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स्मैक तस्करों की सरपरस्त थी एसओजी की निलंबित टीम

Mon, 19 Oct 2020 01:56 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2020 01:56 AM IST
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SOG's suspended team of smack smugglers
demo photo - फोटो : demo photo

तस्करों से वसूली के लिए नीली बोलेरो से अक्सर पहुंचती थी फतेहगंज पश्चिमी
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नए कप्तान के आने से पहले तक जारा था खुला खेल, अब सामने आ रहे कारनामे

बरेली। स्मैक तस्करों से वसूली गई रकम का बंटवारा करते हुए एसओजी की टीम का वीडियो वायरल होने के बाद अब एक-एक कर उसके कारनामों की परतें खुल रही हैं। छानबीन में पता चला है कि स्मैक तस्करी के लिए देश भर में बदनाम फतेहगंज पश्चिमी कस्बे में तस्करों के लिए एसओजी टीम का निलंबित स्टाफ सरपरस्त जैसी भूमिका में था। अक्सर नीली बोलेरो से टीम के लोग तस्करों से उगाही करने पहुंचते थे। नए कप्तान के आने से पहले तक यह खेल खुले तौर पर चल रहा था।
फतेहगंज पश्चिमी को एसओजी ने अपनी नाजायज गतिविधियों का केंद्र बिंदु बना रखा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक टीम के लोगों ने पिछले महीने भी कस्बे के कई तस्करों से वसूली की थी। बताया जा रहा है कि दिखावे को टीम वहां छापे मार रही थी लेकिन असल में उगाही करके लेनदेन के अटके मामले निपटाए जा रहे थे। टीम की नीली बोलेरो अक्सर यहां एक बीयर शॉप के सामने खड़ी नजर आती थी। एक चौकी प्रभारी भी साथ रहते थे। इसी दौरान करोड़ों की स्मैक के मामले में टीम ने एक महिला तस्कर के पति को पकड़ा था जिसके बाद एक स्थानीय सिपाही की मध्यस्थता में डील हुई तो तस्कर के बेटे को सिर्फ 50 ग्राम स्मैक में जेल भेजकर गुडवर्क दिखा दिया गया।
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सपा नेता डॉ. असलम की हत्या के बाद उनके भाई अकरम ने स्मैक तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ आवाज बुलंद की तो उन्हें दुष्कर्म के मामले में फंसाकर जेल भेज दिया गया। हत्या के सारे आरोपियों की अब जमानत हो चुकी है। पुलिस सूत्रों का यहां तक दावा है कि एसओजी की वजह से ही स्मैक तस्करी के खिलाफ किसी की मुंह खोलने की हिम्मत नहीं थी और स्मैक तस्कर भी एसओजी की वजह से खुद को महफूज मानते थे। अब नए एसएसपी की कार्रवाई से हड़कंप मचा है। निलंबित टीम के सदस्यों ने अब तक मोबाइल बंद कर रखे हैं।
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दो अफसर कर रहे टीम की भूमिका की जांच

एसओजी टीम के खिलाफ कोतवाली में दर्ज मामले की विवेचना सीओ सिटी दिलीप सिंह को दी गई है। वह टीम पर लगे आरोपों व अपराध के लिहाज से सच सामने लाने का प्रयास करेंगे। इसमें सबसे पहले तो वीडियो को लैब भेजकर उसकी सत्यता की जांच कराना शामिल है। वहीं एसओजी टीम के खिलाफ विभागीय जांच एसएसपी ने आईपीएस अधिकारी एएसपी साद मियां खां को दे दी है।
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