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सादगी और अकीदत से अदा की गई शराफत मियां के कुल की रस्म
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उर्स में आए अकीदतमंद।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
दरगाह न पहुंचकर तमाम लोगों ने घरों पर की नियाज फातिहा, फ्रांस राष्ट्रपति की भी की गई निंदा
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बरेली। हजरत शाह शराफत अली मियां का चार रोजा उर्स सादगी और अकीदत के साथ मनाया गया। कोविड-19 की तमाम एहतियात के चलते न कहीं जायरीन का रेला दिखा न अकीदत के नारों की गू्ंज, बस रस्म अदायगी हुई। कुल की रस्म में जरूर कुछ अकीदतमंद नजर आए, मगर दुआ के बाद जल्द ही लोग वापस भी हो गए।
उर्स-ए-शराफती के आखिरी रोज बृहस्पतिवार को सुबह दस्तूर के मुताबिक दरगाह शरीफ पर तिलावते कलाम के बाद तकरीरी कार्यक्रम हुआ। इसमें प्रोफेसर महमूद उल हसन ने हजरत शाह शराफत अली मियां की रूहानी जिंदगी पर रोशनी डाली। साथ ही लोगों ने कहा कि ईद मिलादुन्नबी पर सादगी के साथ आका का जश्न मनाएं।
तकरीर के बाद कुल शरीफ की रस्म पीरो मुर्शिद सकलैन मियां ने अदा की। बाद में दुआ करते हुए कहा कि कोरोना महामारी से अल्लाह हम सब को निजात दे, मुल्क में अमन और सलामती कायम करे, एक दूसरे में इंसानियत और मोहब्बत का जजबा पैदा करे और एक दूसरे से आपसी रंजिश और बुराई खत्म हो।
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इस मौके पर अल्हाज मुमताज मियां ने अपनी तकरीर में कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने जो शाने रिसालत में गुस्ताखी की है उसकी पुरजोर मजम्मत करते हैं। इस मौके पर अल्हाज गाजी मियां, मुंतखब मियां नूर, सादिकैन मियां, हाफिज गुलाम गौस, हाफिज जाने आलम, मौलाना मुखतार सकलैनी, इंतेखाब सकलैनी, आफताब आलम आदि मौजूद रहे।
उर्स-ए-शराफती के आखिरी रोज बृहस्पतिवार को सुबह दस्तूर के मुताबिक दरगाह शरीफ पर तिलावते कलाम के बाद तकरीरी कार्यक्रम हुआ। इसमें प्रोफेसर महमूद उल हसन ने हजरत शाह शराफत अली मियां की रूहानी जिंदगी पर रोशनी डाली। साथ ही लोगों ने कहा कि ईद मिलादुन्नबी पर सादगी के साथ आका का जश्न मनाएं।
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तकरीर के बाद कुल शरीफ की रस्म पीरो मुर्शिद सकलैन मियां ने अदा की। बाद में दुआ करते हुए कहा कि कोरोना महामारी से अल्लाह हम सब को निजात दे, मुल्क में अमन और सलामती कायम करे, एक दूसरे में इंसानियत और मोहब्बत का जजबा पैदा करे और एक दूसरे से आपसी रंजिश और बुराई खत्म हो।
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इस मौके पर अल्हाज मुमताज मियां ने अपनी तकरीर में कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने जो शाने रिसालत में गुस्ताखी की है उसकी पुरजोर मजम्मत करते हैं। इस मौके पर अल्हाज गाजी मियां, मुंतखब मियां नूर, सादिकैन मियां, हाफिज गुलाम गौस, हाफिज जाने आलम, मौलाना मुखतार सकलैनी, इंतेखाब सकलैनी, आफताब आलम आदि मौजूद रहे।