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Bareilly News: जिला अस्पताल में फिजिशियन के भरोसे चर्म रोगी, दो साल से पद रिक्त
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बरेली। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के दावों पर त्वचा रोग विशेषज्ञ की कमी भारी पड़ रही है। जिला अस्पताल में रिक्त चर्म रोग विशेषज्ञ के पद पर अब तक तैनाती नहीं हुई। इलाज को पहुंच रहे मरीजाें को तीन सौ बेड वाले अस्पताल में भेजा जा रहा है या फिर फिजिशियन उन्हें देख रहे हैं।
जिला अस्पताल में तैनात रहे चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. त्रिभुवन प्रसाद का वर्ष 2023 में प्रमोशन हो गया। उन्हें महिला अस्पताल के सीएमएस बनाया गया है। उनके जाने के बाद से त्वचा रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई। मेडिकल कॉलेजों में डर्मेटोलॉजी पढ़ रहे विद्यार्थी इंटर्नशिप के लिए यहां आते हैं। उन्हें ही इसकी जिम्मेदारी दे दी जाती है। करीब चार माह पूर्व इंटर्नशिप का बैच जाने के बाद से चर्म रोगियों के इलाज के लिए कोई चिकित्सक नहीं है। एडी एसआईसी डॉ. अलका शर्मा ने बताया कि तैनाती के लिए शासन को पांच बार रिमाइंडर भेज चुके हैं। अब तक किसी की तैनाती नहीं हुई। बताया कि तीन सौ बेड अस्पताल में त्वचा रोग विशेषज्ञ की ओपीडी शिफ्ट हो गई है। जो मरीज पहुंचते हैं, उन्हें जानकारी देकर भेजा जा रहा है। होम्योपैथी, आयुर्वेदिक, एलोपैथ पद्धति से भी इलाज के लिए रोज दो सौ मरीज पहुंचते हैं।
बर्न वार्ड में झुलसे मरीजों को देख रहे हैं ड्रेसर
जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में भी प्लास्टिक सर्जन तैनात नहीं है। संविदा पर तैनात दो ड्रेसर ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं। नर्सिंग स्टाफ ने बताया कि इलाज के लिए पहुंच रहे करीब 50 फीसदी झुलसे मरीजों का इलाज सर्जन की निगरानी में हो रहा है। गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। माह में छह से सात केस ऐसे पहुंचते हैं। जिसमें से दो-तीन केस रेफर होते हैं।
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तीन सौ बेड अस्पताल में इंटर्न देख रहे मरीज
करीब चार माह पहले तीन सौ बेड अस्पताल में इंटर्न जूनियर डॉक्टरों के जाने के बाद त्वचा रोग की ओपीडी बंद हो गई थी। अब फिर जूनियर डॉक्टर के आने से ओपीडी संचालित होने लगी है। उनकी इंटर्नशिप पूरी होने पर वह लौट जाएंगी। सीएमएस डॉ. इंतजार हुसैन ने बताया कि त्वचा रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने से जूनियर डॉक्टर की सेवा लेनी पड़ रही है। सभी दवाएं अस्पताल में उपलब्ध हैं। अमर उजाला ब्यूरो
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जिला अस्पताल में तैनात रहे चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. त्रिभुवन प्रसाद का वर्ष 2023 में प्रमोशन हो गया। उन्हें महिला अस्पताल के सीएमएस बनाया गया है। उनके जाने के बाद से त्वचा रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई। मेडिकल कॉलेजों में डर्मेटोलॉजी पढ़ रहे विद्यार्थी इंटर्नशिप के लिए यहां आते हैं। उन्हें ही इसकी जिम्मेदारी दे दी जाती है। करीब चार माह पूर्व इंटर्नशिप का बैच जाने के बाद से चर्म रोगियों के इलाज के लिए कोई चिकित्सक नहीं है। एडी एसआईसी डॉ. अलका शर्मा ने बताया कि तैनाती के लिए शासन को पांच बार रिमाइंडर भेज चुके हैं। अब तक किसी की तैनाती नहीं हुई। बताया कि तीन सौ बेड अस्पताल में त्वचा रोग विशेषज्ञ की ओपीडी शिफ्ट हो गई है। जो मरीज पहुंचते हैं, उन्हें जानकारी देकर भेजा जा रहा है। होम्योपैथी, आयुर्वेदिक, एलोपैथ पद्धति से भी इलाज के लिए रोज दो सौ मरीज पहुंचते हैं।
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बर्न वार्ड में झुलसे मरीजों को देख रहे हैं ड्रेसर
जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में भी प्लास्टिक सर्जन तैनात नहीं है। संविदा पर तैनात दो ड्रेसर ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं। नर्सिंग स्टाफ ने बताया कि इलाज के लिए पहुंच रहे करीब 50 फीसदी झुलसे मरीजों का इलाज सर्जन की निगरानी में हो रहा है। गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। माह में छह से सात केस ऐसे पहुंचते हैं। जिसमें से दो-तीन केस रेफर होते हैं।
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तीन सौ बेड अस्पताल में इंटर्न देख रहे मरीज
करीब चार माह पहले तीन सौ बेड अस्पताल में इंटर्न जूनियर डॉक्टरों के जाने के बाद त्वचा रोग की ओपीडी बंद हो गई थी। अब फिर जूनियर डॉक्टर के आने से ओपीडी संचालित होने लगी है। उनकी इंटर्नशिप पूरी होने पर वह लौट जाएंगी। सीएमएस डॉ. इंतजार हुसैन ने बताया कि त्वचा रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने से जूनियर डॉक्टर की सेवा लेनी पड़ रही है। सभी दवाएं अस्पताल में उपलब्ध हैं। अमर उजाला ब्यूरो