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एसपी अमरोहा करेंगे शराब माफिया और सीओ के गठजोड़ की जांच
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SP Amroha will investigate the nexus of liquor mafia and CO
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बरेली। शराब के सिंडिकेट में अमरोहा जिले के एक सीओ की पत्नी का नाम आने के बाद एडीजी राजकुमार ने एसपी अमरोहा को पत्र लिखकर सीओ की भूमिका की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने पुलिस मुख्यालय से इस संबंध में भी जानकारी कराई जा रही है कि वहां सीओ ने अपनी पत्नी के कारोबार की जानकारी दी है या नहीं।
शराब कारोबारी मनोज जायसवाल, उसके रिश्तेदार अजय जायसवाल और प्रणय अनेजा की गिरफ्तारी के बाद सामने आया कि अंग्रेजी के अक्षर ए के और जे सरनेम वाले तीन शराब कारोबारी पूरा सिंडिकेट चला रहे हैं। इनसें से मनोज जायसवाल और प्रणय अनेजा गिरफ्तार हो गया लेकिन के अक्षर वाले शराब कारोबारी की कुंडली अभी खंगाली जा रही है। इसी बीच आईजी रमित शर्मा के कार्यालय में एक शिकायती पत्र भेजा गया, जिसमें कहा गया कि इस तिकड़ी में अमरोहा जिले में तैनात एक सीओ भी शामिल है। उनकी पत्नी के नाम पर शराब की कई दुकानें हैं, जिसके चलते सिंडिकेट को उसकी पूरी सरपरस्ती हासिल है। मामला मुरादाबाद रेंज से आईजी ने यह पत्र एडीजी कार्यालय को भेज दिया। इस पर संज्ञान लेकर एडीजी राजकुमार ने बृहस्पतिवार को एसपी अमरोहा को पत्र भेजकर सीओ की भूमिका की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इन सीओ की पत्नी की एक दुकान सुभाषनगर में भी बताई जा रही है।
डीजीपी कार्यालय को संपत्ति और आय की जानकारी देना अनिवार्य : शराब सिंडिकेट में सीओ की पत्नी की पार्टनरशिप की बात सामने आने के बाद एडीजी ने इसके बारे में डीजीपी कार्यालय को भी जानकारी दी है। वहां से पता कराया जा रहा है कि सीओ ने पत्नी के कारोबार और उनकी संपत्ति के बारे में विभाग को सूचना दी है या नहीं। बता दें कि किसी भी पुलिस अफसर को हर साल डीजीपी कार्यालय को अपनी और परिवार की पूरी संपत्ति और आय का ब्योरा देना होता है। ऐसे में अगर वहां सीओ की पत्नी के कार्रवाई की जानकारी छिपाने की बात सामने आई तो सीओ पर कार्रवाई तय है। बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग ने भी इस बहुचर्चित मामले का संज्ञान लिया है और अफसरों से इस संबंध में जानकारी मांगी है।
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58 शराब दुकानों की भी जांच शुरू : शराब सिंडिकेट से जुड़े सीओ के खिलाफ की गई शिकायत में यह भी बताया गया था कि यह सिंडिकेट शराब और बीयर की 58 दुकानें संचालित कर रहा है। इनमें से कई दुकानों के लाइसेंस सीओ की पत्नी के नाम पर है। आबकारी उपायुक्त राजशेखर ने भी इस मामले में जिला आबकारी अधिकारी डीएन दुबे को जांच सौंप दी है।
अवैध शराब के धंधे में सौ करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का है मामला : पिछले साल तीन मार्च को एसटीएफ ने सहारनपुर की टपरी डिस्टिलरी में छापा मारा था। छापे के दौरान यहां करीब सौ करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का मामला सामने आया था। जांच में पता चला था कि एक ही टैक्स इनवॉयस और गेटपास पर दो गाड़ियां निकाली जा रही थीं। आबकारी विभाग के स्थानीय अधिकारी भी इसमें शामिल थे। इस पर कई आबकारी इंस्पेक्टरों को सस्पेंड कर दिया गया था। इस डिस्टिलरी से निकला एक ट्रक बरेली के हरूनगला में भी पकड़ा गया था। इस पूरे मामले में शराब कारोबारी मनोज जायसवाल, अजय जायसवाल और प्रणय अनेजा समेत कई लोग जेल जा चुके हैं।
