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बेसिक स्कूल का भारी-भरकम गेट और पिलर गिरने से मासूम की दबकर मौत

Fri, 31 Dec 2021 01:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 31 Dec 2021 01:17 AM IST
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The heavy gate and pillar of the basic school collapsed, causing the death of the innocent
अखिलेश (फाइल फोटो)
भुता के गांव बरुआ हुसैनपुर में हुआ दर्दनाक हादसा, 20 दिन पहले ही बेहद घटिया ढंग से कराया गया था निर्माण
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स्कूल की छुट्टी के बाद हुआ हादसा वर्ना और बच्चे आ सकते थे चपेट में
पढ़ने के लिए नहीं बुला सके अफसर, मौत खींच लाई
भुता। गांव बरुआ हुसैनपुर के प्राइमरी स्कूल के पड़ोस में रहने वाला छह वर्षीय मासूम स्कूल चलो अभियान में पढ़ाई के लिए तो नहीं बुलाया जा सका लेकिन मौत उसे खींचकर स्कूल तक ले गई। बेहद लापरवाही से बनाया गया स्कूल का गेट और दीवार गिरने से वहां खेल रहा यह मासूम भारी मलबे में दब गया और बाहर निकाले जाने तक उसने दम तोड़ दिया।
गनीमत रही कि हादसा दोपहर करीब तीन बजे तब हुआ जब स्कूल बंद हो चुका था वर्ना शायद कई और मासूमों की जिंदगी खतरे में पड़ जाती। हादसे में जान गंवाने वाला मासूम अखिलेश स्कूल के पड़ोस में ही रहने वाले मजदूर पुष्पेंद्र कश्यप का बेटा जो स्कूल गेट के पास खेलने आ गया था। अचानक स्कूल का कई क्विंटल भारी लोहे का गेट दीवार और पिलर समेत धराशायी हो गया और अखिलेश उसके मलबे में दब गया।
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कुछ दूर सड़क का निर्माण कर रहे मजदूरों ने यह हादसा देखा तो दौड़कर मलबा हटाने के बाद मासूम को निकाला लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। घटना के बाद बच्चे के परिवार वालों गांव के सैकड़ों लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई। लोगों ने बच्चों की जिंदगी को खतरे में डालकर घटिया निर्माण कराए जाने पर गुस्सा भी जताया।
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प्रधान ने बनवाया घटिया गेट अफसरों ने रोका न टोका
गांव वालों के मुताबिक स्कूल की चहारदीवारी और गेट का नौ-दस साल पहले निर्माण कराया गया था लेकिन पिछले दिनों स्कूल परिसर में इंटरलॉकिंग कराने के लिए ग्राम प्रधान ने ट्रैक्टर-ट्रॉली को अंदर तक ले जाने के लिए गेट और उसके आसपास की चहारदीवारी को तुड़वा दिया। करीब 20 दिन पहले प्रधान ने इसे दोबारा बनवाया लेकिन पिलर में न सरिया का इस्तेमाल किया गया न कंक्रीट का। ग्राम प्रधान ने बुनियाद खुदवाकर पिलर का फाउंडेशन भी बनवाने की जरूरत नहीं समझी और जमीन की सतह से ही ईंटों को चुनवाकर बनाए गए पिलर पर भारी-भरमक लोहे का गेट लगवा दिया जिसका वजन पिलर बर्दाश्त नहीं कर सके और मासूम अखिलेश के ऊपर गिर गए।
गांव वाले बोले- प्रधान, सचिव और बेसिक शिक्षा के अफसर जिम्मेदार
हादसे के बाद लोगों में भारी गुस्सा नजर आया। खासतौर पर वे लोग इस घटना पर बेहद नाराज थे जिनके बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं। गांव वालों ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव ने बच्चों की जान की परवाह किए बगैर घटिया सामान से गेट का निर्माण करा दिया। अगर हादसा स्कूल बंद होने के बाद न होता तो पता नहीं कितने बच्चों की जान चली जाती।

बीएसए का जवाब... स्कूल में नहीं पढ़ता था बच्चा
स्कूलों में किसी भी निर्माण की गुणवत्ता की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों की होती है लेकिन बीएसए विनय कुमार ने घटना के बाद यह कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की कि स्कूल में ग्राम प्रधान निर्माण करा रहे थे और जिस बच्चे की मृत्यू हुई है, वह स्कूल का छात्र नहीं था। स्कूल की प्रधानाध्यापक लक्ष्मी देवी ने भी यह कहकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की कुछ दिन पहले स्कूल की छुट्टियों के दौरान ग्राम प्रधान ने मुख्य द्वार का दोबारा निर्माण करा दिया था। ग्राम पंचायत सचिव दानिश खान का कहना था कि स्कूल में इंटरलॉकिंग हुई थी। इसी बीच ट्रैक्टर की टक्कर से गेट का पिलर गिर गया था। इसका दोबारा निर्माण कराने के लिए कोई एस्टिमेट मंजूर नहीं किया गया। न गेट बनवाने की कार्य योजना बनी। ग्राम प्रधान ने सहानुभूति के तौर पर उसका निर्माण कराया था। इससे पहले देर शाम बीएसए विनय कुमार और डीपीआरओ धर्मेंद्र कुमार ने गांव पहुंचकर घटना की जानकारी ली। पीड़ित परिवार को घटना की जांच कराने का आश्वासन देकर दोनों अफसर लौट आए।
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