यह साफ है कि जो दूसरा रास्ता है, वह बहुत लंबा और संकरा है। विश्वविद्यालय ने संबंधित रोड पर लोगों का प्रवेश रोकने के लिए प्रथम सूचना रिपोर्ट भी दर्ज कराई है। एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह का कहना है कि नियमानुसार किसी लोक स्थान या किसी मार्ग, जिसे जनता विधिपूर्वक इस्तेमाल कर रही है, उसे बाधित नहीं किया जा सकता है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित सड़क को 23 वर्ष तक चलते रहने की मूक सहमति भी दी है। जहां तक कोरोना का प्रश्न है तो आरआई और ग्रामीणों के बयान से स्पष्ट है कि लॉकडाउन के पहले रास्ता ग्रामीणों की सहमति पर बंद किया गया, लेकिन रास्ते पर खाई खोदकर और पेड़ लगाकर बंद किया जाना नियम विरुद्घ है। एसडीएम ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को नोटिस देकर कहा है कि एक सप्ताह के अंदर रास्ता खोल दें या उनके न्यायालय में हाजिर होकर नोटिस का जवाब दाखिल करें।
राजस्व निरीक्षक ने जांच रिपोर्ट में यह भी बताया है कि डोहरा गौंटिया के ग्रामीणों ने यूनिवर्सिटी से हुए लिखित समझौते की प्रति दी है। इससे स्पष्ट होता है कि यह रोड ग्रामीणों के आवागमन के लिए महत्वपूर्ण है। नजरी नक्शे से यह साफ है कि जो दूसरा रास्ता है, वह बहुत लंबा और संकरा है। विश्वविद्यालय ने संबंधित रोड पर लोगों का प्रवेश रोकने के लिए प्रथम सूचना रिपोर्ट भी दर्ज कराई है। एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह का कहना है कि नियमानुसार किसी लोक स्थान या किसी मार्ग, जिसे जनता विधिपूर्वक इस्तेमाल कर रही है, उसे बाधित नहीं किया जा सकता है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित सड़क को 23 वर्ष तक चलते रहने की मूक सहमति भी दी है। जहां तक कोरोना का प्रश्न है तो आरआई और ग्रामीणों के बयान से स्पष्ट है कि लॉकडाउन के पहले रास्ता ग्रामीणों की सहमति पर बंद किया गया, लेकिन रास्ते पर खाई खोदकर और पेड़ लगाकर बंद किया जाना नियम विरुद्घ है। एसडीएम ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को नोटिस देकर कहा है कि एक सप्ताह के अंदर रास्ता खोल दें या उनके न्यायालय में हाजिर होकर नोटिस का जवाब दाखिल करें।
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रुहलेखंड विश्वविद्यालय ने वर्षों पुराने रास्ता को बंद कर दिया है। जांच में प्रथम दृष्टया यूनिवर्सिटी की यह कार्रवाई अनुचित मिली है। इस संबंध में नोटिस जारी किया गया है। -ईशान प्रताप सिंह, एसडीएम सदर
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