यूपी: बरेली की पहली करोड़पति दीदी बनीं सुशीला, मधुमक्खी पालन से लिखी आत्मनिर्भरता की नई मिसाल
बहेड़ी क्षेत्र की सुशीला देवी शहद उत्पादन से बरेली जिले की पहली करोड़पति दीदी बन गई हैं। उनके हनी महिला स्वयं सहायता समूह से 17 महिलाएं जुड़ी हैं। यह समूह 50 से अधिक महिलाओं को रोजगार दे रहा है। समूह का मासिक कारोबार करीब 2.50 लाख रुपये है।
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बरेली के बहेड़ी क्षेत्र के बड़ौरा गांव की सुशीला देवी ने शहद उत्पादन को रोजगार का जरिया बनाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। अब वह जिले की पहली करोड़पति दीदी बन गई हैं। उनके समूह से 17 महिलाएं सीधे जुड़ी हैं। उनके कारोबार से 50 से अधिक महिलाओं को रोजगार का अवसर मिला है। वर्तमान में समूह करीब 2.50 लाख रुपये प्रतिमाह का कारोबार कर रहा है।
सुशीला ने बताया कि उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ 23 नवंबर 2023 को हनी महिला स्वयं सहायता समूह की शुरुआत की थी। मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से कारोबार शुरू किया। गुणवत्ता, पैकेजिंग और मांग पर ध्यान देने से शहद की बिक्री बढ़ती गई। समूह में एक दिव्यांग महिला भी शामिल है।
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समूह को रिवॉल्विंग फंड से 30 हजार और सामुदायिक निवेश फंड से करीब 1.50 लाख रुपये की सहायता मिली। इसके बाद ब्लॉक मिशन प्रबंधन इकाई बहेड़ी के सहयोग से मुख्यमंत्री युवा उद्यम विकास योजना के तहत 3.50 लाख रुपये की धनराशि मिली। इससे सुशीला ने 100 उन्नत मधुमक्खी बॉक्स और हनी प्रोसेसिंग व बॉटलिंग यूनिट स्थापित की। सुशीला के उद्यम को नेशनल बी बोर्ड से पंजीकरण के साथ लाइफटाइम मेंबरशिप भी मिली है।
कस्तूरबा विद्यालयों तक पहुंचा शहद
समूह के शुद्ध शहद की आपूर्ति बरेली के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं की पोषण जरूरत के लिए की जा रही है। सुशीला ने बताया कि जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने भी उनके काम की सराहना की है। प्राथमिक विद्यालयों में बुधवार को बच्चों को दिए जाने वाले दूध के साथ शहद शामिल कराने के निर्देश संबंधित अधिकारी को दिए हैं।
गांव-गांव जाकर महिलाओं को जोड़ रहीं
सुशीला देवी कृषि आजीविका सखी के रूप में भी काम कर रही हैं। वह गांव-गांव जाकर महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने, मधुमक्खी पालन अपनाने और स्वरोजगार के अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करती हैं।
सीडीओ देवयानी ने बताया कि सुशीला अन्य स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए प्रेरणा से कम नहीं हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही समूहों की संख्या बढ़ाने के लिए विभागीय अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।