Bareilly: पुल निर्माण में लेटलतीफी से टूटेगी परंपरा, पैदल चलेंगे राम-लक्ष्मण, यहां होली पर होती है रामलीला
बरेली में होली के अवसर पर ऐतिहासिक रामलीला होता है। इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया है। 163 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा, जब बिहारीपुर से नावल्टी तक रामजी का रथ नहीं जा सकेगा।
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बरेली में होली पर होने वाली ऐतिहासिक बमनपुरी की रामलीला में इस बार परंपरा टूटेगी। 163 साल में यह पहला मौका होगा, जब राम-लक्ष्मण स्वरूप पैदल चलेंगे। कुतुबखाना पुल निर्माण में लेटलतीफी के चलते ऐसा हुआ है। सड़क की खोदाई की वजह से रथ का निकलना संभव नहीं है और समिति राम बरात का रास्ता बदलना नहीं चाहती। ऐसे में पैदल चलने का फैसला लिया गया है।
वर्ष 1861 में शुरू हुई इस रामलीला को यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया है। रामलीला कमेटी के उपाध्यक्ष विशाल मेहरोत्रा ने बताया कि बमनपुरी से निकलकर राम बरात बिहारीपुर, टाउन हाल, कुतुबखाना, जिला परिषद मार्ग से होती हुई नावल्टी तक पहुंचती है। यहां से पुराना बस अड्डा, कालीबाड़ी, श्यामगंज मंडी, साहू गोपीनाथ, मठ की चौकी, आलमगिरीगंज, कुतुबखाना, साहूकारा, किला, सिटी स्टेशन रोड, सब्जी मंडी, मलूकपुर पुलिस चौकी होते हुए बमनपुरी पहुंचकर इसका समापन होता है।
इस बार रास्ते की खोदाई के चलते कुतुबखना से रथ निकालना मुश्किल है, जबकि इसी रास्ते पर अलग-अलग जगहों पर राम बरात का स्वागत होना है। रास्ता बदलने पर स्वागत की परंपरा टूट जाती। इसे कायम रखने के लिए तय किया गया कि राम बरात का रथ बमनपुरी से मलूकपुर चौकी होते हुए बिहारीपुर पहुंचेगा। यहां से राम और लक्ष्मण भक्तों के साथ पैदल चलकर नावल्टी पहुंचेंगे। इधर खाली रथ भी नावल्टी पहुंचा दिया जाएगा। यहां से राम-लक्ष्मण फिर रथ पर सवार होंगे और पहले से तय रास्ते से राम बरात निकलेगी। बमनपुरी में इसका समापन होगा।
123 साल में पहली बार बदलेगा नृसिंह शोभायात्रा का रास्ता
होली से एक दिन पहले निकलने वाली नृसिंह शोभायात्रा की परंपरा भी इस बार टूटेगी। कोहाड़ापीर पर हो रही खोदाई के चलते 123 साल से निकल रही इस शोभायात्रा का रास्ता पहली बार बदला जाएगा। इसमें पांच झांकियां भी शामिल रहती हैं।
श्री नृसिंह भगवान शोभायात्रा समिति के सचिव नीरू भारद्वाज ने बताया कि यह यात्रा चाहबाई से शुरू होकर गुलाबनगर रोड होते हुए कोहाड़ापीर तिराहे से कुतुबखाना पहुंचती है। यहां जिला अस्पताल रोड से नावल्टी, पुराना बस अड्डा, बरेली कॉलेज तिराहा, कालीबाड़ी, श्यामगंज, साहू गोपीनाथ, आलमगिरीगंज, कुतुबखाना, कोहाड़ापीर होते हुए वापस गुलाबनगर और चाहबाई पहुंचकर समापन होता है।
इस बार खोदाई के चलते पहली बार इसमें बदलाव किया गया है। यात्रा चाहबाई से शुरू होकर गुलाबनगर पहुंचेगी और यहीं से कोहाड़ापीर जाने की बजाय अलका होटल वाली गली से सीधे कुतुबखाना रोड पर पहुंचेगी। जिला अस्पताल रोड पर खोदाई के चलते यात्रा जिला परिषद रोड, इस्लामिया कॉलेज के सामने से नावल्टी पहुंचेगी। इसके बाद पुराना बस अड्डा होते हुए अपने परंपरागगत मार्ग से चाहबाई पहुंचेगी, जहां इसका समापन होगा।