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सत्या पेट्रोल पंप पर तोमर साहब मेहरबान

Tue, 09 May 2017 01:31 AM IST
बरेली। 
बरेली।  Updated Tue, 09 May 2017 01:31 AM IST
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Tomar Sahab Meharban on Satya Patrol Pump
Tomar Sahab Meharban on Satya Patrol Pump - फोटो : Tomar Sahab Meharban on Satya Patrol Pump
मेयर डॉ. आईएस तोमर और नगर आयुक्त शीलधर यादव की जोड़ी का कमाल है कि लीज डीड के उल्लंघन और विधिक राय के अनुकूल होने के बाद भी आईओसी के नाम पर सत्या पेट्रोल पंप को दी गई जमीन का अनुबंध तीस साल बढ़ाने का प्रस्ताव सदन में आ गया। खास बात ये है कि इस जमीन पर 2009 के बाद से सत्या पंप के मालिक बिना कुछ दिए काबिज हैं। आई ए एस तोमर जब दुबारा मेयर बने तो उन्होंने लीज बढ़ाने के लिए विधिक राय लेने की पहल की। एक परामर्शदाता ने इसे निगम के हित के विपरीत बता दिया था लेकिन दूसरे के  परामर्श के संशय का फायदा उठा कर नगर आयुक्त  से अखिलेश सरकार के अंतिम दिनों में शासन से पत्र भी मंगवा लिया कि शर्तों का उल्लंघन न हो रहा हो तो नवीनीकरण कर लिया जाए। नगर आयुक्त पहले ही लिख कर दे चुके थे कि शर्तों का उल्लंघन नहीं हो रहा है। सोमवार को नगर निगम बोर्ड की बैठक में पार्षद कपिल कांत ने नगर निगम के कर्ताधर्ताओं की मंशा पर सवाल उठाए तो ये प्रस्ताव स्थगित करना पड़ा। 
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 मैसर्स इंडियन ऑयल कारपोरेशन को पीलीभीत रोड निकट स्टेडियम पर 1979 में लीज पर दी गई 837 वर्ग गज भूमि का अनुबंध  2009 में खत्म हो चुका था। इंडियन ऑयल कारपोरेशन ने शर्तों का उल्लंघन करके इसे सत्या को दे दिया।  यह मामला सोमवार को बोर्ड बैठक में उठा तो मेयर कोई जवाब नहीं दे पाए। विवाद से बचने के लिए जानबूझ कर प्रस्ताव 91(2) के बाद लाया गया था। सदन में जब बखेड़ा खड़ा हो गया तो प्रस्ताव को स्थगित करना पड़ा।
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पार्षद कपिल कांत का कहना था कि पंप की लीज खत्म हो जाने के बाद भी इसको चलने कैसे दिया गया और बकाया भी नहीं वसूला। जमीन इंडियन ऑयल को दी गई थी जबकि चल सत्या पेट्रोल पंप के नाम से रहा है।  राजस्व हानि की बात पार्षद ने उठाई। पार्षद ने कहा कि प्रस्ताव के कागज में पांच लाइनें अंग्रेजी में लिखी है जिसे अधिकतर पार्षद नहीं समझ सकते। ऐसे प्रस्ताव को लाने की क्या जरूरत थी। 50 फीसदी की दर से किराया वृद्धि की बात कही गई है जबकि यह अभी मात्र 1350 रुपए ही वसूल रहे हैं और 50 फीसदी बढ़कर यह 2200 रुपए पर पहुंच जाएगा जो बहुत मामूली है। पार्षद ने  कहा कि वह कोई बात बिना सबूत के नहीं कहते हैं, पिछली बार शिकायत पर मेयर के खिलाफ जांच नहीं हो पाई लेकिन अब गठित हो गई है। मेयर ने पार्षद से कहा कि जितना सही हो उतना बोलो।
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- गुंजाइश मिली और मेयर ने कर दिया काम
 मेयर डॉ. आईएस तोमर ने अगस्त 2013  निगम के अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार जैन से  विधिक परामर्श लिया। जो लीज डीड बढ़ाने के पक्ष में नहीं थी फिर शिरीष कुमार मेहरोत्रा से भी  परामर्श लिया गया।  मेहरोत्रा का परामर्श में गुंजाइश थी कि ऐसा किया जा सकता है। हालांकि इस पर भी निगम का आधिकार है कि वह संशय की स्थिति में ऐसा न करे। मेयर ने मेहरोत्रा के परामर्श का फायदा उठाकर नगर आयुक्त की संस्तुति के साथ नवीनीकरण का प्रस्ताव शासन को भेज दिया। शासन ने शर्तों का उल्लंघन न होने की स्थिति में नवीनीकरण में कोई आपत्ति न होने की बात लिख दी। यानी ट्रंचिंग ग्राउंड की तर्ज पर ये मामला भी सपा शासन के जाते-जाते मैनेज करने लायक बना दिया गया था। 
- क्या कहता है निगम अधिनियम
निगम अधिनियम 1959 की धारा 129(5) के मुताबिक निगम की कोई अचल संपत्ति उस दशा के सिवाय जब निमभनलिखित को भूमि बेची जाए, पट्टे पर दी जाए या अन्य प्रकार से हस्तांतरित की जाए, उसके बाजार मूल्य से कम धनराशि पर न तो बेची जाएगी न पट्टे पर दी जाएगी और न अन्य प्रकार से उसका हस्तांतरण किया जाएगा। साथ ही प्रतिबंध यह कि सिवाय राज्य सरकार के पुर्वानुमोदन से भूमि को बेचने, पट्टे पर देने या अन्य प्रकार से हस्तांतरण करने की दशा में इस प्रकार दी गई किसी रियायत का मूल्य बाजार मूल्य के आधे या दस हजार रुपए से, इससे जो भी कम हो अधिक न होगी।

पुराने नगर आयुक्त ने की थी आपत्ति
पुराने नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह ने शासन को पत्र लिखकर इस पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने बताया था कि जमीन इंडियन ऑयल को दी गई थी जबकि संचालन सत्या सर्विस स्टेशन कर रहा है। जो शर्तों का उल्लंघन है। इसके अलावा अगर किराये में मात्र 50 प्रतिशत तक की वृद्धि करते हुए कारपोरेशन के पक्ष में लीज का नवीनीकरण की कार्यवाही करनी है तो शासन को अनुमति देनी होगी। जबकि मौजूदा समय में संचालन सत्या द्वारा किया जा रहा है। जो उल्लंघन हैं। उन्होंने इस पर कार्रवाई की मांग की थी। 
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