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Bareilly News: कक्षा तीन से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तार्किक सोच का पाठ पढ़ेंगे विद्यार्थी
Wed, 15 Apr 2026 12:33 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Wed, 15 Apr 2026 12:33 AM IST
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बरेली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्कूली शिक्षा के ढांचे में एक बड़ा बदलाव करते हुए कक्षा तीन से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर आधारित नया पाठ्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया है। इस नवाचार का मुख्य उद्देश्य बच्चों में शुरुआत से ही समस्याओं को सुलझाने की क्षमता, तार्किक चिंतन और तकनीकी कौशल को विकसित करना है, ताकि वह भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।
बोर्ड की ओर से निर्धारित की गई नई रूपरेखा के तहत कक्षा तीन से पांच तक के बच्चों को हर साल 50 घंटे का शिक्षण दिया जाएगा। इसमें कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को गणित जैसे विषयों के साथ जोड़कर पढ़ाया जाएगा। वहीं, कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए वार्षिक 100 घंटे तय किए गए हैं, जिसके अंतर्गत वे एआई की बुनियादी जानकारी के साथ-साथ विभिन्न प्रोजेक्ट्स पर भी काम करेंगे।
इस नई शिक्षा पद्धति में किताबी ज्ञान के बजाय गतिविधियों, अनुभवों और प्रोजेक्ट आधारित पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि सीखना अधिक व्यावहारिक और रोचक बन सके। सीबीएसई की सिटी कोऑर्डिनेटर ममता सक्सेना ने बताया कि इस पाठ्यक्रम की सफलता में स्कूलों के नेतृत्व की भूमिका सबसे अहम रहेगी।
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उन्होंने जोर दिया कि स्कूल प्रमुखों के मार्गदर्शन में ही नवाचार और सहयोगात्मक शिक्षा को धरातल पर उतारा जा सकेगा। साथ ही, बच्चों को एआई के नैतिक उपयोग के प्रति जागरूक करना भी इस पहल का एक अनिवार्य हिस्सा होगा।
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बोर्ड की ओर से निर्धारित की गई नई रूपरेखा के तहत कक्षा तीन से पांच तक के बच्चों को हर साल 50 घंटे का शिक्षण दिया जाएगा। इसमें कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को गणित जैसे विषयों के साथ जोड़कर पढ़ाया जाएगा। वहीं, कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए वार्षिक 100 घंटे तय किए गए हैं, जिसके अंतर्गत वे एआई की बुनियादी जानकारी के साथ-साथ विभिन्न प्रोजेक्ट्स पर भी काम करेंगे।
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इस नई शिक्षा पद्धति में किताबी ज्ञान के बजाय गतिविधियों, अनुभवों और प्रोजेक्ट आधारित पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि सीखना अधिक व्यावहारिक और रोचक बन सके। सीबीएसई की सिटी कोऑर्डिनेटर ममता सक्सेना ने बताया कि इस पाठ्यक्रम की सफलता में स्कूलों के नेतृत्व की भूमिका सबसे अहम रहेगी।
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उन्होंने जोर दिया कि स्कूल प्रमुखों के मार्गदर्शन में ही नवाचार और सहयोगात्मक शिक्षा को धरातल पर उतारा जा सकेगा। साथ ही, बच्चों को एआई के नैतिक उपयोग के प्रति जागरूक करना भी इस पहल का एक अनिवार्य हिस्सा होगा।