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देश सेवा का सिला.. यूएन ने शांति प्रयासों के लिए नवाजा.. पुलिस ने उत्पाती बताया

Sat, 06 Mar 2021 01:19 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 06 Mar 2021 01:19 AM IST
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The service of the country .. UN awarded for peace efforts .. Police said to be a bully
नेपाल सिहं (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

दो साल पहले गुजरे वायुसेना कर्मी को बेटे समेत पंचायत चुनाव में कराया मुचलका पाबंद
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पति के अपमान से आहत पत्नी सप्ताह भर से लगा रहीं अफसरों के चक्कर, पर सुनवाई नहीं

बरेली। चंदा देवी की समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करें। तमाम बरसों तक भारतीय वायुसेना के जरिए देश की सेवा करने वाले उनके पति नेपाल सिंह के नाम पर कैंट पुलिस ने ऐसा दाग लगाया है जो वह बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं। कभी नेपाल सिंह को शांति प्रयासों में योगदान के लिए संयुक्त राष्ट्र ने मेडल देकर सम्मानित किया था, मगर अब पुलिस ने उन्हें असामाजिक प्रवृत्ति का शख्स करार देते हुए शांति भंग करने की आशंका में मुचलका पाबंद कर दिया है, वह भी तब जब उन्हें गुजरे दो साल हो चुके हैं। पति की सेवाओं पर गौरव का एहसास करने वाली चंदा देवी एक झटके से अपमान और बेबसी में घिर गई हैं। हद यह है कि पुलिस की इस नाइंसाफी के खिलाफ कोई उच्चाधिकारी भी उनकी एक सुनने को तैयार नहीं है।
पति को शांति भंग करने की आशंका में मुचलका पाबंद किए जाने के बाद से चंदा देवी लगातार अफसरों के दफ्तरों में चक्कर काट रही हैं लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है। चंदा देवी का परिवार शहर से सटे भरतौल गांव में रहता है। उनके पति नेपाल सिंह भारतीय वायुसेना में रसोइये के पद पर कार्यरत थे। संयुक्त राष्ट्र ने 2004 में नेपाल सिंह को सूडान में बतौर सैन्यकर्मी शांति प्रयासों में योगदान के लिए मेडल देकर नवाजा था। सराहनीय सेवाओं के लिए उन्हें भारतीय वायुसेना की ओर से भी कई प्रशस्ति पत्र मिले। नेपाल सिंह के बेटे प्रदीप सिंह उर्फ अरुण के मुताबिक पटियाला में तैनाती के दौरान दो मई 2009 को उनके पिता की रीढ़ की हड्डी में चोट लग गई। तीन साल तक चंडीगढ़ में उनका इलाज चला लेकिन वह फिर भी ठीक नहीं हो पाए तो उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया गया। 10 दिसंबर 2019 को घर पर ही उनका निधन हो गया।
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हाल ही में कैंट पुलिस की ओर से नेपाल सिंह और उनके बेटे अरुण को अराजक किस्म का शख्स बताते हुए पंचायत चुनाव में शांति भंग करने की आशंका जताकर एसडीएम को रिपोर्ट भेज दी जिस पर उन्हें मुचलका पाबंद कर दिया गया। बकौल अरुण, वह सीसीटीवी लगाने का काम करते हैं। न सियासत से उनका कोई लेना देना है न उनके परिवार का कोई सदस्य चुनाव लड़ रहा है। वह किसी के समर्थन में चुनाव प्रचार तक नहीं कर रहे हैं। इसके बावजूद कैंट पुलिस की रिपोर्ट पर उन्हें और उनके दिवंगत पिता को सीआरपीसी की धारा 107, 116 और 111 के तहत मुचलका पाबंद कर दिया गया है।
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एसएसपी से फरियाद की, डीएम के दफ्तर भी पहुंचीं, फिर भी नहीं मिला इंसाफ

करीब एक सप्ताह पहले नोटिस घर पहुंचा तो नेपाल सिंह के परिवार को कैंट पुलिस के कारनामे को जानकारी हुई। चंदा देवी इस कदर आहत हुईं कि अगले ही दिन एसएसपी रोहित सिंह सजवाण के सामने पेश हो गईं। उन्हें बताया कि देश सेवा के लिए उनके पति को कई सम्मान मिले हैं लेकिन अब उनकी मौत के बाद पुलिस उनसे शांतिभंग होने का खतरा बता रही है। एसएसपी ने उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया, हालांकि हुआ फिर भी कुछ नहीं। तीन दिन पहले चंदा देवी डीएम से मिलने उनके कार्यालय पहुंचीं। डीएम तो नहीं मिले, स्टाफ ने उन्हें एसडीएम ऑफिस भेज दिया। वहां किसी ने उनसे सीधे मुंह बात तक नहीं की। अब उन्होंने सैनिक कल्याण बोर्ड में शिकायत की है।

मृतक एयरफोर्स कर्मी को मुचलका पाबंद करने की कार्रवाई मेरे संज्ञान में है। इस मामले की जांच कराकर कार्रवाई कराई जाएगी। - रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी

इस संबंध में मृतक की पत्नी और बेटा मिला था। उनकी शिकायत पर कैंट इंस्पेक्टर से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। - विशु राजा, एसडीएम सदर

जिसकी मौत हो चुकी है, उसके खिलाफ पुलिस की कार्रवाई बेहद निंदनीय है। मुचलका पाबंद करने वाले पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। मुस्तैदी दिखाने के लिए आननफानन में रिपोर्ट तैयार की गई होगी, जो पुलिस की छवि को हास्यास्पद बना रही है। सरकार कार्रवाई करे। - जेएस भाकुनी, पूर्व सैनिक

पिछले दिनों भी 27 साल पहले के मामले में एक फौजी को मुचलका पाबंद किया गया था। अब बरेली में भी ऐसा हो रहा है तो जाहिर है कि पुलिसकर्मी लापरवाही कर रहे हैं। जिसकी मौत हो चुकी है, उसके खिलाफ कार्रवाई करने का सीधा सा अर्थ है कि सिस्टम अपनी जिम्मेदारी सही से नहीं निभा रहा है। - लेफ्टिनेंट कर्नल एलके त्रिवेदी, पूर्व सैनिक

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