फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Take back the land of rubber factory and use it in public interest

रबर फैक्टरी की जमीन वापस लेकर जनहित में हो इसका इस्तेमाल

Sat, 26 Dec 2020 12:34 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 26 Dec 2020 12:34 AM IST
विज्ञापन
Take back the land of rubber factory and use it in public interest
रबर फैक्टरी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

विधिक राय लेकर मय प्रमाणों के शासन को भेजी रिपोर्ट, जमीन का सामाजिक-शैक्षिक और औद्योगिक इस्तेमाल जरूरी बताया

विज्ञापन
बरेली। पैरवी की कमी की वजह से रबर फैक्टरी की 1380 एकड़ जमीन निजी हाथों में जाने का रास्ता साफ होने का मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद अफसर जाग गए हैं। एक बार फिर रबर फैक्टरी की जमीन को राज्य सरकार के स्वामित्व में लाने की तैयारी शुरू हो गई है। डीएम ने जरूरी प्रमाणों के साथ शासन को भेजी रिपोर्ट में साफ किया है कि रबर फैक्टरी को इस शर्त पर जमीन दी गई थी कि उद्योग बंद होते ही वह राज्य सरकार के स्वामित्व में वापस हो जाएगी।
रबर फैक्टरी को बंद हुए 21 साल गुजर चुके हैं। इस बीच कई बार उसकी जमीन को सरकारी स्वामित्व में लेने की कवायद हुई लेकिन अफसरों ने इसे कागजी खानापूरी से आगे नहीं बढ़ने दिया। 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की ओर से इस जमीन पर इंडस्ट्रियल हब बनाने के लिए लिखा-पढ़ी की तो शासन ने अफसरों को जमीन को राज्य सरकार के स्वामित्व में लेने के लिए पैरवी करने को कहा लेकिन अफसरों की बेपरवाही की वजह से इसका कोई बेहतर नतीजा सामने नहीं आ सका। कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्रकरण में गंभीरता दिखाई तो शासन ने रबर फैक्टरी की जमीन को राज्य सरकार के स्वामित्व में लेने के लिए कानूनी पैरवी करने को तीन सितंबर को वरिष्ठ आईएएस अफसर मुथु कुमार सामी को नोडल अफसर नामित किया।
विज्ञापन

शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नोडल अफसर मुथु कुमार स्वामी न तो एक दिन भी बरेली आए न ही कोई विचार विमर्श किया। नोडल अफसर के इस प्रकरण में दिलचस्पी न लेने पर केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने फिर शिकायत की तो फैक्टरी की जमीन की नापजोख हुई। फैक्टरी को सशर्त 1380.23 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई थी लेकिन नापजोख में 1232.79 एकड़ जमीन ही पाई गई। पता चला कि करीब सौ एकड़ जमीन बीएसएफ और करीब 9.37 हेक्टेयर जमीन एनएचआई को दी जा चुकी है। इसका प्रतिकर के तौर पर करीब 4.22 करोड़ रुपया भी सरकार को मिला था जो अब भी भूमि अध्यापित अधिकारी के संयुक्त खाते में जमा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विधिक राय: किसी भी सामाजिक उपयोग के लिए जमीन वापस ले सकती है सरकार

डीएम नितीश कुमार ने शासन से निर्देश आने के बाद रबर फैक्टरी के सभी रिकॉर्ड और फाइल का अध्ययन करने के लिए कई वरिष्ठ अफसरों को लगाया था। उनकी रिपोर्ट मिलने के बाद जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व से भी विधिक राय ली गई। सूत्रों के मुताबिक शासकीय अधिवक्ता ने अभिलेख और अनुबंध की शर्त के आधार पर रिपोर्ट दी कि रबर फैक्टरी को दी गई भूमि राज्य सरकार किसी सामाजिक उपयोग के लिए वापस ले सकती है। इसके बाद डीएम ने अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास को पत्र लिखा जिसमें आग्रह किया कि बरेली में आईटीआर जैसे उद्योग बंद होने से रोजगार का संकट है। जिले में कई उद्योगों की जरूरत है। सरकारी मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए भी जमीन उपलब्ध नहीं है। इसलिए रबर फैक्टरी की जमीन वापस लेकर सामाजिक, शैक्षिक और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किया जाना उचित होगा।

किसान सम्मेलन में आए सीएम से की थी शिकायत

हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के किसान सम्मेलन में बरेली आने पर केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, विधायक बहोरन लाल मौर्य, डॉ. डीसी वर्मा और डॉ. अरुण कुमार ने रबर फैक्टरी का मसला उनके सामने उठाया था। कहा था, जमीन पर सरकार कब्जा लेकर इंडस्ट्रियल हब, मेडिकल कॉलेज बना सकती है। इससे औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने के साथ हजारों लोगों को रोजगार भी मिलेगा। अफसरों की ओर से इस प्रकरण में पैरवी न करने की भी शिकायत की गई थी।

3.10 लाख रुपये में दे दी गई थी जमीन

उच्चाधिकारियों के निर्देश पर मीरगंज और सदर के एसडीएम ने रबर फैक्टरी भूमि की मौजूदा स्थिति की नापजोख कराई थी। इसी के आधार पर डीएम ने शासन को रिपोर्ट भेजी है। इसमें मौके पर 1232.79 एकड़ भूमि दिखाई गई है जिसमें 460.92 एकड़ भूमि ग्राम समाज और काश्तकारों से अधिगृहीत की हुई 771.87 एकड़ भूमि पाई गई। तत्कालीन शासन और प्रशासन ने 1380.23 एकड़ जमीन कंपनी को 309554.80 रुपये में सशर्त दी थी।

जमीन पर कब्जा दिलाने की प्रक्रिया अटकी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 19 अक्तूबर को अलकेमिस्ट एसेट्स कंस्ट्रक्शन कंपनी के पक्ष में रिसीवर को आदेश दिया था कि उसे रबर फैक्टरी की 1380.23 एकड़ जमीन पर कब्जा दिलाया जाए। हाईकोर्ट ने इसके साथ सिंथेटिक केमिकल की गुजरात में स्थित संपत्ति पर भी 14 दिसंबर तक कब्जा दिलाने के आदेश दिए थे। रिसीवर एनवी ठक्कर ने गुजरात की संपत्ति पर तो कब्जा दिला दिया लेकिन रबर फैक्टरी की भूमि पर कब्जा दिलाने का मामला लंबित है। बताते हैं कि हाईकोर्ट के आदेश में जितनी जमीन पर कब्जा दिलाने को कहा गया है, उतनी मौके पर नहीं है। सूत्रों के मुताबिक रिसीवर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है कि संबंधित पक्षकार ने पूरे तथ्यों के साथ मामला नहीं रखा था। इसके साथ उप्र सरकार का पक्ष भी सुना जाना चाहिए। बताया जा रहा है कि पांच जनवरी तक हाईकोर्ट में अवकाश है। अब न्यायालय खुलने पर ही कोई फैसला हो सकेगा।

जमीन की नापजोख और मौजूदा स्थिति का अध्ययन कराने के साथ विधिक राय लेकर शासन को रिपोर्ट भेज दी है। जो निर्देश मिलेंगे, उनका पालन कराया जाएगा। जमीन - नितीश कुमार, डीएम

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed