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Bareilly News: सोशल मीडिया की लत चुरा रही युवाओं की नींद
Thu, 28 Sep 2023 02:48 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Thu, 28 Sep 2023 02:48 AM IST
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बरेली। सोशल मीडिया का अधिक उपयोग युवाओं की नींद चुरा रहा है। वक्त के साथ इसकी आदत लत में बदल रही है। कई लोग सोने के समय में भी सोशल मीडिया के प्रयोग को तरजीह देेने लगे हैं। मनोविज्ञानियों के पास भी सोशल मीडिया की लत से संबंधित कई मामले पहुंच रहे हैं। इसका मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। मनोविज्ञानियों का कहना है कि हर आयु वर्ग के लोग इन्सोम्निया (अनिद्रा) का शिकार हो रहे हैं। संवाद
खुद को नहीं रोक पाते सुमित
केस-1
रामपुर गार्डन के सुमित ने बताया कि वह दिनभर काम के बाद रात आठ बजे घर पहुंचते हैं। खाना खाने के बाद सोशल साइट्स देखते रहते हैं। पत्नी-बच्चों के सो जाने के बाद भी रात दो-तीन बजे तक दोस्तों से चैटिंग करते रहते हैं या रील्स देखते रहते हैं। इस वजह से दिनभर आंखों में थकान रहती है, लेकिन वे खुद को सोशल मीडिया पर समय बिताने से रोक नहीं पाते हैं।
कमजोर हो रही याददाश्त
केस- 2
मनोविज्ञान केंद्र में सलाह के लिए पहुंचीं किला क्षेत्र की अनुप्रिया ने बताया कि उनकी बेटी निशा को नींद नहीं आती। इस वजह से उसकी याददाश्त भी कमजोर हो रही है। वह बात-बात पर गुस्सा करती है। काउंसलर ने उनसे बेटी की दिनचर्या के बारे में पूछा तो पता चला कि उसका ज्यादातर समय सोशल मीडिया पर ही गुजरता है। इससे दिमाग को आराम मिलना बंद हो गया है।
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मनोविज्ञानी की सलाह
बीते एक वर्ष में ऐसे कई मामले सामने आए हैं। सोशल मीडिया का इससे सीधा ताल्लुक है। काउंसलिंग में यह पता चला कि पीड़ित व्यक्ति खाने के बाद देर रात तक फोन का प्रयोग करता है। सोशल मीडिया पर ऑनलाइन रहते हैं। देर रात तक सोशल मीडिया का प्रयोग कुछ देर के लिए आपको अच्छा महसूस करा सकता है, लेकिन इससे नींद प्रभावित हो रही है। पर्याप्त नींद न मिलने की वजह से दिमाग प्रभावित हो रहा है और दिमाग की थकान का असर शरीर पर दिखता है। - वीके श्रीवास्तव, मनोचिकित्सक
इन बातों का रखें ध्यान
- सोशल मीडिया के प्रयोग का समय तय करें।
- सोने और जागने का समय तय करें
- रात में नशीले पदार्थों का सेवन न करें।
- सोने से दो घंटे पहले खाना खाएं।
- सुबह-शाम हल्का व्यायाम करें।
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खुद को नहीं रोक पाते सुमित
केस-1
रामपुर गार्डन के सुमित ने बताया कि वह दिनभर काम के बाद रात आठ बजे घर पहुंचते हैं। खाना खाने के बाद सोशल साइट्स देखते रहते हैं। पत्नी-बच्चों के सो जाने के बाद भी रात दो-तीन बजे तक दोस्तों से चैटिंग करते रहते हैं या रील्स देखते रहते हैं। इस वजह से दिनभर आंखों में थकान रहती है, लेकिन वे खुद को सोशल मीडिया पर समय बिताने से रोक नहीं पाते हैं।
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कमजोर हो रही याददाश्त
केस- 2
मनोविज्ञान केंद्र में सलाह के लिए पहुंचीं किला क्षेत्र की अनुप्रिया ने बताया कि उनकी बेटी निशा को नींद नहीं आती। इस वजह से उसकी याददाश्त भी कमजोर हो रही है। वह बात-बात पर गुस्सा करती है। काउंसलर ने उनसे बेटी की दिनचर्या के बारे में पूछा तो पता चला कि उसका ज्यादातर समय सोशल मीडिया पर ही गुजरता है। इससे दिमाग को आराम मिलना बंद हो गया है।
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मनोविज्ञानी की सलाह
बीते एक वर्ष में ऐसे कई मामले सामने आए हैं। सोशल मीडिया का इससे सीधा ताल्लुक है। काउंसलिंग में यह पता चला कि पीड़ित व्यक्ति खाने के बाद देर रात तक फोन का प्रयोग करता है। सोशल मीडिया पर ऑनलाइन रहते हैं। देर रात तक सोशल मीडिया का प्रयोग कुछ देर के लिए आपको अच्छा महसूस करा सकता है, लेकिन इससे नींद प्रभावित हो रही है। पर्याप्त नींद न मिलने की वजह से दिमाग प्रभावित हो रहा है और दिमाग की थकान का असर शरीर पर दिखता है। - वीके श्रीवास्तव, मनोचिकित्सक
इन बातों का रखें ध्यान
- सोशल मीडिया के प्रयोग का समय तय करें।
- सोने और जागने का समय तय करें
- रात में नशीले पदार्थों का सेवन न करें।
- सोने से दो घंटे पहले खाना खाएं।
- सुबह-शाम हल्का व्यायाम करें।