अपराजिता : सोनी सिंह ने अकेले शुरू किए सफर, फिर बनता गया कारवां, बनीं आत्मनिर्भर
मेकअप स्टूडियो चलाने वाली सोनी सिंह ने क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई, फिर काम को विस्तार दिया। साथ की महिलाओं को मेकअप की बारीकियां सिखाई।
विस्तार
हुनर वह रोशनी है जो निराशा के अंधकार में भी आपको राह दिखा सकती है। बरेली के फरीदपुर के ग्राम पड़ेरा की सोनी सिंह ने इन पंक्तियों को चरितार्थ किया है। उन्होंने हुनर की तीली से आत्मनिर्भरता की जो मशाल जलाई, उससे कई घर रोशन हो रहे हैं। सोनी सिंह ने पहले अकेले ही इस सफर की शुरुआत की। जैसे-जैसे काम आगे बढ़ा, कारवां बनता गया।
सोनी सिंह ने क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई फिर काम को विस्तार दिया। साथ की महिलाओं को मेकअप की बारीकियां सिखाई। आज वह अपना मेकअप स्टूडियो चलाने के साथ ही महिलाओं को इसका प्रशिक्षण भी दे रही हैं। वह महिलाओं को विभिन्न आर्गेनिक उत्पादों की भी जानकारी देती हैं।
ऐसे आया विचार
सोनी ने बताया कि शुरुआत में पढ़ाई के साथ यह सोचकर ब्यूटीशियन का कोर्स किया था कि कभी वक्त पड़ा तो काम आएगा। यह सही भी साबित हुआ। मैंने अपना काम करने का फैसला किया और ब्यूटी पार्लर खोला। शुरुआत में बहुत मेहनत करनी पड़ी, लेकिन जब मेहनत का बेहतर फल मिला तो संतुष्टि भी हुई। सभी ने मेरे काम की सराहना की।
इसलिए बनाई टीम
मैं अकेले काम को और आगे नहीं ले जा सकती थी। इसलिए मैंने ऐसी महिलाओं को चुना जो इस काम में रुचि रखती थीं। कुछ सीखकर आगे बढ़ना चाहती थीं। जैसे-जैसे महिलाएं इस काम में निपुण होती गईं, मेरा काम आसान हो गया। हम एक परिवार की तरह काम करने लगे। काम को विस्तार मिला तो आय भी बढ़ी। सभी को लाभांश मिला तो सबने मन लगाकर मेहनत की। आज साथ की सभी महिलाएं आत्मनिर्भर हो चुकी हैं। परिवार का सहयोग मिलने से यह खुशी दोगुनी हो गई।