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World Tourism Day: रुहेलखंड में संभावनाएं अपार... पांचाल के वैभव को ढक रही अव्यवस्था की दीवार

Wed, 27 Sep 2023 06:11 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Wed, 27 Sep 2023 06:11 AM IST
सार

आंवला के रामनगर क्षेत्र में अहिच्छत्र का किला मौजूद है। इसका इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। प्राचीन काल में यह किला राजा द्रुपद की राजधानी रहा। माना जाता है कि यहां राजा द्रुपद की पुत्री द्रोपदी का स्वयंवर हुआ था। 

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World Tourism Day Ahichchhatra Fort in Ramnagar area of aonla in Bareilly
अहिच्छत्र का किला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रुहेलखंड में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन अव्यवस्था की दीवार पांचाल के वैभव को ढक रही है। पांचाल नरेश के अहिच्छत्र स्थित प्राचीन किले तक जाने के लिए पगडंडी से गुजरना पड़ता है। नाथ मंदिरों को जोड़ने के लिए कॉरिडोर के निर्माण की बात चल रही है, लेकिन इसके मूर्त रूप लेने में समय लगेगा। यहां का कण-कण महाभारत काल से जुड़ा है। 
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लीलौर झील भी अव्यवस्था की गाद से पटती जा रही है। अहिच्छत्र का जैन मंदिर धर्मावलंबियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। विश्व पर्यटन दिवस पर हम आपको रुहेलखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों से रूबरू करा रहे हैं।
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आंवला के रामनगर क्षेत्र में अहिच्छत्र का किला मौजूद है। इसका इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। प्राचीन काल में यह किला राजा द्रुपद की राजधानी रहा। पाणिनी रचित अष्टाध्यायी के टीकाकार पतंजलि ने भी अपने महाभाष्य में इसका जिक्र किया है। माना जाता है कि यहां राजा द्रुपद की पुत्री द्रोपदी का स्वयंवर हुआ था। 
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कौटिल्य के अर्थशास्त्र में इसे गणराज्य बताया गया है। अब किला खंडहर हो चुका है। भारतीय पुरातत्व विभाग इसकी देखरेख कर रहा है। रामनगर के 80 वर्षीय रामासंत ने बताया कि इस क्षेत्र में अश्वत्थामा वास करता है। शाम होने के बाद यहां लोगों को आने-जाने की मनाही है।

ऐसे पहुंचे अहिच्छत्र

सड़क और रेलमार्ग दोनों से ही यहां पहुंचा जा सकता है। बरेली से आंवला और भमोरा होते हुए रामनगर जा सकते हैं। आंवला से रामनगर की दूरी 14 किलोमीटर है। मुख्य मार्ग के अलावा कुछ दूर तक कच्चा रास्ता भी है जो पर्यटकों की परेशानी का सबब है।



जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की तपोस्थली के नाम से यह जगह देश-दुनिया में काफी मशहूर है। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर प्रांगण में एक कुआं भी है। बरेली से आंवला होते हुए रामनगर पहुंचा जा सकता है।
 

प्राचीन पार्श्वनाथ मंदिर 

यहां प्राचीन पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर है। जिसे जैन धर्मावलंबियों ने अपने प्रयासों से विकसित किया। जैन कथाकारों के मुताबिक तीर्थांकर पार्श्वनाथ ने ज्ञान प्राप्ति के लिए तपस्या की। व्यंतरवासी संवरदेव उनके ऊपर से अपना विमान नहीं ले जा सका। उसने पार्श्वनाथ की तपस्या को भंग करने की कोशिश की। तब नागराज धर्मेंद्र और रानी पद्मावती ने फन फैलाकर पार्श्वनाथ की तपस्या पूर्ण कराई। दूसरी मान्यता के मुताबिक महात्मा बुद्ध ने यहां नाग राजाओं को उपदेश देकर बौद्ध धर्म की दीक्षा दी थी। 



आंवला तहसील क्षेत्र में स्थित लीलौर झील महाभारत काल में यक्ष के सवालों की साक्षी रही पर वर्तमान में यह सूखने लगी है। ध्यान न दिए जाने से इसकी दशा खराब हुई है। पर्यटन विभाग ने अब भी इसकी सुध नहीं ली है। कम पर्यटन वाले स्थानों पर विभाग इस समय ध्यान नहीं दे रहा है। आंवला पहुंचने के बाद आप बस या ऑटो की मदद से इस जगह पर पहुंच सकते हैं।


थीम पार्क

रामनगर में ही अहिच्छत्र से जुड़ा एक थीम पार्क है। पार्क के बीच स्वयंवर जीतने के लिए मछली की आंख पर निशाना लगाते अर्जुन की एक मूर्ति बनाई गई है। जिसमें द्रौपदी के स्वयंवर को संजीवता दी गई है। पर्यटन विभाग ने थीम पार्क को दस वर्ष  पहले दो करोड़ की लागत से विशेष तौर पर पर्यटकों के लिए विकसित किया था। अब इस थीम पार्क की देखरेख जैन मंदिर के आधीन है। 

चौबीसी मंदिर
रामनगर में चौबीसी मंदिर भी हैं। मंदिर की चोटी और बगीचा भी पर्यटकों को खूब लुभाता है।



 
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