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उत्पादन और रिकवरी बढ़ाकर यूपी को बनाएंगे नंबर वन
बरेली
Updated Wed, 08 Jul 2015 12:44 AM IST
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बरेली। प्रदेश में गन्ना उत्पादन और शुगर रिकवरी बढ़ाने की कोशिश कामयाब होते दिख रही है। बीते दो साल में प्रदेश में गन्ना उत्पादन और प्रति क्विंटल शुगर रिकवरी अप्रत्याशित रुप से बढ़ी है। सूबे में करीब 25 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना होता है। पहले उत्पादन 570 क्विंटल प्रति हेक्टेयर था, जो दो साल में 651 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक आ गया है। यही नहीं, इस दौरान शुगर रिकवरी 9.07 किलो प्रति क्विंटल से 9.55 तक आ गई है।
इस बढ़त से 700 क्विंटल उत्पादन और 9.5 किलो परता वाले पंजाब, 800 क्विंटल उत्पादन तथा 9.4 किलो परता वाले हरियाणा और 1000 क्विंटल उत्पादन तथा 9 किलो परता वाले तमिलनाडु को अपना ताज सरकता दिख रहा है। अगला लक्ष्य दस किलो से ज्यादा परता देने वाले महाराष्ट्र को पीछे छोड़ने का है। दरअसल, महाराष्ट्र की सस्ती चीनी यूपी का खेल बिगाड़ देती है। नए चरण में खास प्रजातियों के गन्ने की बुवाई, बीमारियों की निगरानी और निदान तथा चीनी मिलों को ज्यादा पेराई के लिए प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा है।
--इनसेट---
ये प्रजातियां करेंगी सपना साकार
कोयंबटूर संस्थान की प्रजाति सीओ-0238 और 0239 और सीओ-0118 को रुहेलखंड में बड़े पैमाने पर बोया गया है। इनका उत्पादन 81 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर तक तो शुगर रिकवरी नवंबर में पेराई पर 11.82, जनवरी में 13.28 और मार्च में 13.89 किलो प्रति क्विंटल है। शाहजहांपुर शोध संस्थान के प्रसार अधिकारी राजेंद्र मिश्र बताते हैं कि शाहजहांपुर केंद्र की कोसा-08279 और 8432 प्रजाति भी सर्वाधिक परता 13.77 तक देने वाली हैं। वे कहते हैं कि बरसात में कीटों से गन्ने का बचाव बड़ी चुनौती है। पायरिला का प्रकोप बारिश से खत्म हो चुका है। दूसरे फंगस लगने पर किसान गन्ना समिति की मदद से तत्काल निदान करें। किसान शोध केंद्र के हेल्पलाइन नंबर 05842-222509 पर भी सलाह ले सकते हैं।
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--कोट---
गन्ना उत्पादन में कई मायने में हम अभी भी शीर्ष पर हैं। मसलन तमिलनाडु का प्रति क्विंटल उत्पादन ज्यादा है पर हमारा लखीमपुर खीरी जिला ही तमिलनाडु से ज्यादा चीनी उत्पादन देता है। यूपी में बाकी उद्योगों का हाल बुरा है। ऐसे में सरकार शुगर इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के मूड में है। किसानों को प्रोत्साहन और मिलों की समस्याएं दूर करके हम यूपी को गन्ना उत्पादन का सरताज बनाकर रहेंगे।
- सुभाष चंद्र शर्मा, गन्ना आयुक्त उप्र
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इस बढ़त से 700 क्विंटल उत्पादन और 9.5 किलो परता वाले पंजाब, 800 क्विंटल उत्पादन तथा 9.4 किलो परता वाले हरियाणा और 1000 क्विंटल उत्पादन तथा 9 किलो परता वाले तमिलनाडु को अपना ताज सरकता दिख रहा है। अगला लक्ष्य दस किलो से ज्यादा परता देने वाले महाराष्ट्र को पीछे छोड़ने का है। दरअसल, महाराष्ट्र की सस्ती चीनी यूपी का खेल बिगाड़ देती है। नए चरण में खास प्रजातियों के गन्ने की बुवाई, बीमारियों की निगरानी और निदान तथा चीनी मिलों को ज्यादा पेराई के लिए प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा है।
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--इनसेट---
ये प्रजातियां करेंगी सपना साकार
कोयंबटूर संस्थान की प्रजाति सीओ-0238 और 0239 और सीओ-0118 को रुहेलखंड में बड़े पैमाने पर बोया गया है। इनका उत्पादन 81 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर तक तो शुगर रिकवरी नवंबर में पेराई पर 11.82, जनवरी में 13.28 और मार्च में 13.89 किलो प्रति क्विंटल है। शाहजहांपुर शोध संस्थान के प्रसार अधिकारी राजेंद्र मिश्र बताते हैं कि शाहजहांपुर केंद्र की कोसा-08279 और 8432 प्रजाति भी सर्वाधिक परता 13.77 तक देने वाली हैं। वे कहते हैं कि बरसात में कीटों से गन्ने का बचाव बड़ी चुनौती है। पायरिला का प्रकोप बारिश से खत्म हो चुका है। दूसरे फंगस लगने पर किसान गन्ना समिति की मदद से तत्काल निदान करें। किसान शोध केंद्र के हेल्पलाइन नंबर 05842-222509 पर भी सलाह ले सकते हैं।
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--कोट---
गन्ना उत्पादन में कई मायने में हम अभी भी शीर्ष पर हैं। मसलन तमिलनाडु का प्रति क्विंटल उत्पादन ज्यादा है पर हमारा लखीमपुर खीरी जिला ही तमिलनाडु से ज्यादा चीनी उत्पादन देता है। यूपी में बाकी उद्योगों का हाल बुरा है। ऐसे में सरकार शुगर इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के मूड में है। किसानों को प्रोत्साहन और मिलों की समस्याएं दूर करके हम यूपी को गन्ना उत्पादन का सरताज बनाकर रहेंगे।
- सुभाष चंद्र शर्मा, गन्ना आयुक्त उप्र