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शराब कारोबारी मनोज जायसवाल, उसके रिश्तेदार अजय जायसवाल और प्रणय अनेजा की गिरफ्तारी के बाद सामने आया कि अंग्रेजी के अक्षर ए के और जे सरनेम वाले तीन शराब कारोबारी पूरा सिंडिकेट चला रहे हैं। इनसें से मनोज जायसवाल और प्रणय अनेजा गिरफ्तार हो गया लेकिन के अक्षर वाले शराब कारोबारी की कुंडली अभी खंगाली जा रही है। इसी बीच आईजी रमित शर्मा के कार्यालय में एक शिकायती पत्र भेजा गया, जिसमें कहा गया कि इस तिकड़ी में अमरोहा जिले में तैनात एक सीओ भी शामिल है। उनकी पत्नी के नाम पर शराब की कई दुकानें हैं, जिसके चलते सिंडिकेट को उसकी पूरी सरपरस्ती हासिल है। मामला मुरादाबाद रेंज से आईजी ने यह पत्र एडीजी कार्यालय को भेज दिया। इस पर संज्ञान लेकर एडीजी राजकुमार ने बृहस्पतिवार को एसपी अमरोहा को पत्र भेजकर सीओ की भूमिका की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इन सीओ की पत्नी की एक दुकान सुभाषनगर में भी बताई जा रही है।
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डीजीपी कार्यालय को संपत्ति और आय की जानकारी देना अनिवार्य : शराब सिंडिकेट में सीओ की पत्नी की पार्टनरशिप की बात सामने आने के बाद एडीजी ने इसके बारे में डीजीपी कार्यालय को भी जानकारी दी है। वहां से पता कराया जा रहा है कि सीओ ने पत्नी के कारोबार और उनकी संपत्ति के बारे में विभाग को सूचना दी है या नहीं। बता दें कि किसी भी पुलिस अफसर को हर साल डीजीपी कार्यालय को अपनी और परिवार की पूरी संपत्ति और आय का ब्योरा देना होता है। ऐसे में अगर वहां सीओ की पत्नी के कार्रवाई की जानकारी छिपाने की बात सामने आई तो सीओ पर कार्रवाई तय है। बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग ने भी इस बहुचर्चित मामले का संज्ञान लिया है और अफसरों से इस संबंध में जानकारी मांगी है।
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58 शराब दुकानों की भी जांच शुरू : शराब सिंडिकेट से जुड़े सीओ के खिलाफ की गई शिकायत में यह भी बताया गया था कि यह सिंडिकेट शराब और बीयर की 58 दुकानें संचालित कर रहा है। इनमें से कई दुकानों के लाइसेंस सीओ की पत्नी के नाम पर है। आबकारी उपायुक्त राजशेखर ने भी इस मामले में जिला आबकारी अधिकारी डीएन दुबे को जांच सौंप दी है।
अवैध शराब के धंधे में सौ करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का है मामला : पिछले साल तीन मार्च को एसटीएफ ने सहारनपुर की टपरी डिस्टिलरी में छापा मारा था। छापे के दौरान यहां करीब सौ करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का मामला सामने आया था। जांच में पता चला था कि एक ही टैक्स इनवॉयस और गेटपास पर दो गाड़ियां निकाली जा रही थीं। आबकारी विभाग के स्थानीय अधिकारी भी इसमें शामिल थे। इस पर कई आबकारी इंस्पेक्टरों को सस्पेंड कर दिया गया था। इस डिस्टिलरी से निकला एक ट्रक बरेली के हरूनगला में भी पकड़ा गया था। इस पूरे मामले में शराब कारोबारी मनोज जायसवाल, अजय जायसवाल और प्रणय अनेजा समेत कई लोग जेल जा चुके हैं।