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स्मार्ट सिटी: आएगी कभी बहार भी, अभी धूल के गुबार देखिए

Sat, 20 Feb 2021 12:42 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 20 Feb 2021 12:42 AM IST
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Smart City: Will ever come outside, now see the dust
बियाबानी रोड पर उड़ती धूल। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

जल निगम ने जहां-जहां खोदाई की, वहां गरमी बढ़ते ही उड़ने लगे धूल के बवंडर
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चौकी चौराहे से बियावानी कोठी और कालीबाड़ी-श्यामगंज में बुरा हाल

बरेली। लोगों को स्मार्ट सिटी का इंतजार था लेकिन फिलहाल पूरा शहर धूल के गुबार में घिरा हुआ है। चौपुला पर फ्लाईओवर के निर्माण के साथ जहां-जहां जल निगम सड़कों को खोदा है, वहां हालात ज्यादा खराब हैं। अब तक हालात इसलिए काबिले बर्दाश्त थे क्योंकि मौसम में नमी की वजह से धूल जहां के तहां जमी हुई थी लेकिन अब गर्मी बढ़ने के साथ बुरा हाल होना शुरू हो गया है।
सड़कों पर इस कदर धूल उड़ रही है कि सांस लेना तो दूर ठीक से दिखना भी मुश्किल है। जल निगम ने ट्रंक सीवर लाइन बिछाने के लिए जहां-जहां सड़कों को खोदा है, उन्हें मिट्टी से पाटकर छोड़ दिया है। गर्मी में यह मिट्टी खुश्क होने के साथ धूल के गुबार में तब्दील हो रही है। कायदे में जल निगम को खोदाई के बाद सड़कों पर पत्थर डालकर रोलिंग कराने के साथ पानी का छिड़काव भी करना चाहिए था लेकिन उसके अफसर इस मामले में पूरी तरह बेपरवाह बने हुए हैं। जिला प्रशासन और नगर निगम के अफसर भी शहरवासियों की समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल की गाइड लाइन तक का भी किसी को कोई ख्याल नहीं है।
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धूल उड़ने से वैसे तो पूरा शहर समस्या झेल रहा है लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कत कंपनी बाग, प्रभा टॉकीज रोड, बियावानी चौराहा, चौकी चौराहा, सेठ दामोदर स्वरूप पार्क के पास, पुलिस लाइन रोड के साथ किला रोड पर बनी हुई है। हालांकि इसके बावजूद जल निगम के एक्सईएन संजय कुमार का दावा है कि खोदी गई सड़कों पर रोज पानी का छिड़काव कराया जा रहा है।
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280 एक्यूआई, लगातार शहर में बढ़ रहा प्रदूषण

मौसम में गर्माहट आने के बाद तेज धूप हवाओं में नमी कम कर रही है। इससे टूटी-फूटी सड़कों और अव्यवस्थित निर्माण कार्यों से हवा चलने से धूल के गुबार उठ रहे हैं। इसी वजह से वायु प्रदूषण का ग्राफ भी हर दिन बढ़ता जा रहा है। पिछले सप्ताह एक्यूआई 260-270 रिकॉर्ड हुआ था जो अब 280 पहुंच गया है। बरेली कॉलेज में बॉटनी विभाग के प्रोफेसर डॉ. डीके सक्सेना कहते हैं कि निर्माण कार्यों में एनजीटी की गाइड लाइन के पालन और जर्जर सड़कों की मरम्मत से हालात में सुधार हो सकता है। करीब तीन महीने पहले प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर नगर निगम, जल निगम और सेतु निगम को इस संबंध में पत्र लिखा गया था लेकिन उस पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई।
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