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बरेलीः फिर किया हैरान... शिवचरन कश्यप बने सपा जिलाध्यक्ष
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बरेली। समाजवादी पार्टी ने अपने जिलाध्यक्ष अगम मौर्य को बिथरी सीट से टिकट दिया तो उनकी जगह किसी यादव को जिलाध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा शुरू हो गई थी लेकिन हाईकमान ने शिवचरन कश्यप को जिलाध्यक्ष बनाकर चौंका दिया। माना जा रहा है कि सपा ने शिवचरन को जिलाध्यक्ष बनाकर विधानसभा चुनाव में पिछड़ा कार्ड और मजबूत किया है।
समाजवादी पार्टी इस विधानसभा चुनाव में काफी सतर्कता के साथ जातिगत समीकरणों को साधने में जुटी हुई है। शिवचरन कश्यप को बरेली का नया जिलाध्यक्ष बनाए जाने को भी उसकी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। जातिगत समीकरणों के लिहाज से देखा जाए तो मीरगंज में 15 हजार, नवाबगंज में 18 हजार, शहर और कैंट सीट पर करीब दस हजार मतदाता कश्यप बिरादरी के हैं। इसके अलावा अन्य सीटों पर इस बिरादरी के मतदाता हैं।
सपा ने इससे पहले भी अप्रत्याशित तौर पर मौर्य जाति से ताल्लुक रखने वाले अगम मौर्य को जिलाध्यक्ष बनाया था। गैर यादव को जिलाध्यक्ष बनाए जाने पर शुरू में अगम मौर्य का पार्टी में विरोध भी हुआ था। अगम मौर्य को बिथरी से चुनाव मैदान में उतारे जाने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि फिर कोई यादव जिलाध्यक्ष बनेगा। कई यादव नेताओं ने इस पद पर दावा भी ठोका था।
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समाजवादी पार्टी इस विधानसभा चुनाव में काफी सतर्कता के साथ जातिगत समीकरणों को साधने में जुटी हुई है। शिवचरन कश्यप को बरेली का नया जिलाध्यक्ष बनाए जाने को भी उसकी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। जातिगत समीकरणों के लिहाज से देखा जाए तो मीरगंज में 15 हजार, नवाबगंज में 18 हजार, शहर और कैंट सीट पर करीब दस हजार मतदाता कश्यप बिरादरी के हैं। इसके अलावा अन्य सीटों पर इस बिरादरी के मतदाता हैं।
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सपा ने इससे पहले भी अप्रत्याशित तौर पर मौर्य जाति से ताल्लुक रखने वाले अगम मौर्य को जिलाध्यक्ष बनाया था। गैर यादव को जिलाध्यक्ष बनाए जाने पर शुरू में अगम मौर्य का पार्टी में विरोध भी हुआ था। अगम मौर्य को बिथरी से चुनाव मैदान में उतारे जाने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि फिर कोई यादव जिलाध्यक्ष बनेगा। कई यादव नेताओं ने इस पद पर दावा भी ठोका था।
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