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Bareilly News: जिंदगी की साज पर थम गई कथक गुरु जितेंद्र के घुंघरुओं की आवाज
Fri, 24 Feb 2023 02:13 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Fri, 24 Feb 2023 02:13 AM IST
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बरेली। विश्व प्रसिद्ध कथक गुरु जितेंद्र महाराज के घुंघरुओं की आवाज थम गई। 18 फरवरी को दिल्ली में उनका निधन हो गया। करीब 77 वर्ष के नृत्याचार्य का दिल्ली में इलाज चल रहा था। केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी सहित अनेक सम्मानों से सम्मानित जितेंद्र महाराज शहर के भूड़ मोहल्ले के रहने वाले थे। काफी वर्षों से वह दिल्ली में ही रह रहे थे। वह शास्त्रीय संगीत के बनारस घराने के कृष्ण कुमार महाराज के शिष्य थे।लगभग तीन साल पहले वह बरेली में एसआरएमएस रिद्धिमा थिएटर के उद्घाटन पर आए थे।
जितेंद्र महाराज के परिवार के अनेक सदस्य आज भी बरेली में रह रहे हैं। दिल्ली में कथक सिखाने के लिए उन्हें एक संस्थान की भी स्थापना की। उनकी शिष्याओं में नलिनी-कमलनी ने पूरी दुनिया में नाम कमाया। दोनों उनकी विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। बरेली सहित तमाम स्थानों पर वह अपने गुरु के साथ मंचों पर प्रस्तुतियां देतीं रहीं है।
खानकाह नियाजिया की महफिल में प्रस्तुति देने आते थे महराज
गुरु जितेंद्र महाराज का विश्व प्रसिद्ध सूफी स्थल खानकाह नियाजिया से खास नाता रहा है। उन्होंने नियाजिया बाग में लगभग 25 साल पहले तक होने वाली शास्त्रीय संगीत की महफिल में अपनी प्रस्तुतियां दीं थीं। खानकाह प्रबंधक शब्बू मियां नियाजी ने बताया कि जितेंद्र महाराज का खानकाह से आत्मीय लगाव था। उनकी खानकाह के बुजुर्गों से अकीदत रही है। वह जब भी बरेली आते खानकाह में हाजिरी देने जरूर आते थे।
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उनका जाना खल गया...बरेली की शान थे कथक गुरु
प्रसिद्ध गजल गायक खुर्शीद अली खान ने कहा कि बताया कि गुरु जितेंद्र महाराज के बरेली आने पर उनसे मुलाकात होती थी। उनका यूं जाना खल गया। उनके परिवार के लोगों से नाता है।
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जितेंद्र महाराज के परिवार के अनेक सदस्य आज भी बरेली में रह रहे हैं। दिल्ली में कथक सिखाने के लिए उन्हें एक संस्थान की भी स्थापना की। उनकी शिष्याओं में नलिनी-कमलनी ने पूरी दुनिया में नाम कमाया। दोनों उनकी विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। बरेली सहित तमाम स्थानों पर वह अपने गुरु के साथ मंचों पर प्रस्तुतियां देतीं रहीं है।
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खानकाह नियाजिया की महफिल में प्रस्तुति देने आते थे महराज
गुरु जितेंद्र महाराज का विश्व प्रसिद्ध सूफी स्थल खानकाह नियाजिया से खास नाता रहा है। उन्होंने नियाजिया बाग में लगभग 25 साल पहले तक होने वाली शास्त्रीय संगीत की महफिल में अपनी प्रस्तुतियां दीं थीं। खानकाह प्रबंधक शब्बू मियां नियाजी ने बताया कि जितेंद्र महाराज का खानकाह से आत्मीय लगाव था। उनकी खानकाह के बुजुर्गों से अकीदत रही है। वह जब भी बरेली आते खानकाह में हाजिरी देने जरूर आते थे।
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उनका जाना खल गया...बरेली की शान थे कथक गुरु
प्रसिद्ध गजल गायक खुर्शीद अली खान ने कहा कि बताया कि गुरु जितेंद्र महाराज के बरेली आने पर उनसे मुलाकात होती थी। उनका यूं जाना खल गया। उनके परिवार के लोगों से नाता है।