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तीन तलाक बिल लाना मुसलमानों की संवैधानिक और धार्मिक आजादी पर हमला: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
Thu, 20 Dec 2018 09:57 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
Published by: Vikas Kumar
Updated Thu, 20 Dec 2018 09:57 AM IST
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triple talaq
- फोटो : फाइल फोटो
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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना डॉ. यासीन उस्मानी ने तीन तलाक पर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए बिल का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह सीधे तौर पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में दखलंदाजी है। भारत के संविधान ने हर वर्ग के मानने वालों को अपने-अपने पर्सनल लॉ के अनुसार जिंदगी गुजारने की आजादी दी है। मुसलमानों की मर्जी के खिलाफ तीन तलाक पर ऐसा कानून बनाने का प्रयास करना जो शरीयत की मंशा के खिलाफ हो, मुसलमानों की संवैधानिक और धार्मिक आजादी पर हमला है।
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औरतों के अधिकारों की रक्षा के बहाने गैर शरई कानून थोपना केंद्र सरकार का उचित कदम नहीं है। भारत के मुसलमान इस प्रकार के किसी भी कानून को स्वीकार नहीं करेंगे। केंद्र सरकार को तीन तलाक पर लाए गए अपने इस बिल को वापस लेना चाहिए। भारतवासियों के संवैधानिक और धार्मिक अधिकारियों की रक्षा और उनकी भावनाओं का लिहाज रखना सरकारी की बुनियादी जिम्मेदारी है।
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लोकतंत्र में धार्मिक मुद्दों पर सियासत करना और अल्पसंख्यक के अधिकारों का वोटों के लिए हनन करना इंसाफ की बात नहीं है। सरकार की जिम्मेदारी जिन कांधों पर होती है उन्हें देश के नागरिकों के हुकूक और जज्बात पर बारीकी से नजर रखना चाहिए। तमाम फैसले और कानून बनाने की इच्छाएं केवल और केवल सियासत और सत्ता के लिए नहीं। इस तरह के फैसलों का प्रभाव समाज के मजबूत तानेबाने को कमजोर करता है।
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