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वर्ल्ड क्लास रिसर्च जरनल्स पढ़ सकेंगे विवि के छात्र
बरेली।
Updated Mon, 09 Oct 2017 02:05 AM IST
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इंजीनियरिंग में रिसर्च वर्क को बढ़ावा देने के लिए एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय छात्रों को वर्ल्ड क्लास रिसर्च जरनल्स मुहैया कराएगा। छात्र यह जनरल्स ऑनलाइन एक्सेस कर सकेंगेे। टेक्निकल एजूकेशन क्वालिटी इंप्रवूमेंट प्रोग्राम (टेक्यूप-3) के तहत तीन चरणों में लाइब्रेरी को और बेेहतर करने का प्लान तैयार किया गया है, इसमें वर्ल्ड क्लास रिसर्च जनरल को प्राथमिकता में लिया गया है।
इंजीनियरिंग में अब रिसर्च वर्क को भी प्राथमिकता दी जाती है। एक टॉपिक पर छात्रों को रिसर्च वर्क भी करना होता है। अच्छे रिसर्च होंगे तो छात्र उनकी मदद से अच्छे रिसर्च भी कर सकेंगे। इसके अलावा आईटी की केंद्रीय पुस्तकालय के साथ डिपार्टमेंटल लाइब्रेरी बनाने की तैयारी है। हालांकि यह प्रक्रिया राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत भी चल रही है। टेक्यूप के बजट से करीब डेढ़ करोड़ रुपये किताबों पर खर्च किए जाएंगे। इस बार ई-बुक्स नहीं बढ़ाई जाएंगी। शिक्षकों का मानना है कि छात्र ई-बुक्स मन से नहीं पढ़ते, इसलिए फिजिकल बुक्स की संख्या बढ़ाई जाएगी।
अधर में लटक गईं रूसा की डिपार्टमेंट लाइब्रेरी
रूसा के बजट से करीब दो करोड़ की लागत से विभागों में लाइब्रेरी स्थापित होनी थी। एक साल से ज्यादा इस प्रक्रिया को हो गया, लेकिन अभी तक किताबें नहीं खरीदी जा सकीं। विभागों में समितियां भी बनाई गईं थी और किताबों की सूची भी तैयार कर कोआर्डिनेटर को दी गई। विभागों और विश्वविद्यालय प्रशासन की खींचतान में प्रक्रिया ही अधर में लटक गई है।
इंजीनियरिंग में अब रिसर्च वर्क को भी प्राथमिकता दी जाती है। एक टॉपिक पर छात्रों को रिसर्च वर्क भी करना होता है। अच्छे रिसर्च होंगे तो छात्र उनकी मदद से अच्छे रिसर्च भी कर सकेंगे। इसके अलावा आईटी की केंद्रीय पुस्तकालय के साथ डिपार्टमेंटल लाइब्रेरी बनाने की तैयारी है। हालांकि यह प्रक्रिया राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत भी चल रही है। टेक्यूप के बजट से करीब डेढ़ करोड़ रुपये किताबों पर खर्च किए जाएंगे। इस बार ई-बुक्स नहीं बढ़ाई जाएंगी। शिक्षकों का मानना है कि छात्र ई-बुक्स मन से नहीं पढ़ते, इसलिए फिजिकल बुक्स की संख्या बढ़ाई जाएगी।
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अधर में लटक गईं रूसा की डिपार्टमेंट लाइब्रेरी
रूसा के बजट से करीब दो करोड़ की लागत से विभागों में लाइब्रेरी स्थापित होनी थी। एक साल से ज्यादा इस प्रक्रिया को हो गया, लेकिन अभी तक किताबें नहीं खरीदी जा सकीं। विभागों में समितियां भी बनाई गईं थी और किताबों की सूची भी तैयार कर कोआर्डिनेटर को दी गई। विभागों और विश्वविद्यालय प्रशासन की खींचतान में प्रक्रिया ही अधर में लटक गई है।
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