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संक्रमितों के घरों पर अब नहीं लग रहे स्टीकर, अफसर बच्चों और बारिश पर मढ़ रहे तोहमत

Fri, 10 Jul 2020 01:33 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jul 2020 01:33 AM IST
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Stickers, officers, children and rain are no longer able to put stickers on infected homes
गली-मोहल्लों में सर्वे करतीं आशाएं। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

आशाओं के मुताबिक, चस्पा करने को कम पड़े स्टीकर, चॉक से चल रहा अभियान

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बरेली। संक्रमितों के परिजन, प्रवासियों और विदेश से लोगों को होम क्वारंटीन कराने के बाद उनके घरों पर चस्पा किए जा रहे स्टीकर ही कम पड़ गए हैं। स्टीकर न लगने से संदिग्ध संक्रमित दूसरे लोगों के लिए खतरा बन सकते हैं। संक्रमण से बचाव के लिए चल रहा जागरूकता अभियान भी कारगर साबित नहीं होगा। इस मामले पर अफसरों का कहना है कि बच्चे स्टीकर फाड़ देते हैं। बारिश से भी स्टीकर बेकार हो रहे हैं।
यूनिसेफ के जिला समन्वयक इरशाद के मुताबिक, कंटेन्मेंट जोन समेत जिले भर में सर्वे का काम आशा वर्कर कर रही हैं। आशाओं के सर्वे की रिपोर्ट प्रतिदिन शासन को भेजी जा रही है। अब तक हुई मॉनिटिंरग में करीब 95 फीसदी घरों पर स्टीकर या चॉक से सर्वे क्रमांक लिखा हुआ मिला है। उन्होंने बताया कि स्टीकर की गुणवत्ता ठीक नहीं है। उसमें लगा गोंद खराब है, इसलिए स्टीकर सही से चिपक नहीं रहे हैं। कई घरों पर स्टीकर चस्पा नहीं हो पा रहे हैं। जहां स्टीकर चस्पा भी किए हैं, वहां बच्चे उन्हें फाड़ दे रहे हैं। बारिश से भी स्टीकर छूट जाते हैं।
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खानापूर्ति: सर्वे में नहीं मिल रहे हैं संदिग्ध

कंटेन्मेंट जोन और जिले भर में चल रहे सर्वे की जिम्मेदारी आशा वर्कर को सौंपी गई है। रिकॉर्ड के मुताबिक, अब तक करीब ढाई लाख लोगों का सर्वे हो चुका है, लेकिन इनमें से महज 44 लोगों के ही सैंपल लिए गए। आशाओं का कहना है कि सर्वे के बाद सैंपलिंग के लिए भेजे जा रहे संदिग्धों को लौटा दिया जाता है। गुरुवार को छह ब्लॉकों से आशाओं ने संदिग्धों को भेजा मगर बगैर सैंपलिंग के ही उन्हें वापस कर दिया गया। आशा वर्कर जिस कंटेन्मेंट जोन यानी संदिग्ध क्षेत्र में सर्वे कर रही हैं, उनके लोगों की सैंपलिंग में भी विभाग लापरवाह बना है।
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मुख्यमंत्री लखनऊ से ऑनलाइन कर सकते हैं लैब का लोकार्पण

बरेली। जिला अस्पताल में बनाई गई लैब का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, एक-दो दिन में लैब का लोकार्पण किया जा सकता है। अस्पताल के एमएस डॉ. एके गौतम ने बताया कि शासन से लोकार्पण के बाबत पत्र मिला है। हालांकि लोकार्पण की तिथि का उसमें जिक्र नहीं है। मगर ऑनलाइन जल्द ही मुख्यमंत्री लखनऊ से लोकार्पण कर सकते हैं। बताया कि लैब में एक साथ 14 सैंपल की जांच हो सकती है। दो से ढाई घंटे में रिपोर्ट भी मिल जाएगी। इससे अस्पताल आ रहे मरीजों समेत अन्य लोगों की जांच तेजी से हो सकेगी। ब्यूरो
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