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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   The family of mosquitoes flourishing in Mirganj and Shergarh

Bareilly News: मीरगंज और शेरगढ़ में पनप रहा मच्छरों का कुनबा

Tue, 25 Apr 2023 01:53 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 25 Apr 2023 01:53 AM IST
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The family of mosquitoes flourishing in Mirganj and Shergarh
बरेली। करीब चार साल बाद भले ही जिला मलेरिया प्रभावित की अतिसंवेदनशील सूची से बाहर हो गया हो, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। पूर्व में बतौर हॉटस्पॉट बने इलाके अब मलेरिया से मुक्त हैं, लेकिन पिछले साल से ही मीरगंज और शेरगढ़ में मलेरिया के वाइवैक्स और फेल्सीपेरम मच्छरों का कुनबा बढ़ रहा है। सर्वाधिक केस इसी इलाके में मिलने से स्वास्थ्य विभाग रोकथाम की तैयारियाें में जुट गया है।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार करीब चार साल पहले साल 2019 में 46717 मलेरिया पीड़ित मिले थे। प्रदेश में सर्वाधिक केस होने की वजह से बरेली अतिसंवेदनशील जिलों की सूची में दर्ज हो गया था। उस दौरान मझगवां, आंवला, रामनगर और भमोरा सर्वाधिक प्रभावित इलाका रहा था। स्वास्थ्य विभाग समेत एम्बेड, पाथ संस्था ने इन इलाकों में मलेरिया का प्रकोप रोकथाम के लिए जनजागरूकता, जांच, इलाज और स्वच्छता आदि मुहिम चलाई थी। नतीजा, साल 2020 में दिखा। जब इन इलाकों में मलेरिया के केस 95 फीसदी कम हो गए थे, लेकिन अब मीरगंज और शेरगढ़ हॉटस्पॉट बन रहे हैं। इसे देखते हुए इन इलाकों की आशा कार्यकर्ताओं के जरिए मलेरिया पीड़ित मरीजों की स्लाइड बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। स्क्रीनिंग बढ़ा दी है।
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किस वर्ष किस इलाके में कितने मिले केस
रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018, 2019, 2020, 2021, 2022 में मझगंवा में 9607, 10980, 2009, 870, 434 केस मिले थे। क्रमवार आंवला में 6287, 8113, 1702, 634, 311 केस, रामनगर में 5910, 5872, 1101, 192, 102 केस मिले थे। वहीं, अब मीरगंज में 192, 102, 201, 501, 749 केस और शेरगढ़ में 89, 101, 157, 202, 409 केस मिल चुके हैं। साल 2023 में बढ़ते केस रोकने की कवायद चल रही है।
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संचारी रोग नियंत्रण के तहत कर रहे जागरूक
सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह का कहना है कि पिछले सालों की अपेक्षा जनसहयोग और विभाग की मुस्तैदी से मलेरिया के मामले करीब 95 फीसदी से ज्यादा कम हो गए हैं। जिन इलाकों में केस पिछले साल ज्यादा रहे वहां पर रोकथाम के प्रयास किए जा रहे हैं। संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के दौरान लोगों को मच्छरजनित रोगों से बचाव और इलाज के बारे में जागरूक किया जा रहा है। ताकि रोग का प्रयास न हो सके।
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