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Bareilly News: बॉम्बे हाईकोर्ट में महाधिवक्ता ने रखा राज्य सरकार का पक्ष, अब अलकेमिस्ट की बारी
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बरेली। फतेहगंज पश्चिमी में बंद पड़ी रबर फैक्टरी की बेशकीमती जमीन पर मालिकाना हक (पुनर्प्रवेश) को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में बृहस्पतिवार को पहली बार राज्य सरकार का पक्ष सुना गया। प्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने मजबूती से अपना पक्ष रखा। अब 15 फरवरी को अलकेमिस्ट का पक्ष सुना जाएगा। दोनों पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट से फैसले की उम्मीद है।
साल 2020 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बंद पड़ी रबर फैक्टरी के वाद में अलकेमिस्ट असेस्ट रिकंसट्रक्शन कंपनी के हक में फैसला सुनाया था। वादी अल केमिस्ट ने फैक्टरी की 1380.23 एकड़ भूमि, प्लांट, भवन, मशीनें आदि पर दावा किया था। बाम्बे हाईकोर्ट ने आठ सप्ताह में रबर फैक्टरी की जमीन पर कब्जा देने का आदेश दिया था।
14 दिसंबर 2020 तक फैक्टरी की सारी संपत्ति सौंपा जानी थी। आदेश का अनुपालन शुरू हुआ, लेकिन तीन हजार वर्ग मीटर जमीन हस्तांतरित होने के बाद जमीन का बड़ा हिस्सा अवैध कब्जों में होने से प्रक्रिया थम गई। इससे पहले ही प्रदेश सरकार बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गई।
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हाईकोर्ट में प्रकरण की सुनवाई शुरू होती, इससे पहले ही कोरोना महामारी हावी हो गई। अक्तूबर 2022 में हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार का पक्ष सुनने को कहा। क्रमवार नवंबर, दिसंबर, जनवरी में चार और सुनवाई की तिथि मिली थीं जो टल गई। इससे अफसर और फैक्टरी कर्मचारी निराश होने लगे।
साढ़े तीन घंटे तक हाईकोर्ट में रखा गया राज्य सरकार का पक्ष
बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे सुनवाई शुरू हुई। महाधिवक्ता ने साढ़े तीन घंटे तक लगातार राज्य सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने विभिन्न बिंदुओं पर सटीक बहस की। राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद शाम साढ़े पांच बजे हाईकोर्ट ने अलकेमिस्ट का पक्ष सुनने के लिए बुलाया, लेकिन शाम होने की वजह से 15 फरवरी को सुनवाई की तिथि निर्धारित कर दी गई।
सवैतनिक अवकाश के आदेश पर बंद हुई थी फैक्ट्री
16 जुलाई 1999 को फैक्टरी मालिकों की ओर से सभी कर्मचारियों को सवैतनिक अवकाश की सार्वजनिक सूुचना जारी हुई थी। इसी आदेश के साथ बंद हुई रबर फैक्टरी के कर्मचारियों को वेतन और पीएफ लाभ नहीं मिला। फैक्टरी प्रबंधन पर 1432 कर्मचारियों का करीब चार सौ करोड़ रुपये बकाया है।
इसके भुगतान के लिए कर्मचारियों का अलग मामला चल रहा है। पिछले दिनों हाईकोर्ट के लिक्विडेटर ने सभी कर्मचारियों के दस्तावेज मांगे थे, जिसे कर्मचारी यूनियन के महामंत्री अशोक मिश्रा ने सौंप दिए हैं। उन्होंने प्रत्येक दशा में कर्मचारियों का हक मिलने की बात कही है।
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साल 2020 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बंद पड़ी रबर फैक्टरी के वाद में अलकेमिस्ट असेस्ट रिकंसट्रक्शन कंपनी के हक में फैसला सुनाया था। वादी अल केमिस्ट ने फैक्टरी की 1380.23 एकड़ भूमि, प्लांट, भवन, मशीनें आदि पर दावा किया था। बाम्बे हाईकोर्ट ने आठ सप्ताह में रबर फैक्टरी की जमीन पर कब्जा देने का आदेश दिया था।
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14 दिसंबर 2020 तक फैक्टरी की सारी संपत्ति सौंपा जानी थी। आदेश का अनुपालन शुरू हुआ, लेकिन तीन हजार वर्ग मीटर जमीन हस्तांतरित होने के बाद जमीन का बड़ा हिस्सा अवैध कब्जों में होने से प्रक्रिया थम गई। इससे पहले ही प्रदेश सरकार बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गई।
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हाईकोर्ट में प्रकरण की सुनवाई शुरू होती, इससे पहले ही कोरोना महामारी हावी हो गई। अक्तूबर 2022 में हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार का पक्ष सुनने को कहा। क्रमवार नवंबर, दिसंबर, जनवरी में चार और सुनवाई की तिथि मिली थीं जो टल गई। इससे अफसर और फैक्टरी कर्मचारी निराश होने लगे।
साढ़े तीन घंटे तक हाईकोर्ट में रखा गया राज्य सरकार का पक्ष
बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे सुनवाई शुरू हुई। महाधिवक्ता ने साढ़े तीन घंटे तक लगातार राज्य सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने विभिन्न बिंदुओं पर सटीक बहस की। राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद शाम साढ़े पांच बजे हाईकोर्ट ने अलकेमिस्ट का पक्ष सुनने के लिए बुलाया, लेकिन शाम होने की वजह से 15 फरवरी को सुनवाई की तिथि निर्धारित कर दी गई।
सवैतनिक अवकाश के आदेश पर बंद हुई थी फैक्ट्री
16 जुलाई 1999 को फैक्टरी मालिकों की ओर से सभी कर्मचारियों को सवैतनिक अवकाश की सार्वजनिक सूुचना जारी हुई थी। इसी आदेश के साथ बंद हुई रबर फैक्टरी के कर्मचारियों को वेतन और पीएफ लाभ नहीं मिला। फैक्टरी प्रबंधन पर 1432 कर्मचारियों का करीब चार सौ करोड़ रुपये बकाया है।
इसके भुगतान के लिए कर्मचारियों का अलग मामला चल रहा है। पिछले दिनों हाईकोर्ट के लिक्विडेटर ने सभी कर्मचारियों के दस्तावेज मांगे थे, जिसे कर्मचारी यूनियन के महामंत्री अशोक मिश्रा ने सौंप दिए हैं। उन्होंने प्रत्येक दशा में कर्मचारियों का हक मिलने की बात कही है।