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मांगा मातृत्व अवकाश... मिली तबादले की धमकी
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बरेली। जिला नगरीय विकास अभिकरण में मिशन मैनेजर पद पर तैनात महिला मनोरमा बिष्ट ने मातृत्व अवकाश स्वीकृत न किए जाने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अपनी याचिका में उन्होंने कहा है कि अवकाश स्वीकृत करने के बजाय अधिकारी दबाव डालकर उन्हें कार्यालय बुलाते रहे। उन्हें तबादले की चेतावनी भी दी गई। हाईकोर्ट ने डूडा के अधिकारियों से जवाब मांगा है।
डूडा के राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन की सिटी मैनेजर मनोरमा बिष्ट के मुताबिक डॉक्टर की सलाह पर प्रसव के लिए उन्होंने पांच जनवरी 2021 को एक महीने का अवकाश लिया था। इसके बाद एक फ रवरी को ई-मेल के जरिए दो महीने घर से काम करने की अनुमति देने का अफसरों से आग्रह किया क्योंकि प्रसव के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाई थीं, नवजात बच्चे की भी देखभाल करनी थी लेकिन विभागीय अफसर उन पर बार-बार दफ्तर आने दवाब डालते रहे। उन्होंने दफ्तर आने में असमर्थता जताई तो नौकरी से हटाने या दूर किसी और जिले में तबादले की धमकी दी जाने लगी।
मनोरमा का कहना है कि उन्होंने डूडा के परियोजना निदेशक अभिषेक आनंद और परियोजना अधिकारी शैलेंद्र भूषण से कई बार व्यक्तिगत तौर पर भी आग्रह किया लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। मजबूरन उन्हें हाईकोर्ट में रिट दाखिल करनी पड़ी। अब इस मामले में डूडा के परियोजना अधिकारी ने पीओ को पत्रावली के साथ तलब किया है। पीओ शैलेंद्र भूषण का कहना है कि महिला कर्मी आउटसोर्सिंग पर तैनात हैं। उनकी सेवा शर्तों की जानकारी ली जा रही है। विधिक राय लेने के बाद हाईकोर्ट को जवाब भेजा जाएगा।
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डूडा के राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन की सिटी मैनेजर मनोरमा बिष्ट के मुताबिक डॉक्टर की सलाह पर प्रसव के लिए उन्होंने पांच जनवरी 2021 को एक महीने का अवकाश लिया था। इसके बाद एक फ रवरी को ई-मेल के जरिए दो महीने घर से काम करने की अनुमति देने का अफसरों से आग्रह किया क्योंकि प्रसव के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाई थीं, नवजात बच्चे की भी देखभाल करनी थी लेकिन विभागीय अफसर उन पर बार-बार दफ्तर आने दवाब डालते रहे। उन्होंने दफ्तर आने में असमर्थता जताई तो नौकरी से हटाने या दूर किसी और जिले में तबादले की धमकी दी जाने लगी।
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मनोरमा का कहना है कि उन्होंने डूडा के परियोजना निदेशक अभिषेक आनंद और परियोजना अधिकारी शैलेंद्र भूषण से कई बार व्यक्तिगत तौर पर भी आग्रह किया लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। मजबूरन उन्हें हाईकोर्ट में रिट दाखिल करनी पड़ी। अब इस मामले में डूडा के परियोजना अधिकारी ने पीओ को पत्रावली के साथ तलब किया है। पीओ शैलेंद्र भूषण का कहना है कि महिला कर्मी आउटसोर्सिंग पर तैनात हैं। उनकी सेवा शर्तों की जानकारी ली जा रही है। विधिक राय लेने के बाद हाईकोर्ट को जवाब भेजा जाएगा।
